Latest News

रायगढ़ में सायबर अपराध : डेढ़ साल में सिर्फ 12 केस दर्ज, 3.79 करोड़ की वसूली अब भी अधर में

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com

रायगढ़, 3 अगस्त 2026।
डिजिटल युग के विस्तार के साथ सायबर अपराधों का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन रायगढ़ जिले के आधिकारिक आंकड़े एक अलग ही तस्वीर पेश कर रहे हैं। बीते डेढ़ वर्ष—जनवरी 2025 से जून 2026—के बीच जिले में सायबर ठगी के मात्र 12 प्रकरण पंजीबद्ध किए गए, जबकि जमीनी स्तर पर शिकायतों की संख्या इससे कहीं अधिक बताई जा रही है। आंकड़ों और वास्तविकता के बीच यह अंतर कई सवाल खड़े करता है।

विधानसभा में प्रस्तुत जानकारी के अनुसार, दर्ज 12 मामलों में से 7 प्रकरणों की विवेचना पूरी कर आरोपियों को न्यायालय में पेश किया जा चुका है। इन मामलों में दो चर्चित “डिजिटल अरेस्ट” के प्रकरण भी शामिल हैं, जिनमें करीब 60 लाख रुपये की ठगी की गई थी। हालांकि, इन मामलों में अब तक केवल लगभग साढ़े छह लाख रुपये की ही बरामदगी संभव हो सकी है। कुल मिलाकर पंजीबद्ध मामलों में लगभग 3.79 करोड़ रुपये की राशि अब भी वसूली के दायरे में है।

शिकायतें ज्यादा, केस कम—कहां अटक रही प्रक्रिया?
जिले में सायबर ठगी के मामलों की बढ़ती संख्या को देखते हुए अलग सायबर थाना और विशेष टीम का गठन किया गया है। संसाधनों की उपलब्धता के बावजूद पंजीकरण के आंकड़े सीमित क्यों हैं, यह सवाल स्वाभाविक है। सूत्रों के अनुसार, शिकायत मिलने के बाद पुलिस पहले प्रारंभिक जांच करती है। मामला सही पाए जाने पर ही आगे की कार्रवाई शुरू होती है। इस प्रक्रिया के दौरान कई मामलों में औपचारिक एफआईआर दर्ज होने में देरी होती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस देरी का सीधा असर जांच की गति और परिणामों पर पड़ता है। सायबर अपराधों में ठग अक्सर रकम को जल्दी-जल्दी अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर देते हैं, जिससे ट्रेसिंग और रिकवरी मुश्किल हो जाती है।

कार्रवाई के दबाव से बचने की रणनीति?
पुलिस तंत्र के भीतर यह भी चर्चा है कि प्रारंभिक स्तर पर केस दर्ज करने से कार्रवाई का दबाव बढ़ता है, इसलिए कई मामलों में पहले जांच पूरी करने पर जोर दिया जाता है। हालांकि, इस रणनीति के कारण पीड़ितों को न्याय मिलने में देरी होती है और ठगी की रकम की रिकवरी की संभावना भी कम हो जाती है।

बदलता अपराध का स्वरूप
रायगढ़ सहित पूरे प्रदेश में पारंपरिक चोरी-डकैती की तुलना में बैंक खातों और डिजिटल माध्यमों से ठगी के मामले तेजी से बढ़े हैं। ऑनलाइन फ्रॉड, फर्जी कॉल, लिंक और डिजिटल अरेस्ट जैसे नए तरीकों ने आम नागरिकों के लिए खतरा बढ़ा दिया है।

आगे की राह
विशेषज्ञों का मानना है कि सायबर अपराध से निपटने के लिए त्वरित एफआईआर, तकनीकी संसाधनों का बेहतर उपयोग और आम लोगों में जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है। साथ ही, पुलिस और बैंकिंग सिस्टम के बीच समन्वय को और मजबूत करने की आवश्यकता है, ताकि ठगी की रकम को समय रहते रोका जा सके।

रायगढ़ के आंकड़े भले सीमित दिखें, लेकिन वास्तविक चुनौती इससे कहीं बड़ी है—और यही चुनौती प्रशासनिक तंत्र के सामने सबसे बड़ा सवाल बनकर खड़ी है।

See also  सर्व नाई समाज तमनार के अध्यक्ष उमेश कुमार श्रीवास ने दिया इस्तीफा

अन्य अधिक खबरों के लिए स्क्रॉल डाउन करें 👇⬇️

Amar Chouhan

AmarKhabar.com एक हिन्दी न्यूज़ पोर्टल है, इस पोर्टल पर राजनैतिक, मनोरंजन, खेल-कूद, देश विदेश, एवं लोकल खबरों को प्रकाशित किया जाता है। छत्तीसगढ़ सहित आस पास की खबरों को पढ़ने के लिए हमारे न्यूज़ पोर्टल पर प्रतिदिन विजिट करें।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button