सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला: ‘अफ्रेश पब्लिक कंसल्टेशन’ जरूरी, लेकिन खनन गतिविधि पर फिलहाल नहीं लगेगी रोक

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com
नई दिल्ली/रायगढ़, 24 जुलाई 2026। पर्यावरणीय मंजूरी (EC) और जनसुनवाई को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश देते हुए एक संतुलित रुख अपनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि “अफ्रेश पब्लिक कंसल्टेशन” (नई सिरे से जनसुनवाई) कराना आवश्यक है, लेकिन इसके अभाव में फिलहाल खनन गतिविधियों पर रोक नहीं लगाई जा सकती।
यह आदेश कन्हाई राम पटेल एवं अन्य बनाम भारत संघ व अन्य मामले में आया है, जिसमें महाराष्ट्र स्टेट पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड (MAHAGENCO) से जुड़ा पर्यावरणीय विवाद केंद्र में था।
क्या है पूरा मामला
दरअसल, 11 जुलाई 2022 को दी गई पर्यावरणीय स्वीकृति को चुनौती देते हुए मामला नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) पहुंचा था। NGT ने 15 जनवरी 2024 को अपने फैसले में पर्यावरण मंत्रालय को निर्देश दिया था कि वह मामले की समीक्षा करते हुए “जनसुनवाई फिर से कराए”।
हालांकि, इस आदेश के बाद भी नई जनसुनवाई आयोजित नहीं की गई, जिसे लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ (न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और वी. मोहना) ने अपने आदेश में कहा—
– “अफ्रेश” शब्द का स्पष्ट अर्थ है कि नई जनसुनवाई कराना अनिवार्य था।
– NGT का यह मानना कि बिना नई जनसुनवाई के भी प्रक्रिया पूरी मानी जा सकती है, टिकाऊ नहीं है।
– इसके बावजूद, चूंकि परियोजना में पर्याप्त अनुपालन हो चुका है, इसलिए खनन गतिविधियों को फिलहाल जारी रखने की अनुमति दी जाती है।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पर्यावरणीय मंजूरी देने से पहले नई जनसुनवाई कराना बेहतर होता, लेकिन वर्तमान स्थिति में इसे खनन रोकने का आधार नहीं बनाया जा सकता।
मामला फिर NGT को सौंपा गया
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को पुनः NGT, भोपाल (सेंट्रल जोन) को सौंपते हुए निर्देश दिया है कि—
– नई जनसुनवाई (अफ्रेश पब्लिक कंसल्टेशन) सुनिश्चित कराई जाए
– इसके बाद उचित आदेश पारित किया जाए
– अन्य लंबित मुद्दों पर भी NGT मेरिट के आधार पर सुनवाई करे
साथ ही अदालत ने कहा कि उसने अन्य मुद्दों पर कोई राय नहीं दी है।
अगली सुनवाई और निर्देश
कोर्ट ने सभी पक्षों को 3 अगस्त 2026 को NGT के समक्ष उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं और ट्रिब्यूनल से मामले का शीघ्र निपटारा करने का अनुरोध किया है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला
यह निर्णय उन सभी औद्योगिक और खनन परियोजनाओं के लिए मिसाल बन सकता है, जहां पर्यावरणीय मंजूरी और जनसुनवाई की प्रक्रिया को लेकर विवाद उठते रहे हैं। अदालत ने एक ओर कानूनी प्रक्रिया की अनिवार्यता पर जोर दिया, तो दूसरी ओर चल रही परियोजनाओं को अचानक रोकने से भी परहेज किया—यानी विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन साधने की कोशिश।
सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश स्पष्ट संकेत देता है कि पर्यावरणीय नियमों में किसी तरह की ढील स्वीकार्य नहीं होगी, लेकिन साथ ही विकास कार्यों को पूरी तरह ठप करना भी न्यायसंगत नहीं माना जाएगा। अब सबकी निगाहें NGT की आगामी कार्रवाई और नई जनसुनवाई की प्रक्रिया पर टिकी हैं।
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