खनन जारी रखने को मिली राहत, लेकिन ‘जन-सुनवाई’ पर NGT सख्त — सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद मामला फिर भोपाल पीठ को सौंपा गया

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com
रायगढ़/भोपाल, 6 अगस्त 2026।
खनन परियोजनाओं में पर्यावरणीय मंजूरी (EC) और जन-सुनवाई की अनिवार्यता को लेकर एक अहम मामले में राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT) की केंद्रीय क्षेत्रीय पीठ, भोपाल ने महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। कनहाई राम पटेल एवं अन्य बनाम भारत संघ एवं अन्य प्रकरण में न्यायाधिकरण ने साफ किया कि खनन गतिविधियां फिलहाल जारी रह सकती हैं, लेकिन “ताजा जन-सुनवाई” कराना अब अनिवार्य होगा और इसकी निगरानी स्वयं NGT करेगा।
सुप्रीम कोर्ट से मिली आंशिक राहत
मामले की सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि अपीलकर्ता पहले ही भारत का सर्वोच्च न्यायालय पहुंच चुके थे। सर्वोच्च न्यायालय ने 2026 में दिए अपने आदेश में कहा कि चूंकि परियोजना में “पर्याप्त अनुपालन” हो चुका है, इसलिए प्रतिवादी क्रमांक-4 (खनन कंपनी) को गतिविधियां जारी रखने से रोका नहीं जाएगा।
हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट टिप्पणी की कि पर्यावरणीय स्वीकृति (EC) देने से पहले “फ्रेश पब्लिक कंसल्टेशन” होना चाहिए था, जो नहीं हुआ। इसी कमी को सुधारने के लिए मामला वापस NGT को भेजा गया।
NGT की भूमिका: अब होगी निगरानी
NGT की भोपाल पीठ, जिसमें न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति शियो कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी शामिल रहे, ने अपने आदेश में कहा—
“जन-सुनवाई” कराना अब अनिवार्य होगा
इस प्रक्रिया की निगरानी NGT करेगा
जन-सुनवाई के बाद ही आगे का अंतिम आदेश पारित किया जाएगा
साथ ही न्यायाधिकरण ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने अभी अन्य विवादित मुद्दों पर कोई राय नहीं दी है, केवल जन-सुनवाई के पहलू पर ही विचार किया गया है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश
सुनवाई के दौरान छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल (CECB) के अधिवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश की प्रति उपलब्ध कराने का अनुरोध किया, ताकि संबंधित अधिकारियों को अवगत कराकर आगे की कार्रवाई की जा सके।
NGT ने निर्देश दिया कि—
आदेश की प्रति ईमेल के माध्यम से उपलब्ध कराई जाए
CECB सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए अगली तारीख से पहले अपनी रिपोर्ट दाखिल करे
अगली सुनवाई तय
मामले को अगली सुनवाई के लिए 29 सितंबर 2026 को सूचीबद्ध किया गया है, जहां यह देखा जाएगा कि जन-सुनवाई की प्रक्रिया कितनी आगे बढ़ी और क्या नियमों का पालन हुआ।
क्या है बड़ा संदेश?
यह आदेश साफ संकेत देता है कि—
खनन कंपनियों को राहत मिल सकती है, लेकिन पर्यावरणीय प्रक्रियाओं से समझौता नहीं होगा
जन-सुनवाई केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि कानूनी अनिवार्यता है
NGT अब सीधे निगरानी की भूमिका में रहेगा
इस फैसले के बाद प्रदेश की कई लंबित और विवादित खनन परियोजनाओं पर भी इसका असर पड़ना तय माना जा रहा है, खासकर वे परियोजनाएं जहां बिना व्यापक जन-सुनवाई के पर्यावरणीय मंजूरी दी गई है।
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