बरसात में बढ़ा संक्रमण का खतरा: बच्चों पर पांच बड़ी बीमारियों का साया, लापरवाही पड़ सकती है भारी
Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com
रायगढ़। मानसून की फुहारें जहां गर्मी से राहत देती हैं, वहीं बच्चों की सेहत के लिए यह मौसम चुनौती भी बन जाता है। जलभराव, बढ़ती नमी और मच्छरों की सक्रियता के कारण संक्रामक बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। शहर के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अंशुल श्रीवास्तव का कहना है कि इस मौसम में थोड़ी सी लापरवाही बच्चों को गंभीर बीमारियों की चपेट में ला सकती है, लेकिन समय रहते सावधानी बरतकर इनसे बचाव संभव है।
बरसात के दौरान दूषित पानी और भोजन के सेवन से बच्चों में दस्त और उल्टी की समस्या आम हो जाती है। इससे शरीर में पानी और जरूरी लवण तेजी से कम हो जाते हैं, जो छोटे बच्चों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। विशेषज्ञों की सलाह है कि ऐसी स्थिति में बच्चों को बार-बार थोड़ी मात्रा में ओआरएस, माड़, नींबू-पानी और हल्का आहार दिया जाए। पेशाब कम होना या अत्यधिक सुस्ती जैसे लक्षण गंभीर संकेत माने जाते हैं।
इसी तरह, वायरल बुखार भी इस मौसम की प्रमुख समस्या है। अचानक तेज बुखार, सिरदर्द, बदन दर्द, सर्दी-खांसी और भूख में कमी इसके सामान्य लक्षण हैं। कई मामलों में बच्चों का तापमान 102 से 103 डिग्री फारेनहाइट तक पहुंच जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि बिना चिकित्सकीय सलाह दवा देने से बचना चाहिए और बुखार की स्थिति पर लगातार नजर रखना जरूरी है।

मलेरिया और डेंगू का खतरा भी बढ़ा
बरसात के साथ मच्छरों की संख्या बढ़ने से मलेरिया और डेंगू के मामले भी सामने आने लगते हैं। ठंड और कंपकंपी के साथ बुखार, सिरदर्द और बदन दर्द मलेरिया के संकेत हो सकते हैं, जबकि डेंगू में तेज बुखार के साथ उल्टी, पेट दर्द और शरीर पर लाल चकत्ते दिख सकते हैं। गंभीर स्थिति में नाक या मुंह से रक्तस्राव भी हो सकता है। ऐसे मामलों में तत्काल जांच और उपचार बेहद जरूरी है।
दूषित पानी से पीलिया का खतरा
इस मौसम में पीलिया का संक्रमण भी तेजी से फैलता है, जो मुख्यतः दूषित पानी और भोजन के कारण होता है। शुरुआती लक्षणों में हल्का बुखार, जी मिचलाना, पेट दर्द और भूख में कमी शामिल हैं, जबकि आंखों और त्वचा में पीलापन इसका प्रमुख संकेत है।
त्वचा और आंखों के संक्रमण भी आम
हवा में नमी बढ़ने से बच्चों में त्वचा और फंगल संक्रमण के मामले भी बढ़ जाते हैं। त्वचा पर खुजली, लाल चकत्ते और दाने इसके सामान्य लक्षण हैं। वहीं, आंखों में संक्रमण के कारण लालिमा, जलन और पानी आना देखा जा सकता है। यह संक्रमण संपर्क से फैलता है, इसलिए साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना जरूरी है।
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
डॉ. श्रीवास्तव के अनुसार, यदि बच्चे को तेज या लगातार बुखार, बार-बार उल्टी-दस्त, पेशाब कम होना, अत्यधिक सुस्ती, शरीर पर लाल चकत्ते या किसी प्रकार का रक्तस्राव दिखाई दे तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना चाहिए। देरी गंभीर स्थिति को जन्म दे सकती है।
सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव
विशेषज्ञों का मानना है कि बरसात के मौसम में बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए स्वच्छ पेयजल, ताजा भोजन, व्यक्तिगत स्वच्छता और मच्छरों से बचाव बेहद जरूरी है। घर के आसपास पानी जमा न होने देना, बच्चों को गीले कपड़ों में न रखना और समय पर बीमारी के संकेतों को पहचानना ही संक्रमण से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।
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