“सट्टा प्रकरण में नाम आने पर करण चौधरी का पलटवार—‘सबूत हो तो गिरफ्तारी करें’, पुलिस जांच पर टिकी नजर” (देखें वीडियो)

Freelance editor Amardeep chauhan @ amarkhabar.com
रायगढ़।
आईपीएल मैच के दौरान सट्टेबाजी के खिलाफ जारी पुलिस कार्रवाई के बीच घरघोड़ा में दर्ज दो अलग-अलग प्रकरणों ने नया मोड़ ले लिया है। इन मामलों में नाम सामने आने के बाद करण चौधरी ने सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष रखते हुए पुलिस को खुली चुनौती दी है कि यदि उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत हो, तो बिना देर किए कार्रवाई की जाए।
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जानकारी के अनुसार, रविवार को घरघोड़ा थाना पुलिस ने सट्टा संचालन के आरोप में छह लोगों को पकड़ा और दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज कीं। दोनों मामलों में मौके से गिरफ्तार आरोपियों के अलावा जिन नामों का उल्लेख किया गया है, उनमें करण चौधरी और जसमीत सिंह बग्गा भी शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि पकड़े गए आरोपियों ने पूछताछ के दौरान इन दोनों के नाम बताए हैं, जिसके आधार पर उन्हें प्रकरण में जोड़ा गया।
इसी बीच, शहर से बाहर होने के कारण करण चौधरी ने एक वीडियो संदेश जारी कर अपने ऊपर लगे आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने बताया कि वह फिलहाल परिवार के साथ धार्मिक यात्रा पर हैं और मामले की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने पुलिस अधिकारियों से संपर्क भी किया है। उनका कहना है कि उन्हें बेवजह प्रकरण में घसीटा जा रहा है।
करण ने अपने बयान में स्पष्ट कहा कि यदि वर्तमान ही नहीं, बल्कि पिछले तीन वर्षों में भी उनके खिलाफ सट्टेबाजी से जुड़ा कोई प्रमाण मिलता है, तो पुलिस कठोरतम कार्रवाई करे। उन्होंने यह भी जोड़ा कि वह पूर्व में इस गतिविधि से जुड़े रहे हो सकते हैं, लेकिन पिछले तीन वर्षों से इस क्षेत्र से पूरी तरह दूरी बना चुके हैं।
मामले को लेकर उन्होंने पुलिस प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए सहयोग का भरोसा भी जताया है। यहां तक कि उन्होंने यह भी कहा कि यदि उनकी संलिप्तता सिद्ध होती है, तो वे कानूनी प्रक्रिया का सामना करेंगे और जमानत के लिए जल्दबाजी नहीं करेंगे।
उधर, जिले में सट्टा नेटवर्क के खिलाफ पुलिस अधीक्षक शशिमोहन सिंह के निर्देशन में लगातार कार्रवाई जारी है। पुलिस का दावा है कि इस तरह की कार्रवाइयों का उद्देश्य संगठित सट्टेबाजी नेटवर्क को जड़ से खत्म करना है। हालांकि, इस ताजा प्रकरण में सामने आए बयानों और आरोप-प्रत्यारोप के बाद जांच की दिशा और निष्कर्ष पर सबकी नजरें टिक गई हैं।
फिलहाल, यह मामला आरोपियों के बयानों और तकनीकी साक्ष्यों की कसौटी पर है। आने वाले दिनों में पुलिस जांच से ही स्पष्ट होगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और किसकी भूमिका क्या रही।
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