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अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण: भरोसे की दीवार में दरार, एसआईटी रिपोर्ट के बाद छापेमारी से तेज़ हुई जांच

Journalist Amardeep chauhan
http://amarkhabar.com

अयोध्या। देश की आस्था के सबसे बड़े केंद्रों में से एक  इन दिनों गंभीर सवालों के घेरे में है। मंदिर के दानपात्रों से प्राप्त चढ़ावे में कथित गड़बड़ी का मामला अब प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई के निर्णायक चरण में प्रवेश कर चुका है। विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने सख्त रुख अपनाया है और पुलिस कार्रवाई लगातार तेज़ होती जा रही है।

एफआईआर, गिरफ्तारी और अब छापेमारी

26 जून को राम जन्मभूमि थाने में दर्ज एफआईआर के बाद आठ आरोपियों को हिरासत में लिया गया था। ये सभी मंदिर परिसर में लगे करीब 40 दानपात्रों से प्राप्त नकदी की गिनती और निगरानी से जुड़े थे। प्रारंभिक जांच में ही गबन और आपराधिक साजिश के संकेत मिलने के बाद पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी।

अब 28 जून को पुलिस ने मामले में बड़ा कदम उठाते हुए आरोपियों के घरों पर एक साथ छापेमारी की। अलग-अलग टीमों ने अयोध्या में स्थित उनके ठिकानों पर पहुंचकर तलाशी ली, परिजनों और पड़ोसियों से पूछताछ की और संभावित सबूत जुटाए। जांच एजेंसियां अब सिर्फ चोरी की घटना तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आरोपियों की संपत्तियों, बैंक खातों और लेन-देन की पूरी श्रृंखला को खंगाल रही हैं।

बरामदगी और शक की गहराई

अब तक करीब 79 से 80 लाख रुपये की बरामदगी हो चुकी है। हालांकि जांच अधिकारियों का मानना है कि यह रकम कुल गड़बड़ी का सिर्फ एक हिस्सा हो सकती है। आरोप है कि चोरी की रकम से आरोपियों ने अयोध्या और आसपास के इलाकों में संपत्तियां भी खरीदीं।

जांच एजेंसियां इस बात का भी पता लगाने में जुटी हैं कि क्या यह संगठित नेटवर्क था या केवल सीमित स्तर की मिलीभगत।

कौन हैं आरोपी और क्या थी उनकी भूमिका

जांच में सामने आया है कि आरोपी अलग-अलग भूमिकाओं में तैनात थे—कुछ दानपात्रों की निगरानी करते थे, कुछ उन्हें बेसमेंट या काउंटिंग रूम तक पहुंचाते थे, जबकि अन्य नकदी गिनने का काम संभालते थे। मुख्य आरोपी रामाशंकर यादव उर्फ टिन्नू पर निगरानी की जिम्मेदारी थी, जबकि अन्य कर्मचारी काउंटिंग प्रक्रिया में शामिल थे।

कई आरोपियों के घरों से लाखों रुपये नकद मिलने के अलावा यह भी आरोप है कि कुछ लोग चोरी की रकम को छिपाने के लिए असामान्य तरीके अपनाते थे, जैसे काउंटिंग रूम से पैसे निकालकर अलग स्थानों पर छिपाना।

अयोध्या के अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा गड़बड़ी मामले में कुल 8 आरोपियों के नाम सामने आए हैं। ये सभी दानपात्र (डोनेशन बॉक्स) से आए पैसे की निगरानी, ढुलाई और गिनती से जुड़े काम में लगे थे। नीचे साफ-साफ उनकी जिम्मेदारी (Role) दी गई है:

सभी आरोपी और उनकी जिम्मेदारी

1. रामाशंकर (टिन्नू)
जिम्मेदारी: दानपात्रों की निगरानी करना और उन्हें बेसमेंट/काउंटिंग एरिया तक पहुँचाना

2. लवकुश मिश्रा
जिम्मेदारी: चढ़ावे (नकदी) की गिनती करना

3. अनुकल्प मिश्रा
जिम्मेदारी: काउंटिंग रूम में नकदी गिनना

4. सुभाष चंद्र श्रीवास्तव
जिम्मेदारी: कैश काउंटिंग स्टाफ के प्रभारी (सुपरविजन)

5. करुणेश पांडे
जिम्मेदारी: दान राशि को काउंटिंग रूम तक लाना और गिनना

6. मनीष यादव
जिम्मेदारी: दानपात्रों से मिली नकदी की गिनती करना

7. अविनाश शुक्ला
जिम्मेदारी: दान राशि को काउंटिंग रूम तक लाना और गिनना

8. रामाशंकर मिश्रा
जिम्मेदारी: दानपात्रों को काउंटिंग रूम तक पहुँचाना और निगरानी करना


समझने वाली बात

इन सभी की भूमिका एक ही सिस्टम के अलग-अलग हिस्सों में थी—

कोई निगरानी (monitoring) में था

कोई ढुलाई (transport) में

और बाकी गिनती (counting) में


इसी वजह से जांच एजेंसियां मान रही हैं कि मामला आपसी मिलीभगत (conspiracy) से जुड़ा हो सकता है।

एसआईटी की भूमिका और आगे की कार्रवाई

13 जून को सामने आए वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के बाद तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया गया था। इस टीम को न सिर्फ प्रक्रियागत खामियों की जांच बल्कि संभावित बड़ी साजिश के पहलुओं की भी पड़ताल करने का जिम्मा दिया गया था।

एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट मिलते ही सरकार ने कार्रवाई शुरू कर दी। अब पुलिस अदालत से आरोपियों की कस्टडी रिमांड लेने की तैयारी में है, ताकि उनसे गहन पूछताछ कर पूरी साजिश का खुलासा किया जा सके।

आस्था बनाम जवाबदेही

राम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की भावनाओं का केंद्र है। ऐसे में चढ़ावे में कथित गड़बड़ी का मामला सिर्फ आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि विश्वास के संकट के रूप में देखा जा रहा है।

अब निगाहें जांच एजेंसियों और अदालत की प्रक्रिया पर टिकी हैं—क्या यह मामला केवल कुछ कर्मचारियों तक सीमित रहेगा या इसके पीछे कोई बड़ा तंत्र उजागर होगा।

स्पष्ट है, इस प्रकरण ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आस्था के केंद्रों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए क्या अतिरिक्त व्यवस्था की आवश्यकता है!!

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Amar Chouhan

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