26,776 से अधिक मामलों का एक दिन में समाधान: नेशनल लोक अदालत में रिकॉर्ड सेटलमेंट, पक्षकारों के चेहरे में दिखी खुशी

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com

घरघोड़ा। न्याय तक आसान पहुंच और त्वरित समाधान की अवधारणा को साकार करते हुए व्यवहार न्यायालय घरघोड़ा में आयोजित नेशनल लोक अदालत ने एक बार फिर अपनी उपयोगिता साबित की। अदालत परिसर में दिनभर चले इस आयोजन में आपसी सहमति और राजीनामा के आधार पर बड़ी संख्या में प्रकरणों का निराकरण किया गया, जिससे न केवल न्यायालयों का बोझ कम हुआ बल्कि पक्षकारों के चेहरों पर संतोष और राहत भी साफ झलकती रही।
लोक अदालत में विभिन्न प्रकृति के मामलों—विशेषकर मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण, आपराधिक, चेक बाउंस (एनआई एक्ट) एवं समरी प्रकरणों—को प्राथमिकता के साथ लिया गया। आंकड़ों के अनुसार कुल 27 आपराधिक प्रकरण, 3 एनआई एक्ट प्रकरण, 796 समरी प्रकरण तथा उल्लेखनीय रूप से 26,774 प्री-लिटिगेशन प्रकरणों का सफलतापूर्वक निराकरण किया गया। इन मामलों में पक्षकारों के बीच आपसी समझ और सहमति से कुल 1,95,51,65,514 रुपये की राशि पर सेटलमेंट हुआ, जो इस आयोजन की प्रभावशीलता को दर्शाता है।
कार्यक्रम के दौरान न्यायालय परिसर में विधिक साक्षरता शिविर का भी आयोजन किया गया। यह शिविर श्री दामोदर प्रसाद चंद्रा, व्यवहार न्यायाधीश (वरिष्ठ श्रेणी), घरघोड़ा एवं श्रीमती मिनी ठाकुर, व्यवहार न्यायाधीश (कनिष्ठ श्रेणी), घरघोड़ा की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। शिविर में पैरालीगल वालंटियर्स—मौशमी शर्मा, सदानंद सिंह, सावित्री डनसेना, टीकम सिंह सिदार, सुभाष चौधरी एवं बालकृष्ण चौहान—की सक्रिय भागीदारी रही। अधिवक्ताओं, बैंककर्मियों, पक्षकारों और आम नागरिकों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को सार्थक बनाया।
शिविर में ‘मध्यस्थता अभियान 3.0’ के तहत मध्यस्थता की भूमिका और महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने बताया कि पारिवारिक, भूमि-संपत्ति, लेन-देन तथा पड़ोसी विवाद जैसे मामलों में बातचीत और सहमति के जरिए समाधान निकालना न केवल संभव है, बल्कि यह प्रक्रिया अधिक सौहार्दपूर्ण और स्थायी भी होती है।
विशेषज्ञों ने यह भी रेखांकित किया कि लोक अदालत के माध्यम से समझौतायोग्य मामलों—जैसे धन-वसूली, चेक बाउंस, पारिवारिक विवाद और मोटर दुर्घटना दावों—का शीघ्र निपटारा कर समय और धन दोनों की बचत की जा सकती है। इससे न्यायिक प्रक्रिया सरल और सुलभ बनती है तथा पक्षकारों के बीच संबंध भी बेहतर बने रहते हैं।
नेशनल लोक अदालत का यह आयोजन न केवल त्वरित न्याय की दिशा में एक सशक्त कदम साबित हुआ, बल्कि यह भी दर्शाता है कि संवाद और सहमति के जरिए विवादों का समाधान संभव है—बस जरूरत है सही मंच और पहल की।
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