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गांव की चौपाल पर उतरा प्रशासन: महलोई में ग्रामीण सचिवालय का शुभारंभ, अब ‘दर-दर भटकने’ से मिलेगी राहत

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com

तमनार/रायगढ़। शासन की योजनाएं अक्सर कागजों और दफ्तरों के बीच उलझकर रह जाती हैं, लेकिन जब प्रशासन खुद गांव की चौखट पर पहुंचे तो तस्वीर बदलती दिखती है। ऐसा ही नजारा सोमवार को तमनार विकासखंड के ग्राम पंचायत महलोई में देखने को मिला, जहां ‘सुघर छत्तीसगढ़ अभियान’ के तहत ग्रामीण सचिवालय का भव्य शुभारंभ किया गया। इस पहल ने न सिर्फ प्रशासनिक व्यवस्था को गांव तक पहुंचाने की दिशा में एक मजबूत कदम बढ़ाया है, बल्कि ग्रामीणों के लिए शासकीय सेवाओं को सुलभ और त्वरित बनाने की उम्मीद भी जगाई है।

ग्रामीण सचिवालय की शुरुआत के साथ ही महलोई और आसपास के गांवों के लोगों को अब छोटी-छोटी शासकीय जरूरतों के लिए तमनार ब्लॉक मुख्यालय या रायगढ़ जिला मुख्यालय की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र से लेकर राशन कार्ड, पेंशन, प्रधानमंत्री आवास योजना और मनरेगा से जुड़े कार्यों के लिए अब गांव में ही मार्गदर्शन और समाधान उपलब्ध होगा।

कार्यक्रम में जिला पंचायत उपाध्यक्ष दीपक सिदार, जिला पंचायत सदस्य रमेश बेहरा और ग्राम पंचायत महलोई की सरपंच गौरी राठिया सहित कई जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति रही। प्रशासनिक अमले से एसडीएम प्रवीण तिवारी, जिला पंचायत के अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं उपसंचालक पंचायत एवं समाज कल्याण विभाग नीलाराम पटेल, जनपद पंचायत तमनार के सीईओ धर्मेन्द्र बैस, तहसीलदार शिवम पाण्डेय और नायब तहसीलदार पंकज मिश्रा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।

सिर्फ औपचारिक शुभारंभ तक सीमित न रहकर इस कार्यक्रम ने मौके पर ही अपनी उपयोगिता भी साबित की। पंचायत सचिव, पटवारी, कृषि विस्तार अधिकारी और राजस्व अमले ने ग्रामीणों से सीधे आवेदन लिए और कई मामलों का तत्काल निराकरण भी किया। इससे ग्रामीणों को यह भरोसा मिला कि अब उनकी समस्याएं फाइलों में दबकर नहीं रहेंगी, बल्कि मौके पर ही सुनी और सुलझाई जाएंगी।

अधिकारियों ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि ग्रामीण सचिवालय का मकसद शासन और जनता के बीच की दूरी को कम करना है। ‘शासन आपके द्वार’ की अवधारणा को जमीन पर उतारते हुए यह पहल समय, श्रम और धन—तीनों की बचत सुनिश्चित करेगी। साथ ही, पारदर्शिता और जवाबदेही भी बढ़ेगी, जो सुशासन की मूल कसौटी है।

कार्यक्रम के दौरान जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की एक साथ मौजूदगी ने गांव के माहौल को अलग ही रंग दिया। आसपास की पंचायतों के सरपंच और जनपद सदस्य भी बड़ी संख्या में पहुंचे, जिससे यह आयोजन केवल एक गांव तक सीमित न रहकर क्षेत्रीय सहभागिता का उदाहरण बन गया।

ग्रामीणों में इस पहल को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला। वर्षों से दफ्तरों के चक्कर काटने की मजबूरी झेल रहे लोगों ने इसे राहत की शुरुआत बताया। कई ग्रामीणों ने खुलकर कहा कि अगर इसी तरह नियमित रूप से सचिवालय संचालित हुआ तो उनकी आधी परेशानियां यहीं खत्म हो जाएंगी।

कार्यक्रम के अंत में अधिकारियों ने ग्रामीणों से अपील की कि वे निर्धारित दिनों में अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर इस सुविधा का लाभ उठाएं। साथ ही, जनप्रतिनिधियों ने भी लोगों को योजनाओं के प्रति जागरूक रहने और समय पर आवेदन करने के लिए प्रेरित किया।

महालोई में ग्रामीण सचिवालय की यह शुरुआत केवल एक प्रशासनिक कदम भर नहीं, बल्कि गांव के स्तर पर सुशासन की नई परिभाषा गढ़ने की कोशिश है—जहां फाइलें नहीं, फैसले चलते हैं और दफ्तर नहीं, व्यवस्था खुद जनता तक पहुंचती है।

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Amar Chouhan

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