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वनभूमि पर अवैध निर्माण की सूचना मिलते ही हरकत में आया वन विभाग, घरघोड़ा में डोजर जब्त; एसडीओ फॉरेस्ट की सक्रियता की चर्चा

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नया रामपुर में वनभूमि पर निर्माण कार्य रुकवाया, 30 से 40 मकान बनने की प्रारंभिक जानकारी; जांच के बाद तय होगी आगे की कार्रवाई

घरघोड़ा। वनभूमि की सुरक्षा और सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण की रोकथाम को लेकर वन विभाग की सक्रियता एक बार फिर सामने आई है। रायगढ़ वनमंडल के घरघोड़ा वन परिक्षेत्र अंतर्गत नया रामपुर क्षेत्र में वनभूमि पर अतिक्रमण कर मकान बनाए जाने की सूचना मिलने के बाद विभागीय अमले ने मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य रुकवाया। साथ ही, भूमि को समतल करने के लिए इस्तेमाल की जा रही एनटीपीसी की एमडीओ वीपीआर कंपनी की डोजर मशीन भी जब्त की गई है।

वन विभाग की इस त्वरित कार्रवाई को वनभूमि के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। खासकर ऐसे क्षेत्र में, जहां कोयला खनन परियोजनाओं और पुनर्वास से जुड़े मामलों के कारण जमीन के उपयोग को लेकर संवेदनशीलता बनी रहती है, वहां वनभूमि की स्थिति पर निगरानी और नियमों का पालन सुनिश्चित करना विभाग के लिए बड़ी जिम्मेदारी है।

पुनर्वास से जुड़ा मामला, लेकिन वनभूमि पर निर्माण की वैधानिकता अहम

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, नया रामपुर क्षेत्र में लगभग 30 से 40 मकानों का निर्माण किया गया है। बताया जा रहा है कि यह मामला एनटीपीसी की तिलाईपाली कोयला खदान से प्रभावित ग्रामीणों के पुनर्वास से संबंधित है। हालांकि, पुनर्वास से जुड़ा होने मात्र से किसी भूमि पर निर्माण की वैधानिकता स्वतः सिद्ध नहीं हो जाती। इसके लिए संबंधित भूमि का राजस्व एवं वन अभिलेखों में दर्ज स्वरूप, आवंटन की स्थिति और आवश्यक अनुमतियों की जांच जरूरी है।

वन विभाग ने भी फिलहाल मामले को जांच के दायरे में रखा है। निर्माण किस भूमि पर हुआ, अतिक्रमण का वास्तविक क्षेत्रफल कितना है, किन व्यक्तियों की इसमें भूमिका है और संबंधित पक्षों के पास कोई वैधानिक अनुमति है या नहीं—इन बिंदुओं पर तथ्य जुटाए जा रहे हैं।

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घरघोड़ा वन विभाग की सक्रियता सराहनीय, समय पर कार्रवाई से गया स्पष्ट संदेश

नया रामपुर में निर्माण कार्य रुकवाने और डोजर मशीन जब्त करने की कार्रवाई यह दर्शाती है कि वनभूमि से जुड़े मामलों को नजरअंदाज करने के बजाय मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लेना और आवश्यक कदम उठाना महत्वपूर्ण है। घरघोड़ा क्षेत्र में वनभूमि के संरक्षण की जिम्मेदारी निभा रहे विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की सक्रियता इस दृष्टि से सराहनीय है।

विशेष रूप से घरघोड़ा के एसडीओ फॉरेस्ट आशुतोष मांडवा की भूमिका की सराहना की जा रही है कि वनभूमि पर अतिक्रमण की सूचना के बाद विभागीय कार्रवाई आगे बढ़ी। हालांकि, कार्रवाई की पूरी जिम्मेदारी और प्रत्येक अधिकारी की व्यक्तिगत भूमिका का आकलन विभागीय रिकॉर्ड तथा आधिकारिक पुष्टि के आधार पर ही किया जाना उचित होगा।

वनभूमि का संरक्षण केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रह सकता। इसके लिए समय पर सूचना पर संज्ञान लेना, मौके की जांच करना, साक्ष्य जुटाना और कानून के अनुरूप कार्रवाई करना आवश्यक है। नया रामपुर में हुई कार्रवाई इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

नोटिस के बाद जांच के तथ्यों के आधार पर होगी अगली कार्रवाई

वन विभाग के अनुसार, संबंधित व्यक्तियों को नोटिस जारी करने की प्रक्रिया की जा रही है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर लागू वन कानूनों तथा अन्य प्रासंगिक प्रावधानों के तहत नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

इस मामले में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि निर्माण की शुरुआत कब हुई, संबंधित भूमि का वास्तविक क्षेत्रफल कितना है और क्या निर्माण से पहले किसी सक्षम प्राधिकारी से अनुमति प्राप्त की गई थी। इन सवालों के स्पष्ट उत्तर मिलने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर सामने आ सकेगी।

संरक्षण और पुनर्वास—दोनों मामलों में नियमों का पालन जरूरी

कोयला खनन परियोजनाओं से प्रभावित परिवारों का पुनर्वास एक महत्वपूर्ण सामाजिक और प्रशासनिक विषय है। प्रभावित ग्रामीणों को उचित पुनर्वास और सुविधाएं मिलना आवश्यक है। वहीं, पुनर्वास की प्रक्रिया में वनभूमि या अन्य सरकारी भूमि के उपयोग से जुड़े नियमों का पालन भी उतना ही जरूरी है।

ऐसे मामलों में प्रशासन, वन विभाग और संबंधित परियोजना प्रबंधन के बीच समन्वय से ही स्थिति स्पष्ट हो सकती है। यदि किसी स्थान पर वैधानिक अनुमति के बिना निर्माण हुआ है, तो कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, यदि संबंधित पक्षों के पास वैध दस्तावेज हैं, तो उनकी भी निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए।

फिलहाल नया रामपुर का मामला जांच के अधीन है। वन विभाग की कार्रवाई के बाद अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि जांच में वनभूमि की वास्तविक स्थिति क्या सामने आती है और संबंधित पक्षों की भूमिका के आधार पर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।

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Amar Chouhan

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