रुपाणाधाम स्टील की लापरवाही: नदी में बही राखड़, अब लगेगा प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com
रायगढ़: रुपाणाधाम स्टील प्रालि द्वारा की गई भारी लापरवाही के कारण पर्यावरण और केलो नदी को गंभीर नुकसान पहुंचा है। गदगांव-बरपाली क्षेत्र में बरदे नाला के किनारे प्लांट द्वारा की गई फ्लाई एश (राखड़) की अवैध डंपिंग भारी बारिश के बाद बहकर सीधे केलो नदी में मिल गई है। इस गंभीर मामले को लेकर जल संसाधन विभाग और पर्यावरण विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है।
मुख्य बिंदु और घटनाक्रम
बिना अनुमति डंपिंग: रुपाणाधाम स्टील प्लांट ने बरपाली में बरदे नाला किनारे बिना किसी प्रशासनिक अनुमति के भारी मात्रा में फ्लाई एश (राखड़) डंप कर दी थी।
कार्रवाई को किया अनसुना: इससे पहले भूमि स्वामी पूजा साहू ने अपनी जमीन पर राखड़ डालने की अनुमति का आवेदन दिया था, लेकिन जांच में पता चला कि प्लांट ने बिना अनुमति पहले ही कई टन राखड़ वहां डाल दी थी। इस पर पहले 3 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया था और मिट्टी बिछाकर समतलीकरण के निर्देश दिए गए थे, लेकिन प्लांट ने डंपिंग बंद नहीं की।
कच्चा पुल टूटने से बहा मलबा: अवैध परिवहन के लिए नाले के ऊपर एक कच्चा पुल बनाया गया था, जिसके किनारों पर राखड़ और मिट्टी डाली गई थी। भारी बारिश के कारण यह पुल टूट गया और पूरा मलबा पानी के साथ केलो नदी में समा गया।
ट्रांसपोर्टरों की भूमिका और इलाका बना जंग का मैदान
इस पूरे अवैध कारोबार के पीछे क्षेत्र के दो प्रमुख ट्रांसपोर्टरों का नाम सामने आया है:
1. रोहतास
2. अजय
नोट: गेरवानी और सराईपाली क्षेत्र के सभी प्लांट इन्हीं दोनों ट्रांसपोर्टरों से काम लेते हैं। ये दोनों बिना अनुमति के राखड़ को ठिकाने लगाने (निराकृत करने) में माहिर माने जाते हैं। काम हथियाने के लिए इनके बीच की आपसी तनातनी इतनी बढ़ चुकी है कि हाल ही में भुईकुर्री में हुआ अविश्वास प्रस्ताव भी इसी विवाद का नतीजा था। इन दोनों की वजह से पूरे इलाके में फ्लाई एश की अवैध डंपिंग और जमीनों की अवैध खरीदी-बिक्री जोरों पर चल रही है।
अब आगे.. (विभाग की कार्रवाई)
संयुक्त निरीक्षण: जल संसाधन विभाग और पर्यावरण विभाग की टीमों ने मौके का मुआयना कर स्थिति की गंभीरता को देखा है।
कारण बताओ नोटिस: रुपाणाधाम स्टील को आधिकारिक तौर पर नोटिस जारी कर चेतावनी दी गई है।
प्रतिदिन जुर्माना: यदि प्लांट प्रबंधन द्वारा जल्द ही कोई समाधानकारक और संतोषजनक कार्रवाई नहीं की गई, तो इस बार कंपनी पर प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना लगाया जाएगा।
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