बारिश में भी डटे ग्रामीण, एसईसीएल खदान विस्तार पर अड़ा विरोध—10 सूत्रीय मांगों ने रोका जनसुनवाई का रास्ता


Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com
छाल। मूसलाधार बारिश के बीच एसईसीएल के प्रस्तावित खदान विस्तार को लेकर क्षेत्र में विरोध और तेज हो गया है। मंगलवार को प्रस्तावित जनसुनवाई से ठीक पहले हालात ऐसे बन गए हैं कि प्रशासनिक तैयारियां भी प्रभावित हो रही हैं। प्रभावित और विस्थापित ग्रामीण अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर लगातार धरने पर डटे हुए हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में तनावपूर्ण लेकिन शांतिपूर्ण स्थिति बनी हुई है।
शुक्रवार को हुई भारी बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में ग्रामीण—महिलाएं, बुजुर्ग और युवा—धरना स्थल पर मौजूद रहे। हाथों में तख्तियां लेकर उन्होंने साफ संदेश दिया कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस सहमति नहीं बनती, तब तक खदान विस्तार की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ने दी जाएगी।
खदान विस्तार पर बढ़ता असंतोष
ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों से खनन गतिविधियों के कारण उनके गांवों में जीवन प्रभावित हो रहा है। धूल, धुआं, जल संकट और भूमि क्षरण जैसी समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन इसके बदले में उन्हें न तो पर्याप्त पुनर्वास मिला और न ही मूलभूत सुविधाओं में सुधार हुआ।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस कोयले से देश की ऊर्जा जरूरतें पूरी हो रही हैं, उसी क्षेत्र के लोग आज भी सड़क, पानी और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
बारिश में भी जारी रहा विरोध प्रदर्शन
लगातार बारिश के बीच भी प्रदर्शन में कोई कमी नहीं आई। महिलाओं और बुजुर्गों की मौजूदगी ने आंदोलन को और मजबूती दी। ग्रामीणों ने कहा कि यह केवल विरोध नहीं, बल्कि अपने अधिकारों की लड़ाई है, जो अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है।
ग्रामीणों की 10 सूत्रीय मांगें
प्रभावित परिवारों ने एसईसीएल प्रबंधन और प्रशासन के सामने अपनी प्रमुख मांगें रखी हैं, जिनमें—
भूमि और मकानों का पुनः निष्पक्ष सर्वे कर उचित मुआवजा व पुनर्वास
प्रत्येक प्रभावित परिवार के एक सदस्य को स्थायी रोजगार
खराब सड़कों का निर्माण और स्कूली बच्चों के लिए बस सुविधा
स्वच्छ पेयजल और निर्बाध बिजली आपूर्ति
बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों का उन्नयन
प्रभावित क्षेत्र के बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और छात्रवृत्ति
ग्रामीणों का कहना है कि ये मांगें नई नहीं हैं, बल्कि वर्षों से लंबित हैं, जिन पर अब केवल आश्वासन नहीं बल्कि ठोस कार्रवाई की जरूरत है।
जनसुनवाई पर संकट के बादल
मंगलवार को प्रस्तावित जनसुनवाई को लेकर स्थिति गंभीर होती जा रही है। ग्रामीणों के लगातार विरोध के चलते स्थल पर तैयारियां प्रभावित हुई हैं। प्रशासन और एसईसीएल प्रबंधन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि जनसुनवाई को शांतिपूर्ण तरीके से कैसे संपन्न कराया जाए।
ग्रामीणों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी मांगों पर लिखित और ठोस सहमति नहीं बनती, वे किसी भी जनसुनवाई का समर्थन नहीं करेंगे।
संवाद की राह या टकराव की स्थिति
अब पूरा मामला संवाद और समाधान की दिशा पर टिका है। एक ओर प्रशासन जनसुनवाई को सुचारु रूप से कराने की कोशिश में है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण अपने रुख पर अडिग हैं।
स्थिति यह संकेत दे रही है कि यदि समय रहते ठोस पहल नहीं हुई, तो यह विरोध आने वाले दिनों में और व्यापक रूप ले सकता है।
फिलहाल क्षेत्र में सभी की निगाहें मंगलवार को होने वाली जनसुनवाई पर टिकी हैं—जहां तय होगा कि संवाद का रास्ता खुलेगा या टकराव की स्थिति गहराएगी।
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