कस्टोडियल डेथ पर उठे सवालों के बीच पुलिस का पक्ष सामने: सीसीटीवी फुटेज के हवाले से ‘मानवीय व्यवहार’ का दावा

Journalist Amardeep chauhan
http://amarkhabar.com
रायगढ़, 16 जून।
थाना कोतरारोड में आबकारी प्रकरण में गिरफ्तार किए गए बंदी संजय बघेल की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मृत्यु के मामले ने तूल पकड़ लिया है। परिजनों द्वारा लगाए गए मारपीट और अवैध वसूली के आरोपों के बीच अब जिला पुलिस ने उपलब्ध साक्ष्यों और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर अपना पक्ष सार्वजनिक किया है।
पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने मंगलवार को आयोजित प्रेस वार्ता में थाना परिसर के सीसीटीवी फुटेज मीडिया के सामने साझा करते हुए दावा किया कि गिरफ्तारी से लेकर जेल भेजे जाने तक पूरे घटनाक्रम में पुलिस द्वारा आरोपित के साथ सामान्य और मानवीय व्यवहार किया गया। उन्होंने कहा कि डिजिटल साक्ष्य घटनाओं की पारदर्शिता स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
पुलिस के अनुसार, 10 जून की सुबह मुखबिर की सूचना पर अरसीपाली चौक के पास एक व्यक्ति को अवैध महुआ शराब के साथ पकड़ा गया, जिसकी पहचान संजय बघेल (32) निवासी नवापारा के रूप में हुई। उसके पास से करीब 30 लीटर कच्ची शराब बरामद कर दोपहर 12:43 बजे थाना लाया गया।
थाना परिसर में उसे बंदीगृह के बाहर बैठाया गया और परिजनों को सूचना दी गई। पुलिस का कहना है कि दोपहर 2:15 बजे विधिवत गिरफ्तारी दर्ज की गई, जिसकी जानकारी उसके भाई को दी गई। सीसीटीवी फुटेज में आरोपित को सामान्य अवस्था में बैठे, पानी पीते और भोजन करते हुए दिखाया गया है।
पुलिस का यह भी दावा है कि परिजनों की मौजूदगी में आरोपित ने उनसे बातचीत की और किसी प्रकार की प्रताड़ना का संकेत नहीं मिला। शाम 4:35 बजे उसे चिकित्सीय परीक्षण के लिए ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे सामान्य रूप से स्वस्थ बताया। मेडिकल रिपोर्ट में किसी गंभीर चोट या शारीरिक शिकायत का उल्लेख नहीं किया गया है।
इसके बाद शाम लगभग 6:30 बजे पुलिस बल आरोपित को न्यायालयीन प्रक्रिया के तहत जेल दाखिल कराने ले गया। इस दौरान उसका एक परिजन भी मौजूद था, जिसने उसे ढांढस बंधाया।
हालांकि, मृतक के परिजनों ने पुलिस पर मारपीट और अवैध रूप से पैसे लेने के गंभीर आरोप लगाए हैं। इन आरोपों को गंभीरता से लेते हुए पुलिस अधीक्षक ने मामले के जांचकर्ता प्रधान आरक्षक और एक आरक्षक को तत्काल प्रभाव से लाइन अटैच कर दिया है तथा डीएसपी स्तर के अधिकारी को स्वतंत्र जांच सौंपी गई है।
इधर, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृत्यु का स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि शरीर पर पाई गई चोटें मृत्यु का प्रत्यक्ष कारण नहीं हैं। अंतिम निष्कर्ष के लिए विसरा परीक्षण और हिस्टोपैथोलॉजिकल जांच की प्रतीक्षा की जा रही है।
मामले की न्यायिक जांच जारी है, जो पूरे घटनाक्रम पर अंतिम स्थिति स्पष्ट करेगी। पुलिस प्रशासन ने कहा है कि वह जांच में पूर्ण सहयोग करेगा और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
इस प्रकरण ने एक बार फिर पुलिस अभिरक्षा में होने वाली घटनाओं की पारदर्शिता और जवाबदेही पर बहस को तेज कर दिया है, जहां एक ओर पुलिस डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर खुद को निर्दोष बता रही है, वहीं परिजन न्यायिक जांच से निष्पक्ष निष्कर्ष की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
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