तमनार कांड पर सियासी दखल, पुलिस को चेतावनी—निर्दोष न फँसे, दोषियों पर ही हो कार्रवाई

फ्रीलांस एडिटर अमरदीप चौहान/अमरखबर.कॉम
रायगढ़ Sp से करी दो विधायकों में मुलाक़ात
रायगढ़।
तमनार जनसुनवाई विरोध के दौरान भड़की हिंसा और महिला पुलिसकर्मी से अभद्रता के मामले ने अब राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में गहरी हलचल पैदा कर दी है। इसी कड़ी में पूर्व मंत्री उमेश पटेल और लैलूंगा क्षेत्र की विधायक विद्यावती सिदार ने सोमवार को रायगढ़ एसपी दिव्यांग पटेल से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम पर गंभीर चिंता जताई। प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पुलिस कार्रवाई पूरी तरह साक्ष्य-आधारित होनी चाहिए और किसी भी निर्दोष ग्रामीण को अनावश्यक रूप से प्रताड़ित न किया जाए।
एसपी दिव्यांग पटेल ने प्रतिनिधिमंडल को भरोसा दिलाया कि तमनार मामले में बिना ठोस प्रमाण के किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं होगी। उन्होंने कहा कि दर्ज की गई हर एफआईआर की गहन छानबीन की जा रही है और जांच के बाद जो भी दोषी पाए जाएंगे, उन्हीं के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी की प्रक्रिया तेज कर दी गई है, लेकिन जांच की निष्पक्षता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
गौरतलब है कि 27 दिसंबर को तमनार में जनसुनवाई के विरोध के दौरान हालात अचानक बिगड़ गए थे। धरना-प्रदर्शन हिंसक झड़प में तब्दील हो गया और इसी दौरान एक महिला आरक्षक के साथ अभद्रता की घटना सामने आई। इस मामले में पुलिस अब तक मुख्य आरोपी समेत सात लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। हालांकि, ग्रामीणों पर दर्ज एफआईआर को लेकर इलाके में गहरा असंतोष भी देखा जा रहा है, जिसे लेकर जनप्रतिनिधियों ने पुलिस प्रशासन के समक्ष आपत्ति दर्ज कराई।
पूर्व मंत्री उमेश पटेल ने एसपी से बातचीत में कहा कि तमनार की इस बड़ी घटना में कई ऐसे लोगों के नाम एफआईआर में आ गए हैं, जो मौके पर मौजूद ही नहीं थे। उन्होंने आशंका जताई कि व्यक्तिगत रंजिश के चलते निर्दोष लोगों को फँसाने की कोशिशें की जा रही हैं, जिसे हर हाल में रोका जाना चाहिए। उमेश पटेल ने यह भी कहा कि यदि समय रहते प्रशासन और सत्ता पक्ष के जिम्मेदार लोग ग्रामीणों से संवाद बनाए रखते, तो हालात को इस हद तक बिगड़ने से रोका जा सकता था।
लैलूंगा विधायक विद्यावती सिदार ने भी पूरे मामले की निष्पक्ष जांच पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि घटना के दौरान ग्रामीणों के बीच कुछ बाहरी और असामाजिक तत्वों की मौजूदगी की बातें सामने आई हैं। ऐसे में आवश्यक है कि जांच की दिशा वास्तविक दोषियों तक पहुँचे, न कि आंदोलन में शामिल महिलाओं और ग्रामीणों को सामूहिक रूप से आरोपी मान लिया जाए। उनका कहना था कि यह न सिर्फ अन्यायपूर्ण होगा, बल्कि सामाजिक तनाव को और बढ़ा सकता है।
सातवां आरोपी भी गिरफ्त में
इधर, महिला पुलिसकर्मी से अभद्रता के मामले में पुलिस ने सातवें आरोपी को भी गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी की पहचान कन्हैया राठिया के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, कन्हैया राठिया गिरफ्तारी से बचने के लिए ओडिशा फरार हो गया था, जिसे बीते सोमवार-मंगलवार की दरम्यानी रात ओडिशा से दबोच लिया गया। इससे पहले पुलिस ने चरणबद्ध तरीके से छह आरोपियों को गिरफ्तार किया था—पहले दो, फिर तीन और उसके बाद मामले के मुख्य आरोपी को पकड़ा गया था। मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस द्वारा जुलूस निकाले जाने को लेकर भी इलाके में चर्चा और विवाद रहा।
फिलहाल तमनार कांड की जांच निर्णायक मोड़ पर है। एक ओर पुलिस सख्त कार्रवाई के संकेत दे रही है, तो दूसरी ओर जनप्रतिनिधि और ग्रामीण निष्पक्षता और संवाद की मांग पर अड़े हैं। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि प्रशासन इस संवेदनशील मामले में कानून और न्याय के बीच संतुलन कैसे साधता है।