जनसुनवाई में पति का सनसनीखेज कबूलनामा: “दूसरी महिला से रिश्ता…” महिला आयोग सख्त, तुरंत कार्रवाई
Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com
अगस्त 16, 2026। छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की जनसुनवाई में एक ऐसा मामला सामने आया जिसने सबको चौंका दिया। आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू की मौजूदगी में एक पति ने सरेआम स्वीकार किया कि उसका किसी अन्य महिला के साथ अवैध संबंध है और वह अपनी पत्नी को किसी भी कीमत पर साथ नहीं रखेगा। पति के इस अड़ियल और गैर-जिम्मेदाराना रुख को देखते हुए आयोग ने तुरंत सख्त कानूनी कार्रवाई का आदेश दिया।
मुख्य मामला और आयोग का सख्त फैसला
पति का सनसनीखेज कबूलनामा: सुनवाई के दौरान पीड़ित पत्नी ने पति पर गंभीर प्रताड़ना और उपेक्षा का आरोप लगाया। इस पर पति ने बिना किसी झिझक के यह मान लिया कि उसके जीवन में दूसरी महिला है और वह पत्नी को अपनाने से साफ इनकार कर रहा है।
तुरंत एफआईआर के निर्देश: मामले की गंभीरता को भांपते हुए आयोग ने पीड़िता को पति के खिलाफ उतई थाने में वैवाहिक क्रूरता, प्रताड़ना और धोखाधड़ी की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कराने की अनुमति दे दी।
निशुल्क विधिक सहायता: पीड़िता को मौके पर ही आदेश की प्रमाणित प्रति निशुल्क दी गई और जरूरत पड़ने पर शासन की तरफ से मुफ्त कानूनी मदद दिलाने के निर्देश भी दिए गए।
जनसुनवाई के अन्य अहम फैसले
दहेज प्रताड़ना पर तुरंत एक्शन: दहेज प्रताड़ना से जुड़े एक मामले में शिकायत सही पाए जाने पर आयोग ने महिला थाना प्रभारी को तत्काल एफआईआर दर्ज करने के कड़े निर्देश जारी किए।
बच्चे से मिलने की सहमति: भरण-पोषण और बच्चे की कस्टडी से जुड़े विवाद में आयोग ने मध्यस्थता की, जिसके बाद पिता महीने में कम से कम एक बार अपने बच्चे से मिल सकेगा। पत्नी को भरण-पोषण के लिए अदालत में वाद दायर करने की सलाह दी गई।
न्यायालय में लंबित प्रकरण: दुष्कर्म (धारा 376) से जुड़ा एक मामला पहले से ही कोर्ट में गवाही के स्तर पर चल रहा था, इसलिए आयोग ने अपने स्तर पर चल रही कार्यवाही को बंद (नस्तीबद्ध) कर दिया।
खुशी से लौटी गृहस्थी: एक अन्य मामले में महिला ने अपने पति के साथ खुशी-खुशी रहने की इच्छा जताई और केस वापस ले लिया। आयोग ने पति को कड़ी हिदायत दी कि वह अपनी पत्नी को हमेशा सम्मान के साथ रखे।
आयोग का स्पष्ट संदेश
अध्यक्ष डॉ. ममता साहू ने दो टूक शब्दों में कहा कि आयोग की सबसे पहली प्राथमिकता टूटते परिवारों को बचाना और आपसी सुलह कराना है। हालांकि, यदि पति या ससुराल पक्ष अपनी हरकतों से बाज नहीं आते और महिलाओं पर अत्याचार करते हैं, तो उन्हें बख्शा नहीं जाएगा और पुलिस व न्यायपालिका के जरिए कड़े से कड़ा कानूनी सबक सिखाया जाएगा।
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