सिविल अस्पताल में ऑपरेशन के बाद युवक की मौत, परिजनों का हंगामा—लापरवाही के आरोपों के बीच चक्काजाम, 1 करोड़ मुआवजे की मांग

Journalist Amardeep chauhan
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रायगढ़। जिले के खरसिया क्षेत्र से एक संवेदनशील मामला सामने आया है, जहां एक साधारण माने जाने वाले ऑपरेशन के बाद युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों ने इलाज में गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर विरोध प्रदर्शन किया और सड़क पर चक्काजाम कर दिया। परिजनों ने मामले की निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और 1 करोड़ रुपए के मुआवजे की मांग की है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, खरसिया की पुरानी बस्ती निवासी राघवेन्द्र मिश्रा अपने 27 वर्षीय पुत्र तामेश्वर मिश्रा को बवासीर (पाइल्स) के ऑपरेशन के लिए गुरुवार सुबह स्थानीय सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे थे। प्रारंभिक प्रक्रिया के बाद डॉक्टरों ने ऑपरेशन किया, लेकिन दोपहर तक युवक की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। अस्पताल प्रबंधन ने परिजनों को बताया कि मरीज बेहोश है और उसे तत्काल रायगढ़ रेफर करना पड़ेगा।
परिजनों का आरोप है कि उन्हें स्थिति की गंभीरता के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। जब एंबुलेंस से युवक को रायगढ़ ले जाया जा रहा था, तभी रास्ते में परिजनों को पता चला कि उसकी मौत हो चुकी है। इस जानकारी के बाद आक्रोशित परिजन एंबुलेंस को वापस खरसिया अस्पताल लेकर लौटे और वहीं विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
देखते ही देखते स्थिति तनावपूर्ण हो गई और गुस्साए परिजनों व स्थानीय लोगों ने मुख्य मार्ग पर चक्काजाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की। उनका कहना था कि यदि समय पर सही उपचार और निगरानी होती, तो युवक की जान बचाई जा सकती थी।
मामले की सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने समझाइश देकर प्रदर्शन समाप्त कराया और परिजनों को उचित जांच का आश्वासन दिया। पुलिस ने इस मामले में मर्ग कायम कर लिया है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की बात कही है।
इस संबंध में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए हर पहलू से जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।
यह घटना एक बार फिर सरकारी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर सवाल खड़े करती है। अब सबकी निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो तय करेगी कि यह महज एक चिकित्सकीय जटिलता थी या फिर लापरवाही का मामला।
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