शादी से इनकार बना एसिड अटैक की वजह? युवती पर हमले की साजिश का पुलिस ने किया खुलासा, दो गिरफ्तार

लाइब्रेरी से घर लौटते समय चेहरे पर फेंका था तेजाब, सीसीटीवी और तकनीकी साक्ष्यों से आरोपियों तक पहुंची पुलिस; मुख्य आरोपी के बचपन के दोस्त पर हमला करने का आरोप
बालोद। जिला मुख्यालय में 5 अक्टूबर को लाइब्रेरी से पढ़ाई कर घर लौट रही 22 वर्षीय युवती पर हुए एसिड अटैक के मामले में पुलिस ने दो युवकों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, प्रारंभिक जांच में मामला प्रेम संबंध और शादी से इनकार से जुड़ा सामने आया है। आरोप है कि युवती के कथित प्रेमी ने अपने बचपन के दोस्त के साथ मिलकर हमले की साजिश रची और उसके कहने पर दोस्त ने युवती पर तेजाब फेंका।
घटना के बाद गंभीर रूप से झुलसी युवती को तत्काल जिला अस्पताल ले जाया गया था। प्राथमिक उपचार के बाद उसकी स्थिति को देखते हुए उसे बेहतर इलाज के लिए रायपुर रेफर किया गया। पुलिस के अनुसार, पीड़िता का उपचार जारी है।
लाइब्रेरी से लौटते वक्त किया हमला
पुलिस के अनुसार युवती जिला ग्रंथालय से पढ़ाई कर पैदल अपने घर लौट रही थी। आमापारा क्षेत्र में स्वामी आत्मानंद स्कूल के सामने पहुंचने के दौरान एक युवक ने कथित तौर पर उसके चेहरे पर तेजाब फेंक दिया। अचानक हुए हमले से युवती चीखने लगी। आसपास मौजूद लोगों ने मौके पर पहुंचकर उसकी मदद की और उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया।
घटना के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया। वारदात की सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस सक्रिय हुई और घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालना शुरू किया गया।
सफेद शर्ट वाले युवक ने खोली पहली कड़ी
जांच के दौरान पुलिस को सीसीटीवी फुटेज में वारदात के बाद एक युवक भागता हुआ दिखाई दिया। पुलिस ने फुटेज के अलावा तकनीकी साक्ष्यों और अन्य जांच बिंदुओं को आधार बनाकर संदिग्धों की पहचान की।
पुलिस के मुताबिक जांच का संदेह युवती के परिचित यश कुमार सोनकर की ओर गया। पुलिस ने उसकी तलाश शुरू की और उसे कोंडागांव क्षेत्र से पकड़ा।
पूछताछ में सामने आई कथित साजिश
पुलिस के अनुसार पूछताछ में यश ने युवती के साथ प्रेम संबंध होने और उससे शादी करने की इच्छा की बात बताई। पुलिस का दावा है कि युवती की ओर से शादी के लिए सहमति नहीं मिलने के बाद उसने हमले की योजना बनाई।
जांच में पुलिस को कथित तौर पर यह जानकारी मिली कि करीब तीन महीने पहले यश ने अपने बचपन के दोस्त करण कुंजाम के साथ मिलकर हमले की योजना बनाई थी। पुलिस के अनुसार, 5 अक्टूबर को करण ने युवती पर तेजाब फेंका और इसके बाद दोनों वहां से अलग-अलग निकल गए।
हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान साक्ष्यों और बयानों के आधार पर होगी।
कोंडागांव से दोनों आरोपी गिरफ्तार
यश सोनकर से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने दूसरे आरोपी करण कुंजाम की तलाश शुरू की। पुलिस के मुताबिक करण को भी कोंडागांव से हिरासत में लिया गया।
पुलिस ने दोनों आरोपियों की पहचान यश कुमार सोनकर (20), निवासी नेवारीकला, बालोद और करण कुंजाम (20), निवासी भैरमगढ़ क्षेत्र, बीजापुर के रूप में बताई है। पुलिस के अनुसार दोनों को गिरफ्तार कर न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई की गई है।
जांच के दौरान पुलिस ने कथित तौर पर वारदात में इस्तेमाल एसिड तथा आरोपियों के घटना के समय पहने हुए कपड़े भी जब्त किए हैं।
पुलिसकर्मी की बेटी है पीड़िता
घटना के बाद यह भी सामने आया कि पीड़िता पुलिसकर्मी की बेटी है। वह प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रही थी और पढ़ाई के लिए जिला ग्रंथालय जाती थी।
घटना ने बालोद शहर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। सार्वजनिक स्थान के नजदीक युवती पर इस तरह का हमला होने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपियों की तलाश के लिए विशेष टीम गठित की थी।
एसपी के निर्देश पर बनी थी विशेष टीम
पुलिस के मुताबिक, पुलिस अधीक्षक किरण गंगाराम चव्हाण के निर्देश और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक चंद्रकांत गवर्ना के मार्गदर्शन में उप पुलिस अधीक्षक विनय साहू के नेतृत्व में टीम गठित की गई थी। टीम ने सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर जांच आगे बढ़ाई।
पुलिस की कार्रवाई में आरोपियों तक पहुंचने में सीसीटीवी फुटेज अहम कड़ी साबित हुई। इसके बाद संभावित ठिकानों पर दबिश देकर दोनों आरोपियों को पकड़ा गया।
घटना ने खड़े किए गंभीर सवाल
एसिड अटैक जैसी वारदात केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि पीड़ित की जिंदगी और सुरक्षा पर गहरा असर डालने वाला अपराध है। इस मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार करने का दावा किया है, लेकिन घटना के पीछे बताए जा रहे कारणों, दोनों आरोपियों की वास्तविक भूमिका और हमले की पूरी साजिश से जुड़े पहलुओं की जांच अभी न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है।
पीड़िता की पहचान गोपनीय रखी गई है। गिरफ्तार आरोपियों को न्यायालय द्वारा दोषसिद्ध किए जाने तक उन्हें आरोपी के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
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