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परिवहन महकमे में व्यापक फेरबदल: नई तैनातियों से व्यवस्था सुधार की उम्मीद, गौरव साहू को मिली रायगढ़ की जिम्मेदारी

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com

रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन के परिवहन विभाग द्वारा एक साथ 20 अधिकारियों के तबादले का आदेश जारी किया जाना महज नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि संकेत है कि विभाग अब कार्यशैली में ठोस सुधार की दिशा में कदम बढ़ाना चाहता है। जिला परिवहन अधिकारियों (DTO) से लेकर अतिरिक्त/क्षेत्रीय परिवहन अधिकारियों (ARTO) तक किए गए इस फेरबदल में उन जिलों पर विशेष ध्यान दिखाई देता है, जहां लंबे समय से राजस्व, प्रवर्तन और सेवा वितरण को लेकर सवाल उठते रहे हैं।

आदेश के अनुसार, विवेक सिन्हा को कोरबा/पेंड्रा से जांजगीर-चांपा भेजा गया है, जबकि गौरव साहू को जांजगीर-चांपा से रायगढ़ की जिम्मेदारी दी गई है। इसी तरह अतुल असैया को कोंडागांव से कोरबा, और अब्दुल मुजाहिद को धमतरी से नवा रायपुर स्थित परिवहन मुख्यालय स्थानांतरित किया गया है।
अन्य फेरबदल में प्रकाश रावटे (बालोद से कांकेर), योगेश भण्डारी (सूरजपुर से बालोद), किशनलाल माहौर (बीजापुर से बेमेतरा), शिवभगत रावटे (सुकमा से धमतरी) तथा अनिल भगत (कोरिया से राजनांदगांव) शामिल हैं।

आदेश में स्पष्ट किया गया है कि स्थानांतरण नीति 2025 की कंडिका 1.12 के तहत सभी अधिकारियों को 10 दिनों के भीतर नए पदस्थापना स्थल पर कार्यभार ग्रहण करना अनिवार्य होगा। देरी की स्थिति में अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है, जो अपने आप में विभागीय सख्ती का संकेत माना जा रहा है।

क्या संकेत देता है यह फेरबदल?

इस व्यापक बदलाव को विभागीय “रीसेट” के तौर पर देखा जा रहा है। परिवहन महकमा सीधे तौर पर राजस्व संग्रह, सड़क सुरक्षा और अवैध परिवहन नियंत्रण जैसे संवेदनशील विषयों से जुड़ा है। ऐसे में अधिकारियों की नई तैनाती से तीन स्तरों पर प्रभाव की उम्मीद की जा रही है:

राजस्व में सुधार: जिन जिलों में कर वसूली और फिटनेस/परमिट प्रक्रिया में सुस्ती या अनियमितता की शिकायतें थीं, वहां नए अधिकारियों से सख्ती और पारदर्शिता बढ़ने की संभावना है।

प्रवर्तन (Enforcement) पर जोर: अवैध परिवहन, ओवरलोडिंग और बिना दस्तावेज चलने वाले वाहनों पर कार्रवाई तेज हो सकती है।

सेवा व्यवस्था में बदलाव: ड्राइविंग लाइसेंस, रजिस्ट्रेशन और ऑनलाइन सेवाओं से जुड़ी शिकायतों में कमी लाने की अपेक्षा भी इस बदलाव से जुड़ी है।


मुख्यालय की भूमिका क्यों अहम?

धमतरी से अब्दुल मुजाहिद का नवा रायपुर मुख्यालय स्थानांतरण यह भी दर्शाता है कि विभाग जमीनी अनुभव वाले अधिकारियों को नीति-निर्माण और मॉनिटरिंग में शामिल करना चाहता है। इससे जिलों में लागू योजनाओं की वास्तविक समीक्षा और सुधार की संभावना बढ़ती है।

जमीनी असर कब दिखेगा?

हालांकि तबादलों के तुरंत बाद बड़े बदलाव की उम्मीद करना जल्दबाजी होगी, लेकिन यदि नए अधिकारी अपने-अपने जिलों में प्राथमिकताओं को स्पष्ट कर सख्ती और पारदर्शिता के साथ काम करते हैं, तो अगले कुछ महीनों में असर दिखाई दे सकता है। खासकर औद्योगिक जिलों—कोरबा, रायगढ़ और जांजगीर-चांपा—में इसका प्रभाव ज्यादा महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

फिलहाल, नजर इस बात पर रहेगी कि ये बदलाव महज “कागजी फेरबदल” तक सीमित रहते हैं या फिर परिवहन व्यवस्था में वास्तव में सुधार का आधार बनते हैं। विभाग की सख्त समयसीमा और चेतावनी से संकेत साफ है—इस बार प्रदर्शन ही असली कसौटी होगा।

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Amar Chouhan

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