मां शिवा स्टील प्लांट में बड़ा हादसा: इंडक्शन फर्नेस में ‘बॉयलिंग’ से चार श्रमिक झुलसे, दो की हालत नाजुक

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com
रायगढ़। औद्योगिक क्षेत्र पूंजीपथरा में स्थित मां शिवा स्टील प्लांट में बुधवार सुबह एक गंभीर हादसा हो गया, जब इंडक्शन फर्नेस में अचानक ‘बॉयलिंग’ होने से चार श्रमिक उसकी चपेट में आकर झुलस गए। इनमें दो की हालत गंभीर बताई जा रही है। घटना के बाद प्लांट परिसर में अफरा-तफरी मच गई और कामकाज कुछ समय के लिए ठप हो गया।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, घटना सुबह करीब 7 बजे उस वक्त हुई जब श्रमिक नियमित कार्य में लगे हुए थे। इसी दौरान इंडक्शन फर्नेस में तकनीकी कारणों से तेज उबाल (बॉयलिंग) की स्थिति बनी, जिससे गर्म धातु के छींटे आसपास काम कर रहे मजदूरों पर आ गिरे। हादसे में प्रमोद सोनी, चौखर सिंह, शनि सिंह और गुड्डू नामक श्रमिक झुलस गए।

घटना के बाद मचा हड़कंप, तत्काल अस्पताल पहुंचाए गए घायल
हादसे के बाद प्लांट में मौजूद अन्य श्रमिकों में दहशत फैल गई और बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल पर इकट्ठा हो गए। प्रबंधन की ओर से तत्काल राहत एवं बचाव की कार्रवाई करते हुए घायलों को उपचार के लिए जिंदल फोर्टिस अस्पताल भेजा गया, जहां दो श्रमिकों की स्थिति चिंताजनक बताई जा रही है।
पुलिस और सुरक्षा विभाग मौके पर, जांच शुरू
घटना की सूचना मिलते ही पूंजीपथरा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और हालात का जायजा लिया। साथ ही औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग की टीम भी जांच के लिए प्लांट पहुंची है। विभाग के उप संचालक राहुल पटेल ने पुष्टि की कि इंडक्शन फर्नेस में बॉयलिंग के कारण चार श्रमिक झुलसे हैं, जिनमें दो अधिक गंभीर रूप से घायल हैं।
सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल
लगातार हो रही औद्योगिक दुर्घटनाओं के बीच इस घटना ने एक बार फिर सुरक्षा मानकों और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इंडक्शन फर्नेस जैसे संवेदनशील उपकरणों के संचालन में थोड़ी सी लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
जांच रिपोर्ट पर टिकी नजर
फिलहाल पुलिस और संबंधित विभाग मामले की विस्तृत जांच में जुटे हैं। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि हादसा तकनीकी खामी, मानवीय त्रुटि या सुरक्षा मानकों की अनदेखी का परिणाम था। जांच रिपोर्ट के बाद ही जिम्मेदारी तय हो सकेगी।
औद्योगिक क्षेत्र में लगातार हो रही ऐसी घटनाएं यह संकेत दे रही हैं कि उत्पादन के साथ-साथ श्रमिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना अब अनिवार्य हो गया है।
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