छत्तीसगढ़ में ‘एनालॉग पनीर’ पर शिकंजा: सेहत से खिलवाड़ पर सरकार सख्त, जल्द जारी होगा प्रतिबंध आदेश

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com
रायपुर। छत्तीसगढ़ में मिलावटी खाद्य पदार्थों के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच राज्य सरकार ने अब ‘एनालॉग पनीर’ पर सख्ती दिखाने का फैसला लिया है। स्वास्थ्य मंत्री ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि उपभोक्ताओं की सेहत से समझौता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसी क्रम में राज्य में बड़े पैमाने पर बिक रहे नकली या मिलावटी पनीर पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी अंतिम चरण में है।
सरकार के मुताबिक, बाजार से लगातार ऐसी शिकायतें मिल रही थीं कि कई जगहों पर पनीर के नाम पर ऐसा उत्पाद बेचा जा रहा है, जो दूध से नहीं बल्कि वनस्पति तेल, स्टार्च और रासायनिक तत्वों के मिश्रण से तैयार किया जाता है। जांच में इन शिकायतों की पुष्टि होने के बाद खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) को सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।
जांच में खुलासा, बाजार में ‘फर्जी पनीर’ की भरमार
सूत्रों के अनुसार, हाल के निरीक्षणों में कई होटल, रेस्टोरेंट और डेयरी प्रतिष्ठानों में ऐसा पनीर मिला, जो देखने और स्वाद में तो असली जैसा है, लेकिन उसकी संरचना पूरी तरह अलग है। कई मामलों में इसे बिना उचित लेबलिंग के ‘शुद्ध पनीर’ बताकर बेचा जा रहा था, जो सीधे तौर पर उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है।
जल्द जारी होगा आदेश, राज्यभर में चलेगा अभियान
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, एनालॉग पनीर पर रोक लगाने का औपचारिक आदेश जल्द ही जारी किया जाएगा। आदेश लागू होते ही राज्यभर में विशेष जांच अभियान शुरू होगा। एफडीए की टीमें बाजार, मिठाई दुकानों, होटलों और रेस्टोरेंट्स में सैंपलिंग करेंगी और संदिग्ध उत्पादों को प्रयोगशालाओं में जांच के लिए भेजा जाएगा।
यदि किसी भी प्रतिष्ठान में प्रतिबंधित या गलत लेबलिंग वाला पनीर पाया गया, तो संबंधित संचालकों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
उपभोक्ताओं को भी सतर्क रहने की सलाह
सरकार ने आम लोगों से भी सतर्क रहने की अपील की है। पनीर खरीदते समय उसकी गुणवत्ता, स्रोत और पैकेजिंग की जानकारी जरूर जांचें। यदि कहीं संदिग्ध पनीर बिकता दिखे तो इसकी सूचना संबंधित विभाग को देने को कहा गया है।
क्या होता है ‘एनालॉग पनीर’?
एनालॉग पनीर वह उत्पाद है, जो दिखने और स्वाद में पारंपरिक पनीर जैसा होता है, लेकिन इसे दूध से नहीं बनाया जाता। इसमें वनस्पति वसा, स्टार्च और अन्य रासायनिक घटकों का इस्तेमाल होता है। नियमों के तहत यदि इसे सही लेबलिंग के साथ बेचा जाए तो यह वैध हो सकता है, लेकिन इसे असली पनीर बताकर बेचना धोखाधड़ी की श्रेणी में आता है।
सरकार का स्पष्ट संदेश
राज्य सरकार का कहना है कि यह कार्रवाई व्यापारियों को परेशान करने के लिए नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए की जा रही है। आने वाले दिनों में खाद्य सुरक्षा मानकों के उल्लंघन पर और भी सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।
इस फैसले के बाद यह साफ हो गया है कि छत्तीसगढ़ में अब खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता से समझौता करने वालों के लिए जगह नहीं बचेगी।
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