“एक काम, दो बिल: पंचायत में बोर खनन के नाम पर लाखों का खेल उजागर”

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com

रायगढ़ (धरमगढ़)
ग्रामीण विकास कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही की बात अक्सर कागज़ों तक सीमित रह जाती है। ऐसा ही एक मामला ग्राम पंचायत किरिया से सामने आया है, जहाँ बोर खनन सह पंप स्थापना कार्य को लेकर वित्तीय अनियमितता के गंभीर आरोप लगे हैं। आरोप है कि जिस काम को लगभग एक लाख रुपये में पूरा किया जा सकता था, उसे दो लाख रुपये की लागत दिखाकर स्वीकृत कराया गया और भुगतान की प्रक्रिया भी उसी अनुरूप तैयार की गई।
सूत्रों के अनुसार, पंचायत में बोर खनन और पंप स्थापना का कार्य स्वीकृत मद के तहत दो लाख रुपये में दर्शाया गया। जबकि जमीनी स्तर पर यह काम करीब एक लाख रुपये में ही पूरा हो गया। इसके बावजूद दस्तावेज़ों में दो अलग-अलग बिल अपलोड किए गए—एक वास्तविक कार्य व्यय से संबंधित और दूसरा कथित रूप से अतिरिक्त राशि को समायोजित करने के लिए।
मामले की पड़ताल में यह भी सामने आया है कि एजेंसी के नाम से प्रस्तुत बिलों में समान कार्य के लिए दोहरी एंट्री की गई है। यानी एक ही काम के लिए दो बिल दर्शाकर खर्च को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया। यह तरीका न केवल वित्तीय अनुशासन पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि ग्रामीण विकास योजनाओं की विश्वसनीयता को भी प्रभावित करता है।
ग्राम पंचायत के एक जिम्मेदार अधिकारी ने अनौपचारिक बातचीत में स्वीकार किया कि इस प्रकार की बजट संरचना अक्सर “ऊपर से नीचे तक” चलने वाली व्यवस्था का हिस्सा होती है, जहाँ विभिन्न स्तरों पर कमीशन की अपेक्षा के चलते वास्तविक लागत से अधिक राशि का प्रावधान किया जाता है। हालांकि, इस बयान की स्वतंत्र पुष्टि अभी शेष है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला पंचायत स्तरीय वित्तीय प्रबंधन में पारदर्शिता की कमी को उजागर करता है। ऐसे मामलों में सामाजिक अंकेक्षण (सोशल ऑडिट) और तकनीकी जांच आवश्यक हो जाती है, ताकि वास्तविकता सामने आ सके और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित हो।
फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर आधिकारिक स्तर पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज है और ग्रामीणों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि विकास कार्यों के नाम पर आखिर किस हद तक अनियमितताएं की जा रही हैं।
यदि संबंधित विभाग द्वारा निष्पक्ष जांच कराई जाती है, तो यह मामला न केवल किरिया पंचायत बल्कि अन्य पंचायतों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है, जहाँ पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना समय की मांग बन चुकी है।
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