बरौद की नई बस्ती में 700 की आबादी, फिर भी मूलभूत सुविधाएं नदारद; 21 बार पत्राचार के बाद भी नहीं बनी है बात

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com

घरघोड़ा। ग्राम बरौद में राजस्व एवं वन विभाग के रिकॉर्ड में दर्ज भूमि पर 6 वर्षों से आबाद नई बस्ती अब करीब 700 की आबादी वाली बसाहट में तब्दील हो चुकी है, लेकिन यहां आज भी सरकारी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क, बिजली, पेयजल, स्कूल, स्वास्थ्य, नाली, स्ट्रीट लाइट और अन्य जरूरी सुविधाओं के लिए लगातार शासन-प्रशासन का ध्यान आकर्षित कराया गया, लेकिन अब तक ठोस पहल नहीं हुई है।
ग्रामीणों द्वारा तैयार मांग-पत्र एवं दस्तावेज के अनुसार ग्राम बरौद (नया बस्ती), थाना एवं तहसील घरघोड़ा, जिला रायगढ़ में बड़ी संख्या में परिवार लंबे समय से निवासरत हैं। दस्तावेज में बताया गया है कि नई बस्ती में करीब 230 परिवार और लगभग 700 की आबादी निवास करती है। वहीं एक अन्य विवरण में 160 परिवारों के लंबे समय से निवासरत होने का उल्लेख किया गया है। इससे स्पष्ट है कि बसाहट अब छोटी आबादी न रहकर एक विकसित बस्ती का रूप ले चुकी है।
2025 से 2026 तक लगातार पत्राचार
ग्रामीणों ने अपनी मांगों को लेकर 5 जून 2025 से 3 अगस्त 2026 तक कलेक्टर, मुख्यमंत्री, बिजली विभाग, सांसद, विधायक, एसईसीएल सहित विभिन्न विभागों और जनप्रतिनिधियों को लगातार आवेदन एवं पत्र सौंपे हैं। दस्तावेज में 21 अलग-अलग पत्राचार एवं मांगों का क्रमवार विवरण दिया गया है।
इन पत्रों में नई बस्ती को आबादी के रूप में विकसित करने, विद्युत सुविधा उपलब्ध कराने, 30 विद्युत खंभे लगाने, विद्युत कनेक्शन एवं NOC संबंधी प्रक्रिया पूरी करने, सड़क निर्माण, पेयजल, स्कूल, आंगनबाड़ी, स्वास्थ्य सुविधा तथा अन्य बुनियादी जरूरतों को पूरा करने की मांग प्रमुखता से उठाई गई है।
एसईसीएल और प्रशासन से भी लगाई गुहार
दस्तावेज के अनुसार ग्रामीणों ने एसईसीएल प्रबंधन को भी कई बार पत्र देकर आवश्यक सुविधाओं एवं अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC) से जुड़े मामलों में सहयोग की मांग की है। सांसद रायगढ़ तथा अन्य जनप्रतिनिधियों के माध्यम से भी संबंधित विभागों तक ग्रामीणों की समस्याएं पहुंचाई गई हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि वर्षों से लोग किसी स्थान पर निवास कर रहे हैं और वहां सैकड़ों लोगों की आबादी विकसित हो चुकी है, तो उन्हें सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित रखना गंभीर समस्या है।
‘मूलभूत सुविधा होगी तो जीवन खुशहाल होगा’
ग्रामीणों ने अपनी मांगों को ‘हमारी मांग–हमारा अधिकार’ के रूप में सामने रखा है। मांग-पत्र में सड़क, बिजली, पेयजल, विद्यालय, स्वास्थ्य सुविधा, आंगनबाड़ी, नाली, पुस्तकालय, पंचायत भवन और स्ट्रीट लाइट जैसी सुविधाओं को प्राथमिकता से उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि नई बस्ती की समस्याओं को लेकर लगातार आवेदन, पत्राचार और जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों से संपर्क किया जा रहा है। अब आवश्यकता इस बात की है कि पत्राचार से आगे बढ़कर मौके पर ठोस कार्रवाई हो।
सवाल यही है कि 700 की आबादी वाली बरौद की नई बस्ती को आखिर कब तक सरकारी मूलभूत सुविधाओं का इंतजार करना पड़ेगा?
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