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करोड़ों का घरघोड़ा जंक्शन ‘मूक गवाह’: ढांचा तैयार, व्यवस्था लापता—रेल सेवा पर उठे तीखे सवाल

Journalist Amardeep chauhan
http://amarkhabar.com

घरघोड़ा/रायगढ़। विकास के दावों और “डबल इंजन” की तेज रफ्तार वाली घोषणाओं के बीच घरघोड़ा जंक्शन एक असहज सच्चाई की तरह खड़ा है—जहां करोड़ों रुपये की लागत से आधुनिक स्टेशन भवन, विस्तृत प्लेटफॉर्म और स्काई ओवर ब्रिज तो तैयार कर दिए गए, लेकिन यात्रियों के लिए अब तक नियमित पैसेंजर ट्रेन सेवा शुरू नहीं हो सकी है। सवाल अब केवल सुविधा का नहीं, बल्कि योजना और प्राथमिकता की पारदर्शिता का भी बनता जा रहा है।

स्थानीय लोगों का सीधा सवाल है—क्या यह स्टेशन यात्रियों की जरूरत के लिए बना या फिर केवल कागजी उपलब्धियों का हिस्सा भर है?

घरघोड़ा क्षेत्र औद्योगिक गतिविधियों का एक प्रमुख केंद्र है। आसपास NTPC, SECL, TRN, जिंदल और अदाणी समूह जैसे बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठान संचालित हैं। इन इकाइयों से जुड़े हजारों कर्मचारी, ठेका मजदूर, छोटे व्यापारी और छात्र रोजाना रायगढ़, बिलासपुर और रायपुर जैसे शहरों तक आवागमन की आवश्यकता महसूस करते हैं। इसके बावजूद रेल सेवा का अभाव क्षेत्रीय विकास के दावों पर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर रहा है।

विद्यार्थियों के लिए स्थिति सबसे अधिक चुनौतीपूर्ण है। उच्च शिक्षा के लिए बाहर जाने वाले छात्रों को महंगे निजी साधनों या अनियमित बस सेवाओं पर निर्भर रहना पड़ता है। वहीं व्यापारियों और आम नागरिकों के लिए समय और लागत दोनों का दबाव बढ़ता जा रहा है। ऐसे में रेलवे जैसी सुलभ और सुरक्षित व्यवस्था का न होना एक बड़ी प्रशासनिक कमी के रूप में देखा जा रहा है।

विडंबना यह है कि स्टेशन का हर ढांचा तैयार है—प्लेटफॉर्म भी, भवन भी और यात्रियों की आवाजाही के लिए स्काई ओवर ब्रिज भी। लेकिन जिस मूल उद्देश्य के लिए यह सब बनाया गया, वही सेवा अब तक शुरू नहीं हो सकी। यह स्थिति न केवल योजना के क्रियान्वयन पर सवाल उठाती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि जमीनी जरूरतों और फैसलों के बीच कहीं न कहीं गंभीर अंतर बना हुआ है।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से अब तक इस मुद्दे पर कोई ठोस और समयबद्ध पहल सामने नहीं आई है। न तो रेल संचालन की स्पष्ट समयसीमा घोषित की गई है और न ही यह बताया गया है कि आखिर देरी की वजह क्या है।

अब सवाल यह है कि जब क्षेत्र देश की ऊर्जा और औद्योगिक अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है, तो यहां के नागरिकों को बुनियादी रेल सुविधा से कब तक वंचित रखा जाएगा?

घरघोड़ा जंक्शन आज एक प्रतीक बन चुका है—ऐसे विकास मॉडल का, जहां ढांचा पहले खड़ा हो जाता है, लेकिन उसके पीछे की व्यवस्था अधूरी रह जाती है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि क्या संबंधित विभाग और सरकार इस मुद्दे पर ठोस कदम उठाते हैं, या फिर यह स्टेशन केवल सरकारी रिपोर्टों और तस्वीरों तक सीमित रह जाएगा।

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Amar Chouhan

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