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कस्टडी डेथ पर सियासत और सवाल: संजय बघेल मामले में पुलिस बनाम कांग्रेस आमने-सामने, सच अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट के हवाले

Journalist Amardeep chauhan
http://amarkhabar.com

रायगढ़, 17 जून 2026।
कोतरारोड़ थाना क्षेत्र से जेल भेजे गए बंदी संजय बघेल की संदिग्ध मौत ने अब प्रशासनिक दावों और राजनीतिक आरोपों के बीच गंभीर टकराव का रूप ले लिया है। जहां एक ओर पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज जारी कर कस्टडी में किसी प्रकार की मारपीट से इनकार किया है, वहीं दूसरी ओर प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा गठित जांच दल ने मौके पर पहुंचकर घटनाक्रम पर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत कांग्रेस का जांच दल रायगढ़ पहुंचा और सबसे पहले मृतक के गृह ग्राम नवापारा जाकर परिजनों से मुलाकात की। परिजनों ने घटना को लेकर गहरी आशंका जताई और न्याय की मांग दोहराई। टीम ने संवेदनाएं व्यक्त करते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया।

इसके बाद जांच दल ने जिला जेल का रुख किया, जहां कथित तौर पर संजय बघेल को रखा गया था। हालांकि, जेल प्रशासन से पूछताछ के प्रयासों के दौरान टीम को सीमित जानकारी ही मिल सकी। मीडिया से बातचीत में जांच समिति की अध्यक्ष और सरायपाली विधायक चातुरी नंद ने आरोप लगाया कि मृतक के शरीर पर कमर, पीठ और कोहनी के आसपास गंभीर चोटों के निशान थे, जो किसी बेल्ट या पट्टे से मारपीट की ओर संकेत करते हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि मृतक के मुंह से खून आने के संकेत मिले थे, जो परिस्थितियों को और संदिग्ध बनाते हैं।

जांच दल ने एक और महत्वपूर्ण आरोप लगाते हुए कहा कि घटना के बाद साक्ष्यों को प्रभावित करने की कोशिश की गई। उनके अनुसार, मृतक के साथ मौजूद एक अन्य बंदी का वार्ड रातों-रात बदल दिया गया। साथ ही, जब टीम ने संबंधित समय का सीसीटीवी फुटेज देखने की मांग की, तो जेल प्रशासन ने नियमों का हवाला देते हुए उसे उपलब्ध कराने से इनकार कर दिया।

जेल निरीक्षण के बाद कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने रायगढ़ पुलिस अधीक्षक से मुलाकात कर अपनी मांगें रखीं। इनमें पीड़ित परिवार को एक करोड़ रुपये का मुआवजा, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी, मृतक की दोनों बच्चियों की शिक्षा और इलाज की पूरी जिम्मेदारी, तथा दोषी अधिकारियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करने की मांग शामिल है।

इस पूरे घटनाक्रम में स्थानीय विधायक उमेश पटेल की मौजूदगी ने मामले को और अधिक राजनीतिक महत्व दे दिया है। कांग्रेस जहां इसे कस्टोडियल हिंसा का मामला बता रही है, वहीं पुलिस अपने बचाव में तकनीकी साक्ष्यों का हवाला दे रही है।

फिलहाल, इस मामले की मजिस्ट्रियल जांच जारी है और सभी की निगाहें अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो मौत के वास्तविक कारणों को स्पष्ट कर सकती है। यह मामला केवल एक व्यक्ति की मौत का नहीं, बल्कि कस्टडी में सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़े व्यापक सवाल भी खड़े कर रहा है।

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Amar Chouhan

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