“‘एक-एक पैसे का हिसाब दो’: विजयनगर पंचायत में सचिव के खिलाफ पंचों का बड़ा आरोप”

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com
धरमजयगढ़ (रायगढ़)।
ग्राम पंचायत विजयनगर इन दिनों गंभीर प्रशासनिक विवाद के केंद्र में है। पंचायत सचिव भूपदेव राठिया की कार्यप्रणाली को लेकर उठे सवाल अब स्थानीय असंतोष से निकलकर जिला प्रशासन की चौखट तक पहुंच चुके हैं। पंचायत के पंचों ने सामूहिक रूप से रायगढ़ पहुंचकर कलेक्टर से लिखित शिकायत की है, जिसमें सचिव पर पंचायत संचालन में मनमानी, पारदर्शिता की कमी और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी जैसे आरोप लगाए गए हैं।
निर्वाचित प्रतिनिधियों को दरकिनार करने का आरोप
शिकायत में पंचों ने स्पष्ट कहा है कि पंचायत में चुने गए जनप्रतिनिधियों को ही निर्णय प्रक्रिया से बाहर रखा जा रहा है। पंचायत कार्यालय नियमित रूप से बंद रहने और विकास कार्यों से जुड़ी जानकारी साझा नहीं करने जैसे आरोप भी लगाए गए हैं। पंचों का कहना है कि पंचायत के फैसले सीमित दायरे में लिए जा रहे हैं, जिससे लोकतांत्रिक व्यवस्था की मूल भावना प्रभावित हो रही है।
फंड खर्च पर बड़ा सवाल: ‘राशि निकली, काम कहां?’
विवाद का सबसे संवेदनशील पहलू पंचायत निधि के उपयोग को लेकर सामने आया है। शिकायत में सीसी रोड, नाली, डोढ़ी और मंच निर्माण जैसे कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि इन पर खर्च तो दिखाया गया, लेकिन जमीनी स्तर पर काम की स्थिति संदिग्ध है।
पंचों का दावा है कि इस संबंध में पहले भी मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 पर शिकायत दर्ज कराई गई थी और प्रारंभिक जांच में कुछ तथ्य सामने आए थे। अब सवाल उठ रहा है कि अगर राशि का उपयोग हुआ है, तो काम की गुणवत्ता और वास्तविकता क्या है?

दस्तावेजों की जांच और भौतिक सत्यापन की मांग
पंचों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि सचिव के कार्यकाल के दौरान हुए सभी वित्तीय लेन-देन और विकास कार्यों की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
उन्होंने विशेष रूप से निम्न बिंदुओं की जांच की मांग रखी है:
– मस्टर रोल और भुगतान रिकॉर्ड
– बिल-वाउचर और बैंक लेन-देन
– निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और मौके की स्थिति
– पंचायत में खरीदे गए कंप्यूटर और अन्य उपकरणों का भौतिक सत्यापन
पंचों का कहना है कि “एक-एक पैसे का हिसाब होना चाहिए, क्योंकि यह जनता का पैसा है।”
सचिव को हटाने की मांग, प्रशासन पर निगाह
शिकायत का स्वर सिर्फ जांच तक सीमित नहीं है। पंचों ने सचिव भूपदेव राठिया को विजयनगर पंचायत से तत्काल हटाने की मांग भी की है। उनका कहना है कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए यह कदम जरूरी है।
बड़ा सवाल: जवाबदेही किसकी?
अब यह मामला केवल एक पंचायत तक सीमित नहीं रह गया है। यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर भी सवाल खड़े करेगा।
सबसे अहम प्रश्न यही है—
क्या पंचायत स्तर पर पारदर्शिता सुनिश्चित हो रही है?
और अगर नहीं, तो जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया कितनी प्रभावी है?
जिला प्रशासन की ओर से अब तक इस मामले में औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन शिकायत की गंभीरता को देखते हुए आने वाले दिनों में जांच और कार्रवाई की दिशा स्पष्ट होने की संभावना है। फिलहाल विजयनगर पंचायत का यह विवाद स्थानीय राजनीति और प्रशासन दोनों के लिए परीक्षा की घड़ी बन चुका है।
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