Latest News

रिश्तों के कत्लगाह में तब्दील होते घर: रायगढ़ की घटना ने फिर झकझोरा समाज का अंतःकरण

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ से आई एक हालिया अदालती सुर्खी ने कानून की नजर में एक मुकदमों को अंजाम तक जरूर पहुंचा दिया है, लेकिन सामाजिक मोर्चे पर कई अनुत्तरित और भयावह सवाल छोड़ दिए हैं। अपर सत्र न्यायाधीश अभिषेक शर्मा के न्यायालय ने पति विशेश्वर राठिया की हत्या के जुर्म में पत्नी सहोद्रा राठिया और उसके प्रेमी टीकाराम को उम्रकैद की सजा सुनाई है। 12 फरवरी 2020 को हुई इस वारदात में अवैध संबंधों को छिपाने के लिए एक हंसते-खेलते संसार को उजाड़ दिया गया।

यह घटना केवल एक आपराधिक मामला भर नहीं है, बल्कि यह उस सामाजिक विद्रूपता का आईना है जो हमारे भीतर के नैतिक पतन को बयां कर रही है।

जब ‘सुरक्षा कवच’ ही बन जाए ‘डेथ वारंट’

भारतीय समाज में विवाह को एक पवित्र संस्था और घर को सबसे सुरक्षित स्थान माना जाता रहा है। लेकिन हाल के वर्षों में अपराध के जो आंकड़े और तौर-तरीके सामने आ रहे हैं, वे यह बताने के लिए काफी हैं कि अब सबसे बड़ा खतरा अपनों से ही है। रायगढ़ के इस मामले में भी यही हुआ—एक पत्नी ने अपने अनैतिक संबंधों की सच्चाई को दबाने के लिए आधी रात को अपने ही पति के सिर पर ईंट और सिल-लोढ़े से वार कर दिया।

पत्रकारिता और समाजशास्त्र के नजरिए से देखें तो यह प्रवृत्ति बेहद खतरनाक मोड़ पर है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) और देश के विभिन्न न्यायालयों से आने वाले फैसले चीख-चीखकर कह रहे हैं कि अनैतिक संबंधों, अत्यधिक संवेदनशीलता की कमी और तात्कालिक आवेग (Impulse) के कारण अब ‘घर’ ही ‘कत्लगाह’ बनते जा रहे हैं।

देशव्यापी संकट: बिखरते रिश्तों की कुछ दहला देने वाली बानगियां

रायगढ़ की यह घटना कोई अकेली बानगी नहीं है। अगर हम देश के अन्य हिस्सों पर नजर डालें, तो ऐसी घटनाओं की एक लंबी और खौफनाक फेहरिस्त नजर आती है:

चित्रकूट (उत्तर प्रदेश): कुछ समय पहले ठीक इसी ढर्रे पर एक पत्नी ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर पति की हत्या की और साक्ष्य छिपाने के लिए लाश को घर के भीतर ही गड्ढा खोदकर दफना दिया था। अदालत ने वहां भी दोनों को उम्रकैद की सजा सुनाई।

वाराणसी (उत्तर प्रदेश): सहेली और अवैध संबंधों के अजीबो-गरीब ताने-बाने में एक महिला की फावड़े से काटकर हत्या कर दी गई, जहां आरोपी महिला खुद लाश के पास बैठी मिली।

रायपुर (छत्तीसगढ़): पारिवारिक विवाद और शक के चलते एक पति ने अपनी ही पत्नी पर पेट्रोल छिड़ककर उसे जिंदा जला दिया।

ये उदाहरण केवल कानून-व्यवस्था की विफलता नहीं हैं। यह उस ‘इंस्टेंट ग्रैटिफिकेशन’ (तुरंत सब कुछ पा लेने की चाह) और नैतिक शून्यता का परिणाम है, जहां इंसान अपनी वासना या गुस्से के आगे जीवन के सबसे बड़े मूल्य ‘जीवन’ को ही खत्म करने से नहीं हिचकता।

न्याय का संदेश और सामाजिक सुधार की जरूरत

रायगढ़ मामले में अदालत ने न सिर्फ दोषियों को आजीवन कारावास की सजा दी, बल्कि पीड़ित परिवार को विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से 1 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति देने की अनुशंसा कर न्याय की मानवीय संवेदनशीलता को भी रेखांकित किया है। सरकारी वकील राजेश सिंह ठाकुर की दमदार पैरवी ने यह साबित कर दिया कि कानून के हाथ लंबे हैं और देर से ही सही, गुनाहगार बच नहीं सकते।

लेकिन बतौर नागरिक, हमें यह सोचना होगा कि क्या केवल उम्रकैद या फांसी की सजाएं इन अपराधों को रोक पा रही हैं? जवाब है—नहीं।

जब तक समाज में संवादहीनता खत्म नहीं होगी, जब तक शालीनता और नैतिक मूल्यों को हमारी शिक्षा और परवरिश का हिस्सा नहीं बनाया जाएगा, तब तक अदालतों में ऐसे चालान पेश होते रहेंगे। आज जरूरत इस बात की है कि हम कानूनी लड़ाइयों को जीतने के साथ-साथ, सामाजिक स्तर पर टूटते परिवारों और बिखरते रिश्तों को बचाने की एक बड़ी मुहिम शुरू करें। वरना, रायगढ़ जैसी सुर्खियां हमारे अखबारों के पन्नों को यूं ही लाल करती रहेंगी।

अन्य अधिक खबरों के लिए स्क्रॉल डाउन करें 👇⬇️

Amar Chouhan

AmarKhabar.com एक हिन्दी न्यूज़ पोर्टल है, इस पोर्टल पर राजनैतिक, मनोरंजन, खेल-कूद, देश विदेश, एवं लोकल खबरों को प्रकाशित किया जाता है। छत्तीसगढ़ सहित आस पास की खबरों को पढ़ने के लिए हमारे न्यूज़ पोर्टल पर प्रतिदिन विजिट करें।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button