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कॉल सेंटर से देशभर में साइबर ठगी का नेटवर्क! रायगढ़ पुलिस ने 3 युवतियों समेत 5 को पकड़ा

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शेयर ट्रेडिंग में भारी मुनाफे का झांसा देकर रायगढ़ के डॉक्टर से ऐंठे ₹34.17 लाख; म्यूल बैंक खातों और सिम कार्ड के जरिए रकम के लेनदेन की जांच, दूसरे राज्यों तक फैले नेटवर्क की तलाश

रायगढ़। शेयर बाजार में मोटा मुनाफा कमाने की उम्मीद एक डॉक्टर को इतनी महंगी पड़ी कि उन्हें ₹34.17 लाख गंवाने पड़े। निवेश के नाम पर हुई इस ऑनलाइन ठगी की जांच करते हुए रायगढ़ पुलिस मध्यप्रदेश के इंदौर स्थित एक कॉल सेंटर तक पहुंची। पुलिस की कार्रवाई में तीन युवतियों और दो युवकों समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है। जांच में कथित तौर पर म्यूल बैंक खातों, मोबाइल सिम कार्ड और कमीशन के जरिए साइबर ठगी की रकम के लेनदेन से जुड़े तथ्य सामने आए हैं।

रायगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के निर्देशन तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनिल सोनी और पुष्पेन्द्र बघेल के मार्गदर्शन में साइबर पुलिस थाना की टीम ने यह कार्रवाई की। पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों से जुड़े तथ्यों के आधार पर थाना में दर्ज दो मामलों की कड़ियां जुड़ी हैं। इनमें एक मामला शेयर ट्रेडिंग में निवेश के नाम पर डॉक्टर से लाखों रुपये की ठगी का है, जबकि दूसरा बैंक खाते के कथित इस्तेमाल और कमीशन के जरिए रकम प्राप्त करने से संबंधित है।

पुलिस अब इस बात की पड़ताल कर रही है कि ठगी से हासिल रकम किन-किन बैंक खातों में पहुंची, इसमें और कौन लोग शामिल थे तथा इंदौर में सामने आए नेटवर्क के तार दूसरे राज्यों से किस तरह जुड़े हुए हैं।

शेयर ट्रेडिंग का लालच, पोर्टफोलियो में दिखता रहा मुनाफा

इस पूरे मामले की शुरुआत रायगढ़ के सोनकरपारा निवासी डॉ. दिलीप कुमार मिश्रा की शिकायत से हुई। जूटमिल थाना क्षेत्र के निवासी डॉक्टर ने 27 मई 2026 को साइबर पुलिस थाना में शिकायत दर्ज कराई थी। उनके मुताबिक, मार्च 2025 में मोबाइल फोन के जरिए उनका संपर्क सुनील नाम के व्यक्ति से हुआ था।

आरोप है कि उस व्यक्ति ने शेयर ट्रेडिंग में निवेश करने पर अच्छा मुनाफा मिलने का भरोसा दिलाया और उन्हें स्पार्टन ट्रेड कंपनी में पैसा लगाने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद व्हाट्सऐप पर कंपनी का पोर्टफोलियो भेजा गया। पोर्टफोलियो में निवेश पर लाभ बढ़ता हुआ दिखाई देने से डॉक्टर को रकम सुरक्षित होने और अच्छा रिटर्न मिलने का विश्वास हो गया।

इसी दौरान कुछ अन्य लोगों ने भी उनसे फोन पर संपर्क किया और अलग-अलग समय पर निवेश कराया। पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार, 28 अप्रैल 2025 से 3 अप्रैल 2026 के बीच डॉक्टर से कुल ₹34,17,531 निवेश कराए गए।

शुरुआत में खाते या पोर्टफोलियो में बढ़ता मुनाफा दिखाई देता रहा, लेकिन जब डॉक्टर ने अपनी रकम निकालने की कोशिश की तो पैसा वापस नहीं मिला। आरोप है कि रकम निकालने के बजाय उनसे और निवेश करने के लिए कहा जाने लगा। इसके बाद उन्हें ठगी का संदेह हुआ और उन्होंने पुलिस की शरण ली।

शिकायत के आधार पर साइबर पुलिस थाना रायगढ़ में अपराध क्रमांक 06/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) और 3(5) में मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की गई।

बैंक खाते में आए करीब तीन लाख रुपये, दूसरे राज्यों में शिकायत के बाद खाता फ्रीज

पुलिस की जांच में सामने आया दूसरा मामला बैंक खाते के कथित दुरुपयोग से जुड़ा है। रायगढ़ के पतरापाली स्थित हिल व्यू कॉलोनी निवासी सूरज शर्मा ने 27 सितंबर 2026 को साइबर पुलिस थाना में आवेदन दिया था।

आवेदन के अनुसार, उनके पंजाब नेशनल बैंक खाते में 12 दिसंबर 2025 से 7 जनवरी 2026 के बीच 18 बार में कुल ₹2,97,298 का लेनदेन हुआ था। रकम प्राप्त होने और नकद निकासी के बाद महाराष्ट्र, कर्नाटक और पंजाब में शिकायतें दर्ज होने की जानकारी सामने आई, जिसके बाद बैंक खाते पर रोक लगा दी गई।

सूरज शर्मा ने खाते के साइबर ठगी में इस्तेमाल होने और उसे फ्रीज किए जाने के संबंध में पुलिस से जांच का अनुरोध किया था। उन्होंने बैंक लेनदेन का विवरण भी उपलब्ध कराया।

जांच के दौरान पुलिस को ऐसे तथ्य मिले, जिनके आधार पर खाते को कथित तौर पर साइबर ठगी की रकम के लेनदेन के लिए इस्तेमाल किए जाने की आशंका सामने आई। पुलिस के मुताबिक, बैंक ट्रांजेक्शन की जांच में इंदौर की गायत्री विश्वकर्मा के माध्यम से सूरज शर्मा को नकद और यूपीआई के जरिए कमीशन मिलने के तथ्य सामने आए।

इसके बाद 30 सितंबर 2026 को अपराध क्रमांक 13/2026 के तहत सूरज शर्मा और गायत्री विश्वकर्मा के विरुद्ध मामला दर्ज किया गया। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि संबंधित खाते में पहुंची रकम का मूल स्रोत क्या था और उसका संबंध किन साइबर शिकायतों से है।

एक मोबाइल नंबर से खुलने लगी नेटवर्क की परतें

दोनों मामलों की विवेचना के दौरान पुलिस को एक ऐसे मोबाइल नंबर की जानकारी मिली, जिसका इस्तेमाल कथित तौर पर इंदौर की तनिषा पाटिल कर रही थी। सूरज शर्मा और गायत्री विश्वकर्मा के बीच संपर्क के तथ्यों ने भी जांच को आगे बढ़ाने में मदद की।

संदिग्ध मोबाइल नंबरों की तकनीकी जांच में उनकी सक्रियता इंदौर के अलग-अलग इलाकों में सामने आने के बाद रायगढ़ पुलिस की विशेष टीम को वहां भेजा गया। टीम ने इंदौर के पलासिया क्षेत्र स्थित एक कॉल सेंटर में दबिश दी, जहां से गायत्री विश्वकर्मा और तनिषा पाटिल को पकड़ा गया।

इसके बाद पुलिस को ज्योति मालवीय के विजय नगर क्षेत्र में होने की जानकारी मिली। टीम ने उसे भी हिरासत में लिया। पुलिस के अनुसार, ज्योति से पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर परदेशीपुरा क्षेत्र से तरुण नागर को गिरफ्तार किया गया।

पांचवें आरोपी सूरज शर्मा को भी पुलिस ने पकड़ा। वह इंदौर से खरसिया आकर अपने एक रिश्तेदार के यहां रह रहा था।

पुलिस ने सभी आरोपियों को इंदौर में न्यायालय के समक्ष पेश कर ट्रांजिट रिमांड की प्रक्रिया पूरी की और उन्हें रायगढ़ लाया। इसके बाद संबंधित मामलों में आगे की कानूनी कार्रवाई की गई।

140 से 150 सिम कार्ड उपलब्ध कराने की जानकारी

इस मामले में पुलिस की जांच का एक अहम पहलू बड़ी संख्या में मोबाइल सिम कार्ड उपलब्ध कराने से जुड़ा है। पुलिस के मुताबिक, साइबर ठगी के लिए करीब 140 से 150 सिम कार्ड उपलब्ध कराए जाने की जानकारी सामने आई है।

जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन सिम कार्डों का इस्तेमाल किन लोगों ने किया, वे किन पहचान दस्तावेजों पर जारी हुए थे और उनका संबंध कथित ठगी के नेटवर्क से किस स्तर पर था।

साइबर अपराधों में कई बार अलग-अलग व्यक्तियों के बैंक खातों और मोबाइल नंबरों के जरिए रकम प्राप्त करने तथा आगे भेजने की व्यवस्था बनाई जाती है। ऐसे खातों को सामान्य तौर पर म्यूल अकाउंट कहा जाता है। इनका इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति की भूमिका, जानकारी और कथित मंशा की जांच जरूरी होती है।

रायगढ़ पुलिस की जांच में भी बैंक खातों, मोबाइल फोन और लेनदेन से संबंधित तथ्यों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, पूरे नेटवर्क की वास्तविक संरचना और प्रत्येक आरोपी की भूमिका का अंतिम निर्धारण जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगा।

दो अपराधों में पांच गिरफ्तार, कुछ आरोपियों की भूमिका दोनों मामलों में

पुलिस ने इस कार्रवाई में ज्योति मालवीय, तनिषा पाटिल, तरुण नागर, गायत्री कुमारी विश्वकर्मा और सूरज शर्मा को गिरफ्तार किया है।

पुलिस के अनुसार, अपराध क्रमांक 06/2026 में तरुण नागर, ज्योति मालवीय और तनिषा पाटिल की भूमिका सामने आई है। वहीं, अपराध क्रमांक 13/2026 में सूरज शर्मा, गायत्री विश्वकर्मा और तनिषा पाटिल की भूमिका की जांच की जा रही है। इस तरह तनिषा पाटिल का नाम दोनों मामलों में सामने आया है।

आरोपियों के कब्जे से कथित अपराध में इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं। संबंधित बैंक खातों, लेनदेन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है।

पुलिस का कहना है कि नेटवर्क से जुड़े कुछ अन्य संदिग्धों के बारे में जानकारी मिली है। उनके संबंध में तथ्यों का सत्यापन किया जा रहा है और दूसरे राज्यों में संभावित आरोपियों की तलाश के लिए कार्रवाई जारी है।

गिरफ्तार किए गए लोगों की भूमिका और कथित साइबर ठगी में उनकी संलिप्तता से जुड़े आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के अधीन रहेगा।

एसएसपी की अपील: बैंक खाता और सिम कार्ड किसी को इस्तेमाल के लिए न दें

मामले के खुलासे के बाद एसएसपी शशि मोहन सिंह ने नागरिकों को ऑनलाइन निवेश के नाम पर दिए जाने वाले प्रलोभनों से सावधान रहने की अपील की है।

उन्होंने कहा कि साइबर अपराधी शेयर ट्रेडिंग में अत्यधिक मुनाफे का लालच देकर लोगों की मेहनत की कमाई ठग रहे हैं। नागरिकों को किसी अनजान व्यक्ति या कंपनी के भरोसे निवेश करने से पहले उसकी विश्वसनीयता की जांच करनी चाहिए।

उन्होंने यह भी आगाह किया कि अपना बैंक खाता, सिम कार्ड या पहचान से जुड़े दस्तावेज किसी दूसरे व्यक्ति को इस्तेमाल करने के लिए देना नुकसानदेह साबित हो सकता है। ऐसे मामलों में बैंकिंग लेनदेन और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

रायगढ़ पुलिस ने स्पष्ट किया है कि साइबर अपराधों से जुड़े मामलों में कार्रवाई जारी रहेगी।

गिरफ्तार आरोपियों के नाम

1. ज्योति मालवीय (20 वर्ष) — निवासी मोहनीपुरा, थाना ब्यावरा, जिला राजगढ़, मध्यप्रदेश; वर्तमान पता विजय नगर, इंदौर।
2. तनिषा पाटिल (21 वर्ष) — निवासी कृष्णबाग कॉलोनी, थाना विजय नगर, जिला इंदौर, मध्यप्रदेश।
3. तरुण नागर (23 वर्ष) — निवासी जिला राजगढ़, मध्यप्रदेश; वर्तमान पता नंदा नगर, थाना परदेशीपुरा, इंदौर।
4. गायत्री कुमारी विश्वकर्मा (21 वर्ष) — निवासी वार्ड क्रमांक 05, शौकी नगर, किरोड़ीमल नगर, थाना कोतरारोड, रायगढ़; वर्तमान पता विजय नगर, इंदौर।
5. सूरज शर्मा (21 वर्ष) — निवासी एस-55, हिल व्यू कॉलोनी, पतरापाली, थाना कोतरारोड, रायगढ़।

कार्रवाई में इनकी रही भूमिका

पुलिस के अनुसार, मामले की विवेचना साइबर थाना प्रभारी निरीक्षक विजय चेलक के नेतृत्व में निरीक्षक विमल राय और एएसआई नंद कुमार सारथी कर रहे हैं। कार्रवाई में आरक्षक महेश पंडा, पुष्पेन्द्र जाटवर, प्रशांत पंडा, जितेन्द्र कुर्रे, रविन्द्र गुप्ता, धर्मेन्द्र सिंह, विकास प्रधान तथा महिला आरक्षक लता नारंगे और यशोमति की भी अहम भूमिका रही।

फिलहाल पुलिस की जांच का दायरा इंदौर में सामने आए कॉल सेंटर से आगे बढ़कर बैंक खातों, मोबाइल सिम कार्ड और दूसरे राज्यों में दर्ज साइबर शिकायतों तक पहुंच गया है। अब जांच का अहम सवाल यही है कि डॉक्टर से ठगी गई रकम किन रास्तों से आगे बढ़ी और इस पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की पहचान कब तक हो पाती है।

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Amar Chouhan

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