रायगढ़ में सख्त संदेश: एफआईआर में अब नहीं चलेगी देरी, 60–90 दिन में पूरी होगी विवेचना

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com
आईजीपी राम गोपाल गर्ग की समीक्षा बैठक में पुलिसिंग को प्रोफेशनल, तकनीक आधारित और जवाबदेह बनाने पर जोर


रायगढ़। कानून व्यवस्था को लेकर ढिलाई पर अब सख्त लगाम कसने की तैयारी है। बिलासपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक राम गोपाल गर्ग ने स्पष्ट शब्दों में कह दिया है कि किसी भी वैधानिक शिकायत पर एफआईआर दर्ज करने में अब किसी तरह की टालमटोल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने यह भी साफ किया कि तय समयसीमा के भीतर विवेचना पूरी करना ही अब पुलिसिंग की असली कसौटी होगी।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के रायगढ़ प्रवास के बाद पुलिस कंट्रोल रूम में आयोजित समीक्षा बैठक में आईजीपी ने जिले की कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण और नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन की बारीकी से समीक्षा की। बैठक में मौजूद वरिष्ठ अधिकारियों, थाना प्रभारियों और विवेचकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि बदलते दौर में केवल पारंपरिक पुलिसिंग पर्याप्त नहीं है—अब तकनीक, त्वरित कार्रवाई और जवाबदेही ही सफलता की पहचान होगी।
आईजीपी गर्ग ने निर्देश दिए कि जिन मामलों में सजा सात वर्ष या उससे अधिक है, उनमें 90 दिनों के भीतर और अन्य मामलों में 60 दिनों के भीतर विवेचना पूरी कर न्यायालय में चालान पेश किया जाए। लंबित प्रकरणों की श्रेणीवार सूची तैयार कर प्राथमिकता के आधार पर उनका निपटारा करने को कहा गया। सामान्य अपराधों को आठ दिनों के भीतर सुलझाने और जटिल मामलों में वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में गुणवत्तापूर्ण विवेचना सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया।
संपत्ति से जुड़े अपराधों को लेकर उन्होंने स्पष्ट रुख अपनाया। थाना प्रभारियों को निर्देशित किया गया कि शिकायत मिलते ही तत्काल एफआईआर दर्ज करें और पीड़ित को अनावश्यक चक्कर न लगवाएं। चोरी के मामलों में ‘सशक्त ऐप’ के उपयोग, आदतन अपराधियों की निगरानी और जमानत पर छूटे आरोपियों पर कड़ी नजर रखने के निर्देश भी दिए गए। दोबारा अपराध करने पर ऐसे आरोपियों की जमानत निरस्त कराने के लिए न्यायालय में तत्काल कार्रवाई करने को कहा गया।
बैठक में डिजिटल पुलिसिंग को मजबूती देने पर भी जोर रहा। आईजीपी ने ई-साक्ष्य संकलन, ऑडियो-वीडियोग्राफी, सीसीटीएनएस में समय पर एंट्री, डिजिटल सिग्नेचर और MedLEaPR पोर्टल के जरिए मेडिकल प्रक्रिया को अनिवार्य रूप से अपनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि तकनीक का सही इस्तेमाल ही विवेचना को पारदर्शी और मजबूत बनाएगा।
फरार आरोपियों के खिलाफ वारंट प्रक्रिया में देरी न करने, शून्य मर्ग की सूचना तुरंत संबंधित थाने तक पहुंचाने और एनडीपीएस मामलों की विवेचना को और सुदृढ़ बनाने के लिए समय-समय पर प्रशिक्षण आयोजित करने के निर्देश भी दिए गए। न्यायालयीन पेशियों में पुलिसकर्मियों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने पर भी सख्ती दिखाई गई।
बैठक में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने भरोसा दिलाया कि रायगढ़ पुलिस आईजीपी के सभी निर्देशों का कड़ाई से पालन करेगी और जिले में अपराध नियंत्रण, समयबद्ध विवेचना तथा तकनीक आधारित पुलिसिंग को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।
इस समीक्षा बैठक ने स्पष्ट संकेत दे दिया है कि रायगढ़ में अब पुलिसिंग के तौर-तरीकों में बदलाव की शुरुआत हो चुकी है—जहां देरी, ढिलाई और लापरवाही की गुंजाइश कम होती जाएगी और जवाबदेही बढ़ेगी।
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