“खरसिया मौत प्रकरण: परिजनों के आरोप और प्रशासनिक दावों के बीच सच की तलाश”

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
रायगढ़ जिले के खरसिया क्षेत्र से सामने आया रमेश चौहान मौत प्रकरण अब एक संवेदनशील मोड़ पर पहुंच चुका है। ग्राम परसकोल निवासी रमेश चौहान की मृत्यु को लेकर परिजनों ने जहां पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं, वहीं प्रशासनिक पक्ष इस मामले को अलग दृष्टिकोण से देख रहा है। ऐसे में यह पूरा मामला अब आरोप और आधिकारिक तथ्यों के बीच संतुलित जांच की मांग कर रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 28 फरवरी 2026 को एक अन्य आपराधिक मामले में पूछताछ के लिए रमेश चौहान को थाना खरसिया लाया गया था। इसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ने और बाद में इलाज के दौरान मृत्यु होने की घटना सामने आई। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर मृतक की पत्नी किरण चौहान ने अनुविभागीय दण्डाधिकारी (एसडीएम) खरसिया के समक्ष औपचारिक आपत्ति दर्ज कराते हुए विस्तृत जांच की मांग की है।
परिजनों का आरोप है कि पूछताछ के दौरान रमेश चौहान के साथ मारपीट की गई, जिससे उनकी स्थिति गंभीर हो गई। उनके अनुसार, प्रारंभिक उपचार के बाद हालत बिगड़ती गई और बाद में जांच में सिर से संबंधित गंभीर चिकित्सकीय समस्या सामने आई। हालांकि इन आरोपों की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही किसी जांच एजेंसी ने इन्हें प्रमाणित किया है।
दूसरी ओर, प्रशासनिक स्तर पर जारी सूचना में यह कहा गया है कि पूछताछ के बाद रमेश चौहान को परिजनों के साथ भेज दिया गया था और उनकी तबीयत बिगड़ने पर इलाज के दौरान मृत्यु हुई। इस कथन को परिजनों ने असहमति के साथ चुनौती दी है और इसे तथ्यों से परे बताया है।
यहां यह उल्लेख करना आवश्यक है कि इस पूरे प्रकरण की मजिस्ट्रियल जांच वर्तमान में जारी है। एसडीएम कार्यालय द्वारा आम नागरिकों से भी जानकारी और साक्ष्य प्रस्तुत करने की अपील की गई है, जिससे घटना के हर पहलू को निष्पक्ष रूप से समझा जा सके। 23 मार्च 2026 तक इस संबंध में तथ्य संकलन की प्रक्रिया जारी रहेगी।
ऐसे मामलों में संवेदनशीलता और संतुलन दोनों आवश्यक होते हैं। एक ओर जहां परिजनों का दर्द और उनके आरोप हैं, वहीं दूसरी ओर जांच पूरी होने से पहले किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना न्यायसंगत नहीं माना जाता। कानून के दायरे में रहते हुए यह जरूरी है कि सभी पक्षों को सुना जाए और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही स्थिति स्पष्ट की जाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि हिरासत या पूछताछ से जुड़े मामलों में पारदर्शिता अत्यंत आवश्यक होती है। यदि किसी व्यक्ति की तबीयत पूछताछ के दौरान या उसके बाद बिगड़ती है, तो उसकी पूरी चिकित्सकीय और प्रशासनिक प्रक्रिया का दस्तावेजीकरण भी उतना ही महत्वपूर्ण हो जाता है। इससे न केवल संदेह की स्थिति कम होती है, बल्कि जवाबदेही भी सुनिश्चित होती है।
फिलहाल यह मामला जांच के दायरे में है और किसी भी पक्ष के आरोप या दावे पर अंतिम मुहर लगना बाकी है। ऐसे में सबसे महत्वपूर्ण है कि जांच प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरी हो, ताकि सच्चाई सामने आ सके और यदि कहीं कोई चूक या लापरवाही हुई है, तो उसके लिए जिम्मेदारी तय की जा सके।
रमेश चौहान की मृत्यु एक परिवार के लिए गहरा आघात है। इस घटना का वास्तविक कारण जो भी हो, लेकिन यह जरूरी है कि न्यायिक प्रक्रिया पूरी गंभीरता और निष्पक्षता के साथ आगे बढ़े—ताकि न केवल पीड़ित परिवार को संतोष मिल सके, बल्कि भविष्य में इस तरह की परिस्थितियों से बचाव के लिए भी स्पष्ट दिशा तय हो सके।
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