तमनार बायपास पर नया विवाद: 152 करोड़ की परियोजना घिरी, किसानों ने रूट बदलने की उठाई मांग

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com
रायगढ़, 4 अगस्त 2026। जिले के औद्योगिक हृदय कहे जाने वाले तमनार क्षेत्र में प्रस्तावित बायपास परियोजना अब विरोध के केंद्र में आ गई है। कोयला खदानों से निकलने वाले भारी वाहनों के लिए अलग कॉरिडोर बनाने की मंशा से तैयार इस बहुप्रतीक्षित योजना को जहां सरकार ने हरी झंडी दी है, वहीं प्रभावित किसान इसके मौजूदा रूट पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
तमनार और आसपास के इलाकों में वर्षों से कोयला परिवहन का दबाव झेल रही सड़कों की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। जेपीएल, जेएसपीएल, हिंडाल्को, सारडा एनर्जी, सीएसपीजीसीएल, महाजेंको, अंबुजा सीमेंट्स… और जैसी बड़ी कंपनियों की खदानों और संयंत्रों के बीच लगातार चलने वाले भारी वाहनों ने स्थानीय यातायात व्यवस्था को लगभग चरमरा दिया है।
सरकार की मंशा: सुरक्षित और सुगम यातायात
इसी पृष्ठभूमि में राज्य सरकार ने मार्च 2026 में तमनार बायपास परियोजना को मंजूरी दी थी। करीब 152.49 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस 8.5 किलोमीटर लंबे मार्ग में दो बड़े पुल, चार लघु पुल, पुल-पुलिया, रिटेनिंग वॉल और जल निकासी की समुचित व्यवस्था प्रस्तावित है। योजना का मूल उद्देश्य भारी वाहनों को आबादी क्षेत्र से बाहर डायवर्ट कर दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाना और सड़कों पर बढ़ते दबाव को कम करना है।
किसानों की आपत्ति: जमीन जाएगी तो रोजी भी जाएगी
हालांकि, परियोजना की जमीनी हकीकत सामने आते ही प्रभावित गांवों के किसानों ने विरोध दर्ज कराना शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि प्रस्तावित बायपास का वर्तमान रूट उनकी उपजाऊ कृषि भूमि से होकर गुजर रहा है। इससे न केवल खेती प्रभावित होगी, बल्कि आजीविका का प्रमुख साधन भी छिन जाएगा।
किसानों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए स्पष्ट किया है कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन अपनी जमीन की कीमत पर विकास स्वीकार्य नहीं होगा। उन्होंने मांग की है कि—
– बायपास का रूट बदला जाए
– कृषि भूमि अधिग्रहण पर रोक लगाई जाए
– वैकल्पिक मार्ग तलाशा जाए
इससे पहले 17 जून को भी तमनार तहसीलदार को इसी आशय का आवेदन सौंपा जा चुका है।
‘कंपनियां खुद बनाएं रास्ता’—ग्रामीणों की दलील
ग्रामीणों का एक वर्ग यह भी तर्क दे रहा है कि औद्योगिक कंपनियां अपने परिवहन के लिए स्वयं वैकल्पिक मार्ग विकसित करें। उनका कहना है कि के पास पहले से ही आधा किलोमीटर सड़क मौजूद है, जिसे आगे बढ़ाकर उपयोग में लाया जा सकता है।
विकास बनाम जमीन का सवाल
तमनार बायपास परियोजना अब एक बार फिर उस पारंपरिक बहस के केंद्र में आ गई है, जहां विकास और विस्थापन आमने-सामने खड़े नजर आते हैं। प्रशासन के सामने चुनौती है कि वह एक ओर औद्योगिक गतिविधियों को सुगम बनाए, वहीं दूसरी ओर किसानों के हितों और आजीविका की रक्षा भी सुनिश्चित करे।
फिलहाल निगाहें प्रशासनिक स्तर पर होने वाले अगले फैसले पर टिकी हैं, जो तय करेगा कि तमनार का यह बायपास विकास की राह बनेगा या फिर विरोध की नई कहानी लिखेगा।
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