रोज़गार की तलाश में गए थे, लौटे नहीं: कुलगाम हमले में छत्तीसगढ़ के दो मजदूरों की मौत, परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com
रायपुर/सारंगढ़-सक्ति। बेहतर रोज़गार की उम्मीद में सैकड़ों किलोमीटर दूर गए छत्तीसगढ़ के दो युवकों की जिंदगी जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकी हमले की भेंट चढ़ गई। में शुक्रवार को हुए इस हमले ने न केवल दो परिवारों के सहारे छीन लिए, बल्कि उस कड़वी सच्चाई को भी सामने ला दिया कि मामूली अतिरिक्त कमाई के लिए मजदूरों को कितने बड़े जोखिम उठाने पड़ते हैं।
मृतकों में सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के चुइया गांव निवासी भूपेंद्र भईना और सक्ती जिले के बुंदेली गांव के 24 वर्षीय दीपक रात्रे शामिल हैं। दोनों ही अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए कश्मीर में मजदूरी कर रहे थे।
इलाज के दौरान थमी सांसें, पीछे छूटा परिवार
भूपेंद्र भईना पिछले चार-पांच महीनों से कश्मीर में काम कर रहे थे। हमले के दौरान उन्हें नजदीक से गोली मारी गई, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें इलाज के लिए श्रीनगर के अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां शनिवार सुबह उन्होंने दम तोड़ दिया। भूपेंद्र अपने पीछे पत्नी और तीन साल के बच्चे को छोड़ गए हैं, जिनके सामने अब जीवनयापन का बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर है कि उनके शव को छत्तीसगढ़ लाने की व्यवस्था तक संभव नहीं हो सकी। भूपेंद्र के भाई अनुराग ने बताया कि घर में न तो पर्याप्त पैसे हैं और न ही ऐसे संसाधन, जिससे वे कश्मीर जाकर पार्थिव शरीर ला सकें। माता-पिता की तबीयत भी खराब है। ऐसे में स्थानीय प्रशासन की देखरेख में जम्मू-कश्मीर में ही उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
इकलौता कमाने वाला भी छिना, परिवार बेसहारा
दूसरे मृतक दीपक रात्रे की कहानी भी उतनी ही दर्दनाक है। वे अपने परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य थे। करीब आठ महीने पहले वे अपनी पत्नी के साथ ईंट-भट्ठे में काम करने कश्मीर गए थे, जबकि चार साल के बेटे को गांव में ही छोड़ दिया था। हमले के दौरान दीपक की मौके पर ही मौत हो गई।
परिजनों के मुताबिक, स्थानीय स्तर पर मिलने वाली मजदूरी से महज 150 से 250 रुपये अधिक कमाने की उम्मीद में दीपक ने बाहर जाने का फैसला किया था। लेकिन यह छोटा सा अंतर उनके परिवार के लिए जीवनभर का घाव बन गया। दीपक के पिता का पहले ही निधन हो चुका है और उनका छोटा भाई दिव्यांग है। अब परिवार पूरी तरह असहाय स्थिति में आ गया है।
सरकार ने जताया दुख, मदद का भरोसा
घटना पर मुख्यमंत्री ने गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने हमले की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि यह कायरतापूर्ण कृत्य है और राज्य सरकार पीड़ित परिवारों के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है। उन्होंने प्रभावित परिवारों को हर संभव आर्थिक सहायता और आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है।
एक सवाल जो फिर खड़ा हुआ
यह घटना एक बार फिर उन परिस्थितियों पर सवाल खड़े करती है, जिनके चलते ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर तबके के लोग मामूली अतिरिक्त आय के लिए दूरदराज और संवेदनशील क्षेत्रों में काम करने को मजबूर हो जाते हैं। रोजगार की कमी और बेहतर अवसरों की तलाश उन्हें ऐसे जोखिम भरे हालात तक ले जाती है, जहां उनकी सुरक्षा तक सुनिश्चित नहीं रह पाती।
कुलगाम की यह घटना अब केवल एक आतंकी हमले की खबर नहीं रही, बल्कि यह उन अनगिनत परिवारों की पीड़ा का प्रतीक बन गई है, जिनके सपने रोज़ी-रोटी की तलाश में कहीं दूर जाकर टूट जाते हैं।
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