आदिवासी अंचलों में शिक्षा का विस्तार: डीएमएफ से पाँच नए छात्रावास-आश्रम भवनों की मंजूरी, इन इलाकों में होगा निर्माण
Journalist Amardeep chauhan
http://amarkhabar.com
रायगढ़, 16 जून।
खनिज संपदा से समृद्ध रायगढ़ जिले में अब विकास की दिशा आदिवासी अंचलों की ओर और अधिक स्पष्ट होती दिख रही है। जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) के तहत 7 करोड़ 84 लाख रुपए से अधिक की लागत से पाँच नए छात्रावास एवं आश्रम भवनों के निर्माण को प्रशासनिक स्वीकृति मिल गई है। यह पहल विशेष रूप से उन दूरस्थ क्षेत्रों पर केंद्रित है, जहां अब तक शिक्षा के लिए बुनियादी आवासीय सुविधाओं का अभाव रहा है।
कहाँ-कहाँ बनेंगे नए भवन
स्वीकृत प्रस्ताव के अनुसार निर्माण कार्य जिले के चार विकासखंडों में फैले आदिवासी बहुल इलाकों में किए जाएंगे—
– लैलूंगा विकासखंड के बगुडेगा में प्री-मैट्रिक आदिवासी बालक छात्रावास का नया भवन बनाया जाएगा।
– इसी विकासखंड के केशला में भी प्री-मैट्रिक आदिवासी बालक छात्रावास का निर्माण प्रस्तावित है।
– घरघोड़ा विकासखंड के नवापारा टेंडा (क्रमांक-02) में आदिवासी बालक छात्रावास का नया भवन खड़ा किया जाएगा।
– खरसिया विकासखंड के बड़े डूमरपाली में आदिवासी कन्या आश्रम भवन का निर्माण होगा।
– तमनार विकासखंड के गोढ़ी में भी आदिवासी कन्या आश्रम भवन स्वीकृत किया गया है।
इन सभी परियोजनाओं की लागत लगभग 1.5 से 1.6 करोड़ रुपए प्रति भवन निर्धारित की गई है, जो डीएमएफ निधि से वहन की जाएगी।
दूरस्थ विद्यार्थियों को मिलेगा ठोस सहारा
इन निर्माण कार्यों का सीधा लाभ उन छात्र-छात्राओं को मिलेगा, जो वनांचल और खनन प्रभावित क्षेत्रों से आते हैं और बेहतर शिक्षा के लिए अक्सर लंबी दूरी तय करने को मजबूर होते हैं। आवासीय सुविधा मिलने से न केवल उनका स्कूलों में नामांकन बढ़ेगा, बल्कि पढ़ाई में निरंतरता भी सुनिश्चित हो सकेगी।
कार्यान्वयन और निगरानी की रूपरेखा
सभी परियोजनाओं के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी आदिवासी विकास विभाग को सौंपी गई है। निर्माण कार्य निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप एक वर्ष के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। जिला प्रशासन ने इसके लिए नियमित मॉनिटरिंग और समीक्षा तंत्र भी तय किया है, ताकि समयसीमा और पारदर्शिता दोनों सुनिश्चित रह सकें।
विकास का बदला हुआ फोकस
पिछले कुछ वर्षों में डीएमएफ निधि का उपयोग सड़क, स्वास्थ्य और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं में किया जाता रहा है, लेकिन अब शिक्षा के बुनियादी ढांचे पर जोर बढ़ता दिख रहा है। यह बदलाव संकेत देता है कि खनन से प्रभावित क्षेत्रों में केवल भौतिक विकास ही नहीं, बल्कि सामाजिक और शैक्षणिक सशक्तिकरण को भी प्राथमिकता दी जा रही है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि इन परियोजनाओं का क्रियान्वयन तय समयसीमा में गुणवत्ता के साथ हो जाता है, तो यह पहल आदिवासी अंचलों में शिक्षा की तस्वीर बदलने की दिशा में निर्णायक साबित हो सकती है।
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