धरमजयगढ़ में ‘सूखी’ दुकानों के बीच काला खेल: स्टॉक खत्म, बाहर महंगी बीयर की खुली बिक्री पर उठे सवाल

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
धरमजयगढ़ क्षेत्र में इन दिनों शराब की आपूर्ति को लेकर एक अजीब विरोधाभास सामने आ रहा है। एक ओर शासकीय शराब दुकानों में बीयर का स्टॉक खत्म होने की बात कही जा रही है, वहीं दूसरी ओर वही उत्पाद शहर के ढाबों और कुछ चुनिंदा ठिकानों पर ऊंचे दामों में आसानी से उपलब्ध बताया जा रहा है। इस स्थिति ने न केवल उपभोक्ताओं को असमंजस में डाला है, बल्कि आबकारी व्यवस्था की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, कुछ ही दिन पहले दुकानों में बड़ी मात्रा में बीयर की खपत दर्ज की गई थी। इसके बाद अचानक स्टॉक समाप्त होने की सूचना दी गई। लेकिन इसी दौरान शहर के अलग-अलग हिस्सों—खासकर हाईवे किनारे ढाबों और गैर-लाइसेंसी स्थानों—पर बीयर 500 से 600 रुपये तक में बेचे जाने की खबरें सामने आई हैं। यह कीमत सामान्य दरों से कहीं अधिक बताई जा रही है।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि इस पूरे घटनाक्रम में अवैध आपूर्ति श्रृंखला सक्रिय हो गई है। कथित तौर पर कुछ लोग स्टॉक खत्म होने की स्थिति का फायदा उठाकर बाहर से शराब लाकर ऊंचे दामों में बेच रहे हैं। इससे जहां एक ओर नियमों का उल्लंघन हो रहा है, वहीं दूसरी ओर आम उपभोक्ता आर्थिक रूप से प्रभावित हो रहा है।
हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हो सकी है। आबकारी विभाग की ओर से भी इस मामले पर कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। यही चुप्पी अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई है। कई नागरिकों का मानना है कि यदि दुकानों में वास्तव में स्टॉक समाप्त है, तो बाजार में समान उत्पाद की उपलब्धता की जांच होना जरूरी है।
इस पूरे मामले में तीन बड़े सवाल उभरकर सामने आ रहे हैं—
क्या सरकारी दुकानों से बाहर अवैध रूप से शराब की सप्लाई हो रही है?
क्या इस गतिविधि पर निगरानी तंत्र कमजोर पड़ गया है?
और सबसे अहम, क्या जिम्मेदार विभाग इस स्थिति से अनभिज्ञ है या फिर कार्रवाई में देरी हो रही है?
क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि कोई अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित व्यक्तियों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही, शासकीय दुकानों में नियमित आपूर्ति बनाए रखने और अवैध बिक्री पर रोक लगाने के लिए ठोस कदम उठाने की भी जरूरत जताई जा रही है।
फिलहाल, धरमजयगढ़ में यह मुद्दा केवल शराब की उपलब्धता का नहीं, बल्कि व्यवस्था की जवाबदेही का बनता जा रहा है। अब नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन इस मामले को किस गंभीरता से लेता है और जमीनी स्तर पर क्या कार्रवाई सामने आती है।
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