भट्ठी की लापरवाही ने झुलसाईं ज़िंदगियां: मां शिवा स्टील हादसे के बाद सख्ती, यूनिट सील—एफआईआर की मांग तेज

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com
रायगढ़, 30 जुलाई 2026। औद्योगिक नगरी रायगढ़ में स्थित मां शिवा स्टील प्लांट में हुए दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर उद्योगों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इंडस्ट्रियल सेफ्टी विभाग ने प्रारंभिक जांच के बाद कड़ा रुख अपनाते हुए प्लांट की भट्ठी नंबर 3 को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया है और प्लांट संचालक रजत गेरा को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। विभागीय सूत्रों के अनुसार मामले में श्रम न्यायालय के समक्ष प्रकरण दर्ज कराने की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है।
हादसे की पृष्ठभूमि: तापमान और दबाव बना जानलेवा
इंडस्ट्रियल सेफ्टी डायरेक्टर राहुल पटेल ने बताया कि यह हादसा भट्ठी नंबर 2 से भट्ठी नंबर 3 में पिघला हुआ लोहा स्थानांतरित करने के दौरान हुआ। आरोप है कि भट्ठी नंबर 3 का तापमान अचानक बढ़ाकर लगभग 1600 डिग्री सेल्सियस कर दिया गया, जिससे अत्यधिक दबाव उत्पन्न हुआ और करीब 3 टन उबलता हुआ लावा बाहर आ गया। इसकी चपेट में आकर ड्यूटी पर मौजूद चार मजदूर गंभीर रूप से झुलस गए। इनमें से दो की हालत नाजुक बताई जा रही है और उनका इलाज रायपुर में जारी है।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक हादसा सुबह करीब 7 बजे हुआ, जब मजदूर नियमित कार्य में लगे हुए थे। शुरुआती संकेत यह दर्शाते हैं कि उत्पादन बढ़ाने की जल्दबाजी में सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई।
जांच में सामने आई लापरवाही
घटना के अगले ही दिन इंडस्ट्रियल सेफ्टी विभाग और कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) की संयुक्त टीम प्लांट पहुंची। अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया, मजदूरों के बयान दर्ज किए और सुरक्षा व्यवस्था का मूल्यांकन किया। जांच में प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट हुआ कि प्लांट प्रबंधन ने फैक्ट्री एक्ट के प्रावधानों का उल्लंघन किया है।
विभाग ने फैक्ट्री अधिनियम की धारा 41, 73, 73(E) और 7(A)(2)(A) के तहत नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। अधिकारियों का कहना है कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो आगे कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
औद्योगिक क्षेत्र में उत्पादन बढ़ाने की होड़ के बीच सुरक्षा मानकों की अनदेखी कोई नई बात नहीं है। हाल ही में के संयंत्र में हुए भीषण बॉयलर ब्लास्ट में 25 मजदूरों की जान चली गई थी। उस मामले में भी जांच में सामने आया था कि सुरक्षा नियमों की अनदेखी कर तापमान को असामान्य स्तर तक बढ़ाया गया था। उस घटना के बाद उद्योगपति के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की गई थी।
मां शिवा स्टील प्लांट का मामला भी उसी तरह की लापरवाही की कड़ी के रूप में देखा जा रहा है, जहां मुनाफे की प्राथमिकता ने श्रमिकों की सुरक्षा को पीछे धकेल दिया।
स्थानीय स्तर पर आक्रोश, एफआईआर की मांग
हादसे के बाद स्थानीय लोगों और श्रमिक संगठनों में गहरा आक्रोश है। उनका कहना है कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो ऐसे हादसे लगातार होते रहेंगे। संगठनों ने मांग की है कि प्लांट मालिक के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कर आपराधिक प्रकरण चलाया जाए।
श्रमिक नेताओं का तर्क है कि “जब तक उद्योग प्रबंधन पर व्यक्तिगत जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक सुरक्षा नियमों का पालन केवल कागजों तक ही सीमित रहेगा।”
आगे की कार्रवाई पर नजर
फिलहाल इंडस्ट्रियल सेफ्टी विभाग की जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और सख्त कदम उठाए जा सकते हैं। प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह इस घटना को एक मिसाल बनाए, ताकि औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर स्पष्ट संदेश जाए।
इस हादसे ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या औद्योगिक विकास की रफ्तार मानव जीवन की कीमत पर तय की जा रही है?
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