रेल की पटरी पर उम्मीदें: धरमजयगढ़–लोहरदगा नई लाइन को ‘विशेष परियोजना’ का दर्जा

Journalist Amardeep chauhan
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291 किमी लंबी रेल लाइन से छत्तीसगढ़–झारखंड के बीच कनेक्टिविटी मजबूत होने की उम्मीद, जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया में आएगी तेजी
धरमजयगढ़।
लंबे समय से प्रतीक्षित धरमजयगढ़–पथलगांव–लोहरदगा नई रेल लाइन परियोजना को आखिरकार केंद्र सरकार ने विशेष रेल परियोजना का दर्जा दे दिया है। 4 जून 2026 को भारत सरकार के राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना के साथ ही यह परियोजना औपचारिक रूप से राष्ट्रीय अवसंरचना विकास की प्राथमिक सूची में शामिल हो गई है।
रेल मंत्रालय द्वारा रेल अधिनियम, 1989 के तहत प्राप्त अधिकारों का उपयोग करते हुए इस परियोजना को ‘सार्वजनिक उद्देश्य’ की श्रेणी में रखा गया है। अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के अंतर्गत प्रस्तावित इस नई रेल लाइन की कुल लंबाई लगभग 291.881 किलोमीटर होगी, जो छत्तीसगढ़ के धरमजयगढ़ क्षेत्र को झारखंड के लोहरदगा से जोड़ेगी।
इस परियोजना को केवल एक रेल लाइन के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे क्षेत्रीय विकास के इंजन के तौर पर भी समझा जा रहा है। आदिवासी बहुल और अब तक अपेक्षाकृत परिवहन सुविधाओं से वंचित इलाकों में यह कनेक्टिविटी आर्थिक गतिविधियों को नई दिशा दे सकती है। स्थानीय व्यापार, लघु उद्योग और खनिज आधारित गतिविधियों को इससे गति मिलने की संभावना है, वहीं यात्रियों के लिए भी आवागमन अधिक सहज होगा।
सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि ‘विशेष रेल परियोजना’ घोषित होने के बाद अब भूमि अधिग्रहण और प्रशासनिक स्वीकृतियों की प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है। अक्सर इसी चरण में परियोजनाएं वर्षों तक अटकी रहती हैं, लेकिन इस दर्जे से संबंधित विभागों को कार्यवाही में प्राथमिकता देनी होगी।
गौरतलब है कि इस रेल लाइन की मांग पिछले कई वर्षों से जनप्रतिनिधियों, व्यापारिक संगठनों और आम नागरिकों द्वारा लगातार उठाई जाती रही है। क्षेत्र के विकास में रेलवे कनेक्टिविटी की कमी को एक बड़ी बाधा माना जाता रहा है।
स्थानीय लोगों ने केंद्र सरकार और रेल मंत्रालय के इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि अब यदि तय समयसीमा में कार्य प्रारंभ होता है, तो धरमजयगढ़ सहित आसपास के क्षेत्रों की तस्वीर बदल सकती है।
हालांकि, परियोजना की वास्तविक गति अब आने वाले महीनों में होने वाली जमीनी कार्यवाही पर निर्भर करेगी। फिलहाल, कागजों से निकलकर पटरी तक पहुंचने की इस यात्रा ने उम्मीदों को जरूर नया आधार दे दिया है।
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