“ऑपरेशन तलाश” की कामयाबी: 251 बिछड़े लोग मिले, 36 नाबालिग सुरक्षित लौटे — रायगढ़ पुलिस की संवेदनशील और सख्त कार्रवाई ने लौटाई उम्मीद

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
रायगढ़, 03 मई।
राज्य स्तर पर चलाए जा रहे विशेष अभियान “ऑपरेशन तलाश” के तहत रायगढ़ पुलिस ने अप्रैल माह में उल्लेखनीय सफलता दर्ज की है। पूरे जिले में समन्वित प्रयासों के जरिए कुल 251 गुमशुदा व्यक्तियों को खोजकर उनके परिजनों से मिलाया गया, जिनमें 36 नाबालिग और 215 वयस्क शामिल हैं। इन प्रयासों ने न केवल बिछड़े परिवारों को फिर से जोड़ा, बल्कि पुलिस की संवेदनशील कार्यप्रणाली को भी रेखांकित किया है।
अभियान की खास बात यह रही कि नाबालिगों से जुड़े मामलों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई। पुलिस टीमों ने जिले की सीमाओं से बाहर जाकर भी लगातार पतासाजी की। दिल्ली, पंजाब के जालंधर, अंबिकापुर, डभरा और चंद्रपुर जैसे अलग-अलग स्थानों तक पहुंचकर बच्चों को सकुशल वापस लाया गया। जिन मामलों में बहला-फुसलाकर ले जाने या शारीरिक शोषण की पुष्टि हुई, वहां आरोपियों के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत कठोर कार्रवाई की गई।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के निर्देशन में यह अभियान संचालित हुआ, जिसमें अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, डीएसपी स्तर के अधिकारियों और सभी थाना प्रभारियों की सक्रिय भागीदारी रही। मॉनिटरिंग की सुदृढ़ व्यवस्था और त्वरित निर्णय क्षमता के कारण कई मामलों में पुलिस ने कम समय में सफलता हासिल की।
जिले के विभिन्न थानों का प्रदर्शन भी इस अभियान में उल्लेखनीय रहा। लैलूंगा थाना ने सर्वाधिक 42 गुमशुदा व्यक्तियों को खोज निकाला, जबकि चक्रधरनगर, जूटमिल, पूंजीपथरा, कोतवाली और पुसौर जैसे थानों ने भी प्रभावी कार्यवाही की। भूपदेवपुर थाना ने दर्ज नाबालिग मामलों में शत-प्रतिशत सफलता हासिल कर विशेष उपलब्धि दर्ज की।

कुछ प्रमुख मामलों पर नजर डालें तो—
जूटमिल पुलिस ने एक नाबालिग बालिका को चंद्रपुर से बरामद कर आरोपी को गिरफ्तार किया, जिस पर शारीरिक शोषण का आरोप है। एक अन्य मामले में जालंधर (पंजाब) से नाबालिग को सुरक्षित वापस लाया गया, जहां आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई की गई। पूंजीपथरा थाना क्षेत्र में अंबिकापुर से 15 वर्षीय बालिका को खोजा गया, जबकि कोतवाली पुलिस ने मात्र 24 घंटे में डभरा से 13 वर्षीय बालिका को बरामद कर आरोपी को जेल भेजा।
इन घटनाओं से यह स्पष्ट है कि पुलिस ने न केवल गुमशुदगी के मामलों को गंभीरता से लिया, बल्कि संवेदनशीलता और सख्ती के संतुलन के साथ कार्रवाई भी की।

एसएसपी शशि मोहन सिंह ने स्पष्ट संदेश दिया है कि नाबालिगों और महिलाओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अभिभावकों से भी अपील की है कि वे बच्चों की गतिविधियों और उनके सामाजिक संपर्कों पर सतत निगरानी रखें।
“ऑपरेशन तलाश” की यह सफलता सिर्फ आंकड़ों की उपलब्धि नहीं, बल्कि उन परिवारों की राहत और विश्वास की वापसी है, जिनके अपने उनसे बिछड़ गए थे।यगढ़, 03 मई।
राज्य स्तर पर चलाए जा रहे विशेष अभियान “ऑपरेशन तलाश” के तहत रायगढ़ पुलिस ने अप्रैल माह में उल्लेखनीय सफलता दर्ज की है। पूरे जिले में समन्वित प्रयासों के जरिए कुल 251 गुमशुदा व्यक्तियों को खोजकर उनके परिजनों से मिलाया गया, जिनमें 36 नाबालिग और 215 वयस्क शामिल हैं। इन प्रयासों ने न केवल बिछड़े परिवारों को फिर से जोड़ा, बल्कि पुलिस की संवेदनशील कार्यप्रणाली को भी रेखांकित किया है।

अभियान की खास बात यह रही कि नाबालिगों से जुड़े मामलों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई। पुलिस टीमों ने जिले की सीमाओं से बाहर जाकर भी लगातार पतासाजी की। दिल्ली, पंजाब के जालंधर, अंबिकापुर, डभरा और चंद्रपुर जैसे अलग-अलग स्थानों तक पहुंचकर बच्चों को सकुशल वापस लाया गया। जिन मामलों में बहला-फुसलाकर ले जाने या शारीरिक शोषण की पुष्टि हुई, वहां आरोपियों के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत कठोर कार्रवाई की गई।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के निर्देशन में यह अभियान संचालित हुआ, जिसमें अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, डीएसपी स्तर के अधिकारियों और सभी थाना प्रभारियों की सक्रिय भागीदारी रही। मॉनिटरिंग की सुदृढ़ व्यवस्था और त्वरित निर्णय क्षमता के कारण कई मामलों में पुलिस ने कम समय में सफलता हासिल की।

जिले के विभिन्न थानों का प्रदर्शन भी इस अभियान में उल्लेखनीय रहा। लैलूंगा थाना ने सर्वाधिक 42 गुमशुदा व्यक्तियों को खोज निकाला, जबकि चक्रधरनगर, जूटमिल, पूंजीपथरा, कोतवाली और पुसौर जैसे थानों ने भी प्रभावी कार्यवाही की। भूपदेवपुर थाना ने दर्ज नाबालिग मामलों में शत-प्रतिशत सफलता हासिल कर विशेष उपलब्धि दर्ज की।
कुछ प्रमुख मामलों पर नजर डालें तो—
जूटमिल पुलिस ने एक नाबालिग बालिका को चंद्रपुर से बरामद कर आरोपी को गिरफ्तार किया, जिस पर शारीरिक शोषण का आरोप है। एक अन्य मामले में जालंधर (पंजाब) से नाबालिग को सुरक्षित वापस लाया गया, जहां आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई की गई। पूंजीपथरा थाना क्षेत्र में अंबिकापुर से 15 वर्षीय बालिका को खोजा गया, जबकि कोतवाली पुलिस ने मात्र 24 घंटे में डभरा से 13 वर्षीय बालिका को बरामद कर आरोपी को जेल भेजा।

इन घटनाओं से यह स्पष्ट है कि पुलिस ने न केवल गुमशुदगी के मामलों को गंभीरता से लिया, बल्कि संवेदनशीलता और सख्ती के संतुलन के साथ कार्रवाई भी की।
एसएसपी शशि मोहन सिंह ने स्पष्ट संदेश दिया है कि नाबालिगों और महिलाओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अभिभावकों से भी अपील की है कि वे बच्चों की गतिविधियों और उनके सामाजिक संपर्कों पर सतत निगरानी रखें।
“ऑपरेशन तलाश” की यह सफलता सिर्फ आंकड़ों की उपलब्धि नहीं, बल्कि उन परिवारों की राहत और विश्वास की वापसी है, जिनके अपने उनसे बिछड़ गए थे।
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