पेलमा परियोजना के विस्थापितों के पुनर्वास पर प्रशासन सख्त, गांव की सहमति से तय होगा नया ठिकाना

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com
9 गांवों के प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की समीक्षा; रोजगार में ‘डिसेंडिंग ऑर्डर’ और ‘क्लबिंग’ व्यवस्था की होगी पड़ताल, कम सर्किल रेट वाले गांवों को अतिरिक्त लाभ देने पर जोर

रायगढ़, 7 अगस्त 2026।
एसईसीएल की पेलमा ओपन कास्ट परियोजना के लिए जमीन गंवाने वाले परिवारों के पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन को लेकर प्रशासन ने अब प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और प्रभावित परिवारों के हितों के अनुरूप आगे बढ़ाने की कवायद शुरू कर दी है। शुक्रवार को कलेक्टोरेट के सृजन सभाकक्ष में जिला स्तरीय पुनर्वास एवं पुनर्व्यवस्थापन समिति की बैठक में परियोजना से प्रभावित परिवारों को मिलने वाले पुनर्वास लाभ, नए पुनर्व्यवस्थापन स्थल, रोजगार और सुविधाओं को लेकर विस्तार से मंथन हुआ।
बैठक में अपर कलेक्टर श्री रवि राही, एसडीएम श्री प्रवीण तिवारी, एसईसीएल के अधिकारी, जिला स्तरीय पुनर्वास एवं पुनर्व्यवस्थापन समिति के सदस्यगण तथा संबंधित ग्राम पंचायत के ग्रामीण जन उपस्थित रहे।
कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि भूमि अर्जन के बाद प्रभावित परिवारों के पुनर्वास को केवल मुआवजे या जमीन के बदले जमीन तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उनके सामाजिक और आर्थिक हितों को भी ध्यान में रखा जाए। उन्होंने संबंधित विभागों को लागू कानूनों और शासन की नीतियों के तहत पात्र परिवारों को मिलने वाले सभी लाभ सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
नौ गांवों के प्रभावित परिवारों पर केंद्रित रही बैठक
पेलमा ओपन कास्ट परियोजना के लिए भूमि अर्जन से प्रभावित पेलमा, उरबा, लालपुर, मड़वाडूमर, सकता, मिलूपारा, खर्रा, हिन्झर और जरहिडीह समेत नौ गांवों के परिवारों से जुड़े मामलों की बैठक में समीक्षा की गई।
समिति ने प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन की वर्तमान स्थिति के साथ-साथ उन्हें उपलब्ध कराए जाने वाले आवास, रोजगार, पुनर्वास लाभ और दूसरी जरूरी सुविधाओं के संबंध में अधिकारियों तथा एसईसीएल के प्रतिनिधियों से जानकारी ली।
बैठक में अपर कलेक्टर रवि राही, एसडीएम प्रवीण तिवारी, एसईसीएल के अधिकारी, जिला स्तरीय पुनर्वास एवं पुनर्व्यवस्थापन समिति के सदस्य तथा संबंधित ग्राम पंचायतों के ग्रामीण प्रतिनिधि मौजूद रहे।
सरकारी जमीन की तलाश, ग्रामीणों की राय से तय होगा पुनर्व्यवस्थापन स्थल
पुनर्व्यवस्थापन स्थल का चयन बैठक का एक महत्वपूर्ण मुद्दा रहा। कलेक्टर ने जिले में उपलब्ध शासकीय भूमि का चिन्हांकन करने के निर्देश दिए, ताकि प्रभावित परिवारों के लिए उपयुक्त स्थान तलाशा जा सके।
हालांकि प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल सरकारी जमीन उपलब्ध होना ही पर्याप्त आधार नहीं होगा। पुनर्व्यवस्थापन स्थल तय करते समय संबंधित गांव के लोगों की राय और सहमति को भी महत्व दिया जाएगा।
इसका उद्देश्य यह है कि विस्थापित परिवारों को ऐसा स्थान मिले जहां उनके लिए आवागमन, आजीविका, सामाजिक जुड़ाव और अन्य मूलभूत सुविधाएं सहज रूप से उपलब्ध हो सकें।
रोजगार के अधिकार पर भी मंथन
परियोजना प्रभावित परिवारों के लिए रोजगार का मुद्दा भी बैठक में प्रमुखता से उठा। रोजगार उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को लेकर कोल इंडिया लिमिटेड की पुनर्वास एवं पुनर्व्यवस्थापन नीति में अपनाई जाने वाली व्यवस्थाओं पर चर्चा की गई।
कलेक्टर ने अधिकारियों को ‘डिसेंडिंग ऑर्डर कॉन्सेप्ट’ और ‘क्लबिंग कॉन्सेप्ट’ का तुलनात्मक परीक्षण करने को कहा है। दोनों व्यवस्थाओं के प्रभाव और संभावित लाभों का परीक्षण करने के बाद यह देखा जाएगा कि प्रभावित परिवारों के हित में कौन-सी व्यवस्था अधिक उपयोगी हो सकती है।
प्रशासन का जोर इस बात पर है कि रोजगार से संबंधित प्रक्रिया केवल औपचारिकता न बने, बल्कि वास्तविक रूप से परियोजना प्रभावित परिवारों को उसका लाभ मिल सके।
हिन्झर और जरहिडीह में कम सर्किल रेट बना चिंता का विषय
बैठक में हिन्झर और जरहिडीह गांवों की स्थिति पर विशेष चर्चा हुई। इन गांवों में भूमि का सर्किल रेट अपेक्षाकृत कम होने का मुद्दा सामने आया।
कलेक्टर ने एसईसीएल प्रतिनिधियों से कहा कि कम सर्किल रेट के कारण प्रभावित परिवारों के हितों पर प्रतिकूल असर पड़ने की स्थिति में उन्हें अतिरिक्त पुनर्वास एवं पुनर्व्यवस्थापन लाभ देने की दिशा में पहल की जाए।
इससे संकेत साफ है कि प्रशासन अब पुनर्वास को केवल निर्धारित मुआवजा राशि तक सीमित रखने के बजाय प्रभावित परिवारों की वास्तविक सामाजिक-आर्थिक स्थिति को भी चर्चा के केंद्र में रखना चाहता है।
जमीन जाने के बाद जीवन की नई शुरुआत भी जरूरी
पेलमा परियोजना से जुड़े गांवों में भूमि अर्जन के साथ प्रभावित परिवारों के सामने सिर्फ जमीन का सवाल नहीं है। उनके सामने घर, रोजगार, सामाजिक संबंध, आजीविका और भविष्य की सुरक्षा जैसे कई सवाल भी जुड़े हैं।
बैठक में प्रशासन की ओर से इसी व्यापक दृष्टिकोण के साथ पुनर्वास प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया। अब शासकीय भूमि के चिन्हांकन, पुनर्व्यवस्थापन स्थल के चयन, रोजगार व्यवस्था और अतिरिक्त पुनर्वास लाभ जैसे मुद्दों पर आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।
प्रशासन के निर्देशों के बाद अब यह देखना अहम होगा कि पेलमा परियोजना से प्रभावित परिवारों के लिए पुनर्वास की यह प्रक्रिया कागजी कार्रवाई से आगे बढ़कर जमीन पर कितनी प्रभावी तरीके से लागू होती है।
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