“भाजी के विवाद में पत्नी की हत्या: आंगन में जलाकर दफनाया राज, 12 दिन बाद पुलिस ने खोला कातिल पति का खेल”

Journalist Amardeep Chauhan
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रायगढ़ (कापू)। जंगलों और पहाड़ियों के बीच बसे कापू थाना क्षेत्र के छोटे से गाँव कुमा में सामने आई एक हत्या ने न केवल इलाके को झकझोर दिया, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि अपराध कितना ही योजनाबद्ध क्यों न हो, सच आखिरकार सामने आ ही जाता है। एक साधारण गुमशुदगी की रिपोर्ट से शुरू हुई यह कहानी धीरे-धीरे एक सनसनीखेज हत्या में बदल गई, जिसमें पति ही पत्नी का कातिल निकला।
28 अप्रैल की दोपहर, जब आसमान बादलों से ढका हुआ था, 39 वर्षीय देवानंद सिदार थाना कापू पहुंचा। उसने पुलिस को बताया कि उसकी 26 वर्षीय पत्नी चमेली सिदार 16 अप्रैल से लापता है। पति की सूचना पर गुमशुदगी दर्ज कर ली गई। मामला सामान्य प्रतीत हो रहा था, लेकिन अनुभवी पुलिस अधिकारियों को शुरुआती स्तर पर ही कुछ असामान्य लगा।
पत्नी के 12 दिनों से लापता होने के बावजूद देवानंद के व्यवहार में न तो चिंता दिख रही थी और न ही कोई भावनात्मक प्रतिक्रिया। यही वह बिंदु था, जहां से पुलिस की शंका गहराने लगी। उप निरीक्षक इगेश्वर यादव ने अपने अनुभव के आधार पर मामले को गंभीरता से लिया और जांच की दिशा बदल दी।
जांच के दौरान सामने आया कि चार वर्ष पहले प्रेम संबंध के चलते चमेली अपने मायके मिर्जापुर से कुमा आकर देवानंद के साथ रहने लगी थी। दंपति निःसंतान थे, जिसे लेकर उनके बीच अक्सर विवाद होता था। पुलिस के अनुसार, 16 अप्रैल की रात मामूली घरेलू बात—खाने में भाजी नहीं बनने—को लेकर विवाद इतना बढ़ा कि देवानंद ने गुस्से में आकर अपनी पत्नी की गला दबाकर हत्या कर दी।
हत्या के बाद आरोपी ने सबूत मिटाने की सुनियोजित कोशिश की। उसने शव को घर के आंगन में जलाया और बची हुई हड्डियों को गड्ढा खोदकर पत्थरों के नीचे दफना दिया। इसके बाद वह सामान्य व्यवहार करते हुए गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराने थाने पहुंच गया, ताकि शक से बच सके।
हालांकि, पुलिस की पैनी नजरों से वह बच नहीं सका। पूछताछ के दौरान उसके बयानों में विरोधाभास मिलने पर पुलिस ने फॉरेंसिक टीम के साथ घर के आंगन की खुदाई करवाई। वहां से जली हुई हड्डियां बरामद हुईं। डीएनए परीक्षण में पुष्टि हुई कि वे अवशेष चमेली सिदार के ही हैं।
एफएसएल रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया। गिरफ्तारी की भनक लगते ही आरोपी फरार हो गया, लेकिन कापू पुलिस ने तीन दिनों तक जंगलों में लगातार सर्च ऑपरेशन चलाया। मुखबिर तंत्र की मदद से चौथे दिन उसे पकड़ लिया गया।
पूछताछ में आरोपी ने हत्या की पूरी वारदात कबूल कर ली। इस अंधे कत्ल की गुत्थी सुलझाने में थाना प्रभारी धर्माराम तिर्की और उप निरीक्षक इगेश्वर यादव की भूमिका महत्वपूर्ण रही। वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में की गई वैज्ञानिक जांच ने यह साबित कर दिया कि अपराध की साजिश कितनी भी गहरी क्यों न हो, कानून की पकड़ से बच पाना मुश्किल है।
यह मामला न केवल एक जघन्य अपराध का उदाहरण है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि सूक्ष्म जांच और सतर्कता से पुलिस किसी भी सच्चाई तक पहुंच सकती है।
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