“अब सरपंच खुद बनाएंगे गांव का प्लान: आसान भाषा में सिखाया जा रहा विकास का पूरा तरीका”

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com
रायगढ़, 6 अगस्त 2026।
गांव के विकास को कागज से जमीन तक लाने के लिए रायगढ़ जिले में सरपंचों को अब आसान और काम की ट्रेनिंग दी जा रही है। इस ट्रेनिंग का मकसद है कि हर सरपंच अपने गांव की जरूरत समझे और उसी हिसाब से सही योजना बनाकर काम करे।
जिला पंचायत रायगढ़ द्वारा 3 अगस्त से 10 अगस्त तक चल रहे इस प्रशिक्षण में जिले के करीब 550 नए सरपंच हिस्सा ले रहे हैं। प्रशिक्षण रोज सुबह 11 बजे टी.वी. टॉवर रोड स्थित प्रशिक्षण संस्थान में हो रहा है।
क्या सिखाया जा रहा है?
इस ट्रेनिंग में सरपंचों को बहुत ही सरल तरीके से समझाया जा रहा है कि—
गांव का विकास प्लान (GPDP) कैसे बनाना है
नक्शे (मैप) देखकर योजना कैसे तय करनी है (GIS)
सरकार के प्लेटफॉर्म PM गतिशक्ति का उपयोग कैसे करना है
गांव के पानी, जमीन और जंगल का सही इस्तेमाल कैसे करें
चार बातों पर खास जोर
सरपंचों को बताया जा रहा है कि गांव का विकास इन चार चीजों पर टिकता है:
1. पानी की व्यवस्था (जल सुरक्षा)
2. सड़क, भवन जैसे काम (इन्फ्रास्ट्रक्चर)
3. रोजगार और कमाई के साधन (आजीविका)
4. आपदा से बचाव (डिजास्टर मैनेजमेंट)

सीधे शब्दों में समझिए
अधिकारियों ने सरपंचों से साफ कहा— पहले गांव की समस्या समझो
फिर लोगों से बात करो
उसके बाद ही योजना बनाओ
और काम ऐसा करो जो लंबे समय तक टिके
पानी और खेती पर ज्यादा फोकस
ट्रेनिंग में खास तौर पर ये बताया जा रहा है कि—
पानी कैसे बचाना है
सूखे कुएं-तालाब कैसे फिर से चालू करना है
जमीन में पानी कैसे बढ़ाना है
पेड़ लगाकर पर्यावरण कैसे बचाना है
रोजगार भी होगा मजबूत
सरपंचों को यह भी बताया गया कि—
गांव में काम के मौके कैसे बढ़ाएं
125 दिन तक रोजगार देने वाली योजनाओं का सही उपयोग कैसे करें
सरकारी योजनाओं को मिलाकर ज्यादा फायदा कैसे लें
क्यों जरूरी है ये ट्रेनिंग?
कई बार गांव में काम तो होता है, लेकिन सही योजना न होने से फायदा कम मिलता है। इस ट्रेनिंग का उद्देश्य यही है कि—
पैसा सही जगह लगे
काम टिकाऊ हो
गांव आत्मनिर्भर बने
प्रशासन की अपील
जिला प्रशासन ने सभी सरपंचों से कहा है कि वे इस प्रशिक्षण में जरूर शामिल हों, क्योंकि यही आगे गांव के विकास की असली नींव बनेगा।

अगर सरपंच सही तरीके से योजना बनाना सीख गए, तो गांव में पानी, रोजगार और सुविधाओं की समस्या काफी हद तक दूर हो सकती है। यह पहल “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य की ओर एक मजबूत कदम मानी जा रही है।
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