महाजेंको कोल ब्लॉक: 7 गांवों का प्रस्तावित विस्थापन, प्रभावित परिवारों को चाहिए स्पष्ट पुनर्वास नीति

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com
रायगढ़।
तमनार क्षेत्र में प्रस्तावित गारे पेलमा सेक्टर-2 कोल ब्लॉक परियोजना के चलते बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवार प्रभावित होने जा रहे हैं। उपलब्ध सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, इस परियोजना से लगभग 14 गांव प्रभावित होंगे, जिनमें से 7 गांव—ढोलनारा, गारे, पाता, रोडोपाली, सराईटोला, कुंजेमुरा और मुड़ागांव—पूरी तरह विस्थापन की श्रेणी में आते हैं।
परियोजना से जुड़े आंकड़ों के मुताबिक करीब 2,500 हेक्टेयर से अधिक भूमि अधिग्रहण के दायरे में है। अनुमान है कि लगभग 2,200 से अधिक घर प्रभावित होंगे, जिनमें बड़ी संख्या ऐसे परिवारों की है जिनकी आजीविका खेती पर निर्भर है।
प्रभावित परिवारों की स्थिति
सर्वे के अनुसार, करीब 1,086 मकान पूर्ण रूप से विस्थापित होंगे। वहीं, 1,100 से अधिक परिवार ऐसे बताए गए हैं जिनकी जमीन और घर दोनों परियोजना क्षेत्र में आ रहे हैं। इसके अलावा सैकड़ों परिवार ऐसे भी हैं जिनके मकान सुरक्षित रह सकते हैं, लेकिन उनकी कृषि भूमि पूरी तरह प्रभावित होगी।
ग्रामीणों का कहना है कि उनके सामने सबसे बड़ी चिंता आजीविका और पुनर्वास की स्पष्ट योजना को लेकर है। कई परिवारों ने प्रशासन से यह अपेक्षा जताई है कि उन्हें पहले से ही बसाहट, जमीन और रोजगार के विकल्पों की जानकारी दी जाए, ताकि वे व्यवस्थित तरीके से स्थानांतरण की तैयारी कर सकें।
पुनर्वास योजना पर स्पष्टता की मांग
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि परियोजना के विभिन्न चरणों में सर्वे, मुआवजा निर्धारण और अन्य प्रक्रियाएं जारी हैं, लेकिन पुनर्वास नीति की विस्तृत जानकारी अभी तक सार्वजनिक रूप से साझा नहीं की गई है। प्रभावित ग्रामीणों ने प्रशासन और संबंधित कंपनी से पारदर्शी और चरणबद्ध पुनर्वास योजना प्रस्तुत करने की मांग की है।
ग्रामीणों का सुझाव है कि जिन क्षेत्रों में पहले से खनन परियोजनाएं संचालित हैं, वहां अपनाए गए पुनर्वास मॉडल को आधार बनाकर यहां भी एक सुव्यवस्थित योजना लागू की जाए। विशेष रूप से यह अपेक्षा की जा रही है कि नए बसाहट स्थल, बुनियादी सुविधाएं और आजीविका के विकल्प पहले सुनिश्चित किए जाएं।
संतुलित विकास की आवश्यकता
क्षेत्र में औद्योगिक विकास और ऊर्जा उत्पादन की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए परियोजना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वहीं, विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे बड़े प्रोजेक्ट्स में प्रभावित समुदायों के पुनर्वास और आजीविका सुरक्षा को समान प्राथमिकता देना आवश्यक है।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि संबंधित विभाग और कंपनी मिलकर किस प्रकार एक समग्र और व्यावहारिक पुनर्वास नीति प्रस्तुत करते हैं, जिससे विकास और सामाजिक संतुलन दोनों सुनिश्चित हो सकें।
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