₹32 लाख के घोटाले में फरार आरोपी दबोचा, फर्जी वाउचरों से रची गई थी ठगी की पूरी साजिश

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com

रायगढ़, 31 जुलाई। शहर के चर्चित ₹32 लाख ट्रांसपोर्ट धोखाधड़ी मामले में रायगढ़ पुलिस को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। “ऑपरेशन क्लीन हंट” के तहत कोतवाली पुलिस ने चार महीने से फरार चल रहे मुख्य आरोपियों में शामिल दीपक शर्मा को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है। इस मामले में सामने आया ‘शर्मा फैक्टर’—जहां फर्जी बिल-वाउचर के जरिए व्यवस्थित तरीके से कंपनी को लाखों का चूना लगाया गया।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के निर्देशन में चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस लगातार फरार आरोपियों की तलाश में जुटी थी। इसी कड़ी में मुखबिर की सटीक सूचना पर दरोगापारा इलाके में दबिश देकर आरोपी को पकड़ा गया। गिरफ्तारी से बचने के लिए वह लगातार अपने ठिकाने बदल रहा था।
कैसे खुला ₹32 लाख के फर्जीवाड़े का खेल
मामले की शुरुआत 24 मार्च 2026 को हुई, जब ढिमरापुर चौक स्थित श्रीराम ट्रांसपोर्ट के संचालक कमल किशोर शाह ने कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में बताया गया कि कंपनी में कार्यरत कर्मचारी बिल-वाउचर बनाकर भुगतान के लिए प्रस्तुत करते थे, लेकिन जांच के दौरान एक ही क्रमांक के कई वाउचर सामने आए।
गहन जांच में यह स्पष्ट हुआ कि सितंबर 2025 से ही फर्जीवाड़े का खेल चल रहा था। एक ही वाउचर नंबर पर अलग-अलग वाहनों के नाम से डुप्लीकेट बिल तैयार कर भुगतान कराया गया। इस पूरी प्रक्रिया में कई लोगों के बैंक खातों का उपयोग कर करीब ₹32 लाख की राशि निकाल ली गई।
फर्जी वाहन नंबर, असली ठगी का नेटवर्क
पुलिस ने वाउचरों में दर्ज वाहन नंबरों का सत्यापन क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय से कराया। जांच में चौंकाने वाला तथ्य सामने आया—कई वाहन नंबर दोपहिया और निजी उपयोग के थे, जिनका किसी भी तरह के माल परिवहन से कोई लेना-देना नहीं था। संबंधित वाहन मालिकों ने भी पुलिस को स्पष्ट बताया कि उन्होंने कभी उक्त कंपनी के लिए कोई कार्य नहीं किया।
यह खुलासा इस बात की पुष्टि करता है कि आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से फर्जी दस्तावेज तैयार कर कंपनी को लगातार आर्थिक नुकसान पहुंचाया।
पूछताछ में खुली मिलीभगत की परतें
गिरफ्तार आरोपी दीपक शर्मा ने पूछताछ में स्वीकार किया कि वह कंपनी के ऑपरेटर प्रकाश मिश्रा के साथ मिलकर फर्जी बिल-वाउचर तैयार करता था। भुगतान के लिए अलग-अलग वाहन नंबरों का इस्तेमाल किया जाता और राशि विभिन्न खातों में ट्रांसफर करवाई जाती थी।
इन खातों के जरिए पैसा निकालकर कमीशन काटने के बाद शेष रकम आरोपी और उसके सहयोगियों के बताए खातों, क्यूआर कोड और फोन-पे नंबरों पर भेजी जाती थी। आरोपी के अनुसार इस घोटाले में लगभग ₹32 लाख की राशि में से उसे करीब ₹15 लाख मिले, जिनमें से कुछ रकम उसने पारिवारिक जरूरतों और बाकी व्यक्तिगत खर्चों में खर्च कर दी।
टीम की सतर्कता से मिली सफलता, अन्य आरोपी अब भी फरार
इस कार्रवाई में उप निरीक्षक ऐनु देवांगन, प्रशिक्षु उप निरीक्षक हर्ष चंद्राकर, एएसआई कोसो सिंह और पुलिस टीम के अन्य सदस्यों की अहम भूमिका रही। पुलिस अब इस मामले में शामिल अन्य आरोपियों की तलाश में जुटी है और जल्द ही और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है।
एसएसपी का स्पष्ट संदेश
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने कहा—
“व्यापारियों और आम नागरिकों के विश्वास से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। ‘ऑपरेशन क्लीन हंट’ के तहत फरार अपराधियों के खिलाफ हमारी कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।”
विश्वास की सुरक्षा पर पुलिस का फोकस
रायगढ़ पुलिस ने संकेत दिए हैं कि आर्थिक अपराधों के खिलाफ विशेष निगरानी रखी जा रही है। इस तरह के मामलों में केवल गिरफ्तारी ही नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क को उजागर कर जड़ से खत्म करना प्राथमिकता है, ताकि व्यापारिक संस्थानों में विश्वास का माहौल बना रहे।
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