“पृथक्करण शेड निर्माण में पारदर्शिता पर सवाल: सूचना के अधिकार के बावजूद टालमटोल, जनपद कार्यालय की चुप्पी से बढ़ा संशय”

Journalist Amardeep chauhan
http://amarkhabar.com
रायगढ़, छत्तीसगढ़।
ग्राम पंचायत तुरंगा में निर्मित पृथक्करण शेड (Segregation Shed) को लेकर पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी के बावजूद जनपद पंचायत पुसौर के अधिकारियों द्वारा स्पष्ट जवाब न दिए जाने से पूरे मामले में संदेह गहराता जा रहा है।
मिली जानकारी के अनुसार, आवेदक पद्मनाभ प्रधान द्वारा दिनांक 24 मार्च 2026 को पृथक्करण शेड निर्माण कार्य के भौतिक सत्यापन हेतु जनपद पंचायत में आवेदन प्रस्तुत किया गया था। इसके बाद 8 अप्रैल 2026 को आवेदक का बयान भी दर्ज किया गया, जो कि कथित तौर पर एक पक्षीय प्रक्रिया का हिस्सा बताया जा रहा है।
हालांकि, निर्धारित समयावधि बीत जाने के बाद भी आवेदक को किसी प्रकार की आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। एक माह के भीतर कई बार जनपद कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से संपर्क करने के बावजूद सीईओ कार्यालय की ओर से जवाब टालने का रवैया सामने आया।
स्थिति से असंतुष्ट होकर आवेदक ने पुनः 3 जून 2026 को दस्तावेजों की प्रतिलिपि (नक़ल) प्राप्त करने के लिए नया आवेदन प्रस्तुत किया। सवाल यह उठता है कि जब भौतिक सत्यापन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, तो जानकारी साझा करने में आखिर किस बात की बाधा है?

प्रश्नों के घेरे में प्रशासनिक पारदर्शिता
इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं—
क्या सूचना को जानबूझकर रोका जा रहा है?
क्या निर्माण कार्य में किसी प्रकार की अनियमितता छिपाने का प्रयास हो रहा है?
या फिर यह केवल लापरवाही और प्रक्रियात्मक ढिलाई का मामला है?
सूचना के अधिकार अधिनियम का उद्देश्य ही आम नागरिक को शासन की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। ऐसे में जानकारी देने में देरी या टालमटोल न केवल नियमों की अनदेखी है, बल्कि जनविश्वास को भी कमजोर करता है।
जनता की आवाज बनाम तंत्र की चुप्पी
आवेदक का कहना है कि जानकारी मांगना कोई अपराध नहीं, बल्कि एक संवैधानिक अधिकार है। यदि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी नहीं है, तो सूचना देने में हिचक क्यों?
स्थानीय स्तर पर भी इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। ग्रामीणों का मानना है कि यदि समय रहते स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आती, तो यह मामला आगे और तूल पकड़ सकता है।
अब निगाहें अगली कार्रवाई पर
फिलहाल सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि नवीन आवेदन के बाद जनपद पंचायत पुसौर प्रशासन क्या रुख अपनाता है। क्या इस बार जानकारी सार्वजनिक की जाएगी या फिर यह मामला भी फाइलों में उलझ कर रह जाएगा?
(यह मामला पारदर्शिता और जवाबदेही की कसौटी पर खरा उतरने की प्रतीक्षा में है।)
Now U can Download Amar khabar from google play store also.