रायगढ़ में साले की चाकू मार कर हत्या! अदालत ने सुनाया कड़ा फैसला..

Journalist Amardeep chauhan
http://amarkhabar.com
रायगढ़, 7 जून।
परिवार की दहलीज़ पर शुरू हुआ एक विवाद किस तरह खूनी अंजाम तक पहुंच सकता है, इसका दर्दनाक उदाहरण छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले से सामने आया है। ससुराल पक्ष के साथ लंबे समय से चल रहे तनाव ने आखिरकार एक निर्दोष की जान ले ली। अब इस सनसनीखेज हत्याकांड में न्यायालय ने सख्त रुख अपनाते हुए आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
अपर सत्र न्यायालय के न्यायाधीश अभिषेक शर्मा ने मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद आरोपी दाताराम सारथी को हत्या का दोषी करार दिया। अदालत ने उसे उम्रकैद के साथ एक हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। साथ ही, मृतक के परिजनों को न्याय दिलाने की दिशा में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से एक लाख रुपये की क्षतिपूर्ति देने की अनुशंसा भी की गई है।
घरेलू कलह बनी हत्या की वजह
अभियोजन पक्ष के अनुसार, दाताराम सारथी का अपनी पत्नी उर्मिला सारथी के साथ वैवाहिक संबंध लंबे समय से तनावपूर्ण थे। इसी कारण उर्मिला अपने मायके पत्थलगांव खुर्द में रह रही थी। घटना के समय वह एक बच्चे की मां बन चुकी थी और ससुराल लौटने को लेकर अनिश्चित स्थिति में थी।
एक मई 2022 की शाम, दाताराम अचानक ससुराल पहुंचा और अपने एक वर्षीय बच्चे को जबरन साथ ले जाने लगा। इस पर उर्मिला और उसके परिवार के अन्य सदस्यों ने विरोध किया, लेकिन आरोपी बच्चे को लेकर मुख्य सड़क तक पहुंच गया।
सामान्य बहस से खूनी हमला
इसी दौरान उर्मिला के भाई महेश सारथी ने बीच-बचाव करते हुए आरोपी को बच्चे को ले जाने से रोका। यह बात दाताराम को नागवार गुजरी और गुस्से में उसने चाकू निकालकर महेश पर ताबड़तोड़ वार कर दिए। पेट, पीठ और गर्दन पर हुए गंभीर हमलों के चलते महेश की मौके पर ही मौत हो गई।
यह पूरी घटना न केवल एक परिवार के लिए बल्कि पूरे इलाके के लिए स्तब्ध कर देने वाली थी।
त्वरित कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया
मृतक की पत्नी कुसुम सारथी की शिकायत पर पुलिस ने तत्काल मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया। विवेचना के बाद मामला न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां सुनवाई के दौरान सभी साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोपी को दोषी पाया गया।
न्यायालय का संदेश
अदालत का यह फैसला न केवल पीड़ित परिवार के लिए न्याय का प्रतीक है, बल्कि समाज के लिए भी एक सख्त संदेश है कि घरेलू विवादों को हिंसा में बदलने की कोई गुंजाइश नहीं है। रिश्तों में आई दरार यदि समय रहते नहीं संभाली जाए, तो उसके परिणाम कितने भयावह हो सकते हैं, यह मामला उसी की चेतावनी देता है।
रायगढ़ की यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि पारिवारिक विवादों के समाधान के लिए संवाद और संयम ही एकमात्र रास्ता है। अन्यथा, क्षणिक आवेश में लिया गया निर्णय जीवनभर का पछतावा और कानूनी सजा बन सकता है।
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