जेल में बंदी की मौत पर सियासत और सवाल—पुलिस बोली ‘जांच का इंतजार करें’, परिजनों के आरोपों से गरमाया माहौल

Journalist Amardeep chauhan
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रायगढ़। जिला जेल में बंद नावापारा निवासी संजय बघेल की उपचार के दौरान हुई मौत ने पूरे जिले में गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर जहां परिजन और कुछ सामाजिक संगठन पुलिस पर मारपीट और अवैध वसूली जैसे आरोप लगा रहे हैं, वहीं पुलिस प्रशासन ने इन आरोपों को फिलहाल अपुष्ट बताते हुए न्यायिक जांच पूरी होने तक संयम बरतने की अपील की है।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने स्पष्ट कहा है कि बिना पूर्ण जांच के किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना न तो उचित है और न ही न्यायसंगत। उन्होंने दो टूक कहा कि “जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी के आधार पर कार्रवाई होगी—चाहे दोषी कोई भी हो।”
दो पुलिसकर्मी लाइन अटैच, जांच जारी
घटना के बाद बढ़ते विवाद के बीच कोतरा रोड थाने के दो पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच कर दिया गया है। इसे प्रारंभिक प्रशासनिक कदम माना जा रहा है, ताकि जांच प्रभावित न हो और निष्पक्षता बनी रहे।
शरीर पर निशान: मारपीट या प्राकृतिक प्रक्रिया?
मृतक के शरीर पर दिखाई दे रहे निशानों को लेकर सोशल मीडिया में तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। इस पर पुलिस अधीक्षक ने फॉरेंसिक विशेषज्ञों की प्रारंभिक राय का हवाला देते हुए कहा कि ये निशान “पोस्ट मॉर्टम लिविडिटी” भी हो सकते हैं—एक ऐसी स्थिति, जिसमें मृत्यु के बाद शरीर के निचले हिस्सों में रक्त जमाव के कारण त्वचा पर गहरे निशान उभर आते हैं।
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह अंतिम निष्कर्ष नहीं है और वास्तविक स्थिति पोस्टमार्टम रिपोर्ट व न्यायिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
परिजनों के आरोप: 40 हजार की मांग और मारपीट का दावा
मृतक के परिजनों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि संजय बघेल से 40 हजार रुपये की मांग की गई थी और उसके साथ मारपीट भी की गई। इन आरोपों ने मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।
इस पर एसएसपी ने कहा कि यदि किसी के पास इन आरोपों से जुड़े ठोस साक्ष्य हैं, तो वे सीधे पुलिस के समक्ष प्रस्तुत करें, ताकि जांच को सही दिशा मिल सके।
जेल प्रशासन का पक्ष: ‘दोनों बंदी शराब के आदी थे’
इधर जिला जेल अधीक्षक ने भी मामले पर सफाई दी है। उन्होंने बताया कि हाल के दिनों में जेल में दो बंदियों की मृत्यु हुई है और दोनों ही लंबे समय से शराब सेवन के आदी थे। उनके अनुसार, स्वास्थ्य संबंधी कारण भी मौत की एक अहम कड़ी हो सकते हैं।
उन्होंने मारपीट के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि सच्चाई पोस्टमार्टम और मेडिकल रिपोर्ट से सामने आ जाएगी।
नशे के खिलाफ अभियान और पुलिस का पक्ष
पुलिस अधीक्षक ने यह भी रेखांकित किया कि जिले में नशे के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें पुलिसकर्मी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम कर रहे हैं। ऐसे में बिना पुष्टि के आरोप और खबरें पुलिस बल के मनोबल को प्रभावित कर सकती हैं।
मामला क्यों बना बड़ा मुद्दा?
दरअसल, संजय बघेल को हाल ही में नशीले पदार्थों से जुड़े एक मामले में गिरफ्तार किया गया था। बाद में उसकी तबीयत बिगड़ने पर उसे मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी मौत हो गई।
मौत के बाद परिजनों के आरोपों और शरीर पर दिखे निशानों ने पूरे मामले को विवादों के केंद्र में ला दिया।
संयम की अपील, जांच पर टिकी नजरें
पूरे घटनाक्रम के बीच पुलिस प्रशासन ने मीडिया और आमजन से अपील की है कि वे अफवाहों से बचें और न्यायिक जांच के निष्कर्षों का इंतजार करें।
साथ ही यह भरोसा भी दिलाया गया है कि यदि जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही या दोष सिद्ध होता है, तो संबंधित के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
अब इस मामले में सभी की निगाहें पोस्टमार्टम रिपोर्ट और न्यायिक जांच पर टिकी हैं, जो तय करेगी कि यह मौत सामान्य थी या इसके पीछे कोई गंभीर लापरवाही या अत्याचार छिपा है।
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