विकास बनाम जमीन का सवाल: तमनार बायपास फोरलेन पर किसानों का उबाल, “रोजी-रोटी छिनेगी तो सड़क नहीं चाहिए”

Journalist Amardeep chauhan
http://amarkhabar.com
तमनार (रायगढ़), 17 जून 2026।
रायगढ़ जिले के तमनार ब्लॉक में प्रस्तावित बायपास फोरलेन सड़क परियोजना अब विकास और आजीविका के बीच टकराव का प्रतीक बनती जा रही है। परियोजना के दायरे में आने वाले गांवों के किसानों और ग्रामीणों ने जमीन अधिग्रहण के खिलाफ खुलकर विरोध दर्ज कराया है और प्रशासन को स्पष्ट संदेश दिया है कि वे अपनी उपजाऊ कृषि भूमि किसी भी कीमत पर देने को तैयार नहीं हैं।
बड़ी संख्या में प्रभावित ग्रामीण तमनार तहसील कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने तहसीलदार को ज्ञापन सौंपते हुए अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं। किसानों का कहना है कि प्रस्तावित सड़क का रूट सीधे उनके खेतों से होकर गुजर रहा है, जिससे न केवल उनकी जमीन प्रभावित होगी, बल्कि उनकी पूरी आजीविका संकट में पड़ जाएगी।


ज्ञापन में ग्रामीणों ने उल्लेख किया है कि उनकी जमीन सिर्फ संपत्ति नहीं, बल्कि पीढ़ियों की मेहनत और विरासत का आधार है। इसी जमीन से उनके परिवारों का भरण-पोषण होता है, बच्चों की पढ़ाई चलती है और जीवन की बुनियादी जरूरतें पूरी होती हैं। ऐसे में भूमि अधिग्रहण उनके लिए सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक असुरक्षा का भी कारण बन सकता है।
किसानों ने प्रशासन के सामने यह आशंका भी जताई कि यदि उनकी जमीन चली गई, तो उनके पास आय का कोई वैकल्पिक साधन नहीं बचेगा। रोजगार के सीमित अवसरों वाले इस क्षेत्र में विस्थापन का मतलब सीधे-सीधे गरीबी और अस्थिरता की ओर धकेले जाना होगा।
हालांकि ग्रामीणों ने यह भी स्पष्ट किया कि वे विकास कार्यों के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास की प्रक्रिया में उनकी सहमति और हितों की अनदेखी स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने मांग की है कि सड़क निर्माण के लिए ऐसा वैकल्पिक मार्ग चुना जाए, जिससे उपजाऊ कृषि भूमि को नुकसान न पहुंचे और किसानों की आजीविका सुरक्षित रह सके।
इस मुद्दे ने अब पूरे क्षेत्र में बहस का रूप ले लिया है। कई ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया, तो वे लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। उनका कहना है कि वे अपनी जमीन बचाने के लिए कानूनी और संवैधानिक रास्तों का सहारा लेने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती विकास परियोजना को आगे बढ़ाने और स्थानीय किसानों के हितों के बीच संतुलन स्थापित करने की है। फिलहाल यह स्पष्ट है कि तमनार बायपास फोरलेन सड़क परियोजना केवल एक इंफ्रास्ट्रक्चर पहल नहीं रह गई है, बल्कि यह ग्रामीण असंतोष और नीति-निर्माण की संवेदनशीलता की भी परीक्षा बन चुकी है।
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