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जमाबीरा में रिटेनिंग वॉल निर्माण पर उठे सवाल, क्या मानकों से हो रहा समझौता?

Journalist Amardeep chauhan
http://amarkhabar.com

धरमजयगढ़। जनपद पंचायत धरमजयगढ़ के अंतर्गत ग्राम पंचायत जमाबीरा में जिला खनिज न्यास (DMF) मद से निर्माणाधीन रिटेनिंग वॉल अब सवालों के घेरे में है। जिस निर्माण कार्य को ग्रामीण सुरक्षा और संरचनात्मक मजबूती के लिहाज से अहम माना जा रहा है, वहीं इसकी गुणवत्ता और पारदर्शिता को लेकर स्थानीय स्तर पर गंभीर शंकाएं उभरने लगी हैं।

सबसे पहला और स्पष्ट सवाल निर्माण स्थल पर अनिवार्य सूचना बोर्ड की अनुपस्थिति को लेकर उठ रहा है। आम तौर पर किसी भी शासकीय निर्माण कार्य में लागत, स्वीकृत राशि, कार्यदायी संस्था, तकनीकी स्वीकृति, निर्माण अवधि और जिम्मेदार अधिकारियों की जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाती है। लेकिन जमाबीरा के इस स्थल पर ऐसा कोई बोर्ड नजर नहीं आ रहा। इससे न केवल पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगता है, बल्कि यह भी संकेत मिलता है कि कहीं न कहीं नियमों की अनदेखी हो रही है।

ग्रामीणों के अनुसार, रिटेनिंग वॉल की नींव में बड़े आकार के बोल्डर पत्थरों का उपयोग किया जा रहा है। हालांकि, तकनीकी दृष्टि से किसी भी रिटेनिंग वॉल की मजबूती उसकी डिजाइन, सामग्री की गुणवत्ता और निर्माण पद्धति पर निर्भर करती है। विशेषज्ञ बताते हैं कि ऐसी संरचनाओं में निर्धारित ग्रेड का कंक्रीट, संतुलित सीमेंट-रेत अनुपात, उचित गिट्टी और वैज्ञानिक तरीके से तैयार नींव अत्यंत आवश्यक होती है। यदि इन मानकों से समझौता किया जाता है, तो भविष्य में यह दीवार न केवल कमजोर साबित हो सकती है, बल्कि आसपास के क्षेत्र के लिए खतरा भी बन सकती है।

निर्माण कार्यों में आमतौर पर जो कमियां सामने आती हैं—जैसे कि कमजोर नींव, निम्न गुणवत्ता की सामग्री, तकनीकी निगरानी का अभाव और जल निकासी व्यवस्था की अनदेखी—उनकी आशंका यहां भी जताई जा रही है। खासकर रिटेनिंग वॉल जैसे कार्यों में पानी की निकासी की समुचित व्यवस्था न होना दीवार की उम्र को काफी हद तक प्रभावित कर सकता है।

इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल जवाबदेही का है। जब कार्य सार्वजनिक धन से हो रहा है, तो यह जानना नागरिकों का अधिकार है कि निर्माण एजेंसी कौन है, कितनी राशि स्वीकृत हुई है, किस तकनीकी स्वीकृति के आधार पर काम किया जा रहा है और इसकी निगरानी किसके जिम्मे है। लेकिन सूचना के अभाव में ये सभी सवाल फिलहाल अनुत्तरित हैं।

ग्रामीणों ने इस मामले में संबंधित विभाग और जनपद पंचायत से निष्पक्ष तकनीकी जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं की गई, तो यह निर्माण भविष्य में बड़ी समस्या का कारण बन सकता है।

अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इन उठते सवालों पर क्या रुख अपनाते हैं—जांच कर स्थिति स्पष्ट करते हैं या फिर यह मामला भी अन्य अधूरे जवाबों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।

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Amar Chouhan

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