अस्पताल में ‘एक्शन मोड’ में सालिक साय: औचक निरीक्षण से हिली व्यवस्था, बोले—इलाज में नहीं चलेगी लापरवाही

जशपुरनगर। जिला अस्पताल की दिनचर्या सोमवार को उस समय अचानक बदल गई, जब जिला पंचायत अध्यक्ष बिना किसी पूर्व सूचना के सीधे अस्पताल परिसर में पहुंच गए। यह महज एक औपचारिक निरीक्षण नहीं था, बल्कि व्यवस्थाओं की जमीनी हकीकत को परखने का प्रयास था—जहां कागजों के दावों से अलग, मरीजों की आवाज को केंद्र में रखा गया।
अस्पताल के वार्डों में पहुंचकर सालिक साय ने सीधे मरीजों और उनके परिजनों से बातचीत की। उन्होंने न सिर्फ इलाज की स्थिति जानी, बल्कि यह भी समझने की कोशिश की कि सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तव में लोगों तक पहुंच रहा है या नहीं। कई मरीजों ने उपचार व्यवस्था पर संतोष जताया, वहीं कुछ ने छोटी-छोटी परेशानियों की ओर भी ध्यान दिलाया—जिसे साय ने मौके पर ही अधिकारियों को नोट कराते हुए तत्काल सुधार के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी और सिविल सर्जन से विस्तृत चर्चा करते हुए साय ने स्पष्ट कहा कि अस्पताल में आने वाला हर व्यक्ति केवल मरीज नहीं, बल्कि शासन की जिम्मेदारी है। “इलाज में देरी, जांच में लापरवाही या व्यवहार में कठोरता—इनमें से किसी के लिए भी कोई जगह नहीं होनी चाहिए,” उन्होंने दो टूक कहा।

स्वच्छता से संवेदनशीलता तक—हर स्तर पर सख्ती
सालिक साय ने अस्पताल परिसर की साफ-सफाई, पेयजल और बुनियादी सुविधाओं पर विशेष जोर देते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवा केवल दवाइयों तक सीमित नहीं होती, बल्कि वातावरण और व्यवहार भी इलाज का हिस्सा है। उन्होंने स्वास्थ्यकर्मियों को मरीजों के प्रति संवेदनशीलता के साथ कार्य करने की नसीहत दी।
नीतियों से जमीन तक—कार्यान्वयन पर फोकस
उन्होंने प्रदेश सरकार की योजनाओं—आयुष्मान भारत, मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना, हाट-बाजार क्लिनिक और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन—का जिक्र करते हुए कहा कि इनका उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब लाभार्थी को बिना भटकाव के सीधा फायदा मिले। “योजनाएं फाइलों में नहीं, मरीज के बिस्तर तक दिखनी चाहिए,” यह कहते हुए उन्होंने अधिकारियों को समन्वय मजबूत करने के निर्देश दिए।
वनांचल में स्वास्थ्य ढांचे को मजबूती
सालिक साय ने के नेतृत्व में वनांचल क्षेत्रों में स्वास्थ्य अधोसंरचना को मजबूत करने के प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि जशपुर जैसे दूरस्थ इलाकों में सुविधाओं का विस्तार प्राथमिकता में है। बगीचा में हाल ही में शुरू हुए 30 बिस्तरीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि विशेषज्ञ सेवाएं अब ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच रही हैं।
संकेत साफ—मैदान में सक्रियता ही असली कसौटी
इस औचक निरीक्षण ने यह स्पष्ट कर दिया कि अब केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि जमीन पर दिखने वाले परिणाम ही नेतृत्व की असली पहचान होंगे। अस्पताल की चौखट पर पहुंचकर व्यवस्थाओं की पड़ताल करना यह संकेत देता है कि जनप्रतिनिधि सीधे फीडबैक लेने के मूड में हैं—और यह सिलसिला आगे भी जारी रह सकता है।

निरीक्षण के दौरान नगर पालिका अध्यक्ष , संतोष गुप्ता, रवि मिश्रा एवं भाजयुमो के भूषण वैष्णव सहित अन्य मौजूद रहे।
(विशेष टिप्पणी)
जशपुर के इस दौरे ने स्थानीय स्तर पर एक स्पष्ट संदेश छोड़ा है—स्वास्थ्य सेवाओं पर निगरानी अब केवल कागजी प्रक्रिया नहीं, बल्कि जमीनी जवाबदेही का हिस्सा बनती जा रही है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि यह सक्रियता स्थायी सुधार में कितनी बदलती है।
अन्य अधिक खबरों के लिए स्क्रॉल डाउन करें 👇⬇️
