रायगढ़ में दोहरी आफत: उग्र बंदरों का हमला, हाथियों के झुंड ने जाम की मुख्य सड़क — वन विभाग अलर्ट मोड पर

Journalist Amardeep Chauhan
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रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में इन दिनों मानव-वन्यजीव संघर्ष ने गंभीर रूप ले लिया है। जिले के ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में एक ओर जहां बंदरों का बढ़ता आक्रामक व्यवहार लोगों के लिए मुसीबत बन गया है, वहीं दूसरी ओर हाथियों का झुंड मुख्य मार्गों तक पहुंचकर जनजीवन को बाधित कर रहा है। हालात ऐसे हैं कि कई गांवों में दहशत का माहौल व्याप्त है और लोग घरों से निकलने में भी भय महसूस कर रहे हैं।
चिराईपानी में बंदरों का आतंक, घरों में घुसकर कर रहे हमले
घटना का एक प्रमुख केंद्र चिराईपानी गांव बना हुआ है, जहां बंदरों के झुंड ने उत्पात मचा रखा है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार बंदर न केवल घरों में घुसकर सामान बिखेर रहे हैं, बल्कि लोगों पर हमला कर उन्हें घायल भी कर रहे हैं। अब तक एक दर्जन से अधिक लोग बंदरों के हमले का शिकार हो चुके हैं। शुक्रवार सुबह की घटना में एक महिला समेत दो लोगों को बंदरों ने काटकर गंभीर रूप से घायल कर दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि बार-बार सूचना देने के बावजूद वन विभाग की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है, जिससे लोगों में आक्रोश भी पनप रहा है।
बंगुरसिया क्षेत्र में हाथियों का डेरा, सड़क पर घंटों लगा जाम
इधर, बंगुरसिया और आसपास के इलाकों में हाथियों के झुंड की सक्रियता ने हालात और भी गंभीर बना दिए हैं। जानकारी के मुताबिक करीब दो दर्जन हाथियों का दल क्षेत्र में विचरण कर रहा है, जिनमें से कुछ हाथी अपने झुंड से अलग होकर लगातार उत्पात मचा रहे हैं। गुरुवार देर रात ये हाथी रायगढ़–सुंदरगढ़–तमनार मार्ग पर आ गए, जिससे सड़क पर आवागमन पूरी तरह ठप हो गया।
रात भर सड़क पर वाहनों की लंबी कतार लगी रही और सुबह तक हालात सामान्य नहीं हो सके। इस दौरान कई यात्रियों को बीच रास्ते में ही रुकना पड़ा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हाथियों की मौजूदगी के कारण क्षेत्र में भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है।
दो लोग घायल, गांवों में मुनादी — वन विभाग की अपील
हाथियों के हमले में अब तक दो लोगों के घायल होने की भी खबर है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग ने अलर्ट जारी कर दिया है। आधा दर्जन से अधिक गांवों में मुनादी कर लोगों को सतर्क रहने और अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलने की सलाह दी जा रही है।
वन अमला लगातार क्षेत्र में निगरानी बनाए हुए है और लोगों से अपील की जा रही है कि हाथियों के मार्ग में आने से बचें तथा किसी भी प्रकार की हलचल की सूचना तुरंत विभाग को दें।
मानव-वन्यजीव संघर्ष पर उठ रहे सवाल
लगातार बढ़ रही इन घटनाओं ने एक बार फिर मानव-वन्यजीव संघर्ष के मुद्दे को केंद्र में ला दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों के सिमटने और भोजन की कमी के कारण वन्यजीव आबादी की ओर रुख कर रहे हैं। ऐसे में प्रशासन और वन विभाग के लिए यह एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है कि वह जनसुरक्षा के साथ-साथ वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन कैसे स्थापित करे।
फिलहाल रायगढ़ जिले में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं और ग्रामीण इलाकों में भय का वातावरण साफ तौर पर महसूस किया जा सकता है।
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