₹3.66 करोड़ की सड़क को मिली हरी झंडी, लेकिन शर्तों के साथ: तकनीकी मंजूरी के बाद ही आगे बढ़ेगा काम

रायपुर/रायगढ़।
छत्तीसगढ़ शासन के लोक निर्माण विभाग ने वर्ष 2025-26 के तहत रायगढ़ जिले में प्रस्तावित सड़क निर्माण कार्य को प्रशासनिक स्वीकृति तो दे दी है, लेकिन इसके साथ ही कई अहम शर्तें भी जोड़ दी गई हैं। करीब ₹3 करोड़ 66 लाख 27 हजार की लागत से बनने वाली इस सड़क परियोजना को लेकर जारी आदेश में साफ किया गया है कि बिना तकनीकी परीक्षण और निर्धारित प्रक्रिया के काम आगे नहीं बढ़ सकेगा।
मंत्रालय, नवा रायपुर से जारी आदेश के मुताबिक यह सड़क तमनार–घरघोड़ा मार्ग से जुड़े 12.30 किलोमीटर के हिस्से में बनेगी। विभाग ने इसे प्रशासनिक स्तर पर मंजूरी देते हुए स्पष्ट किया है कि कार्य शुरू करने से पहले सभी तकनीकी स्वीकृतियां लेना अनिवार्य होगा।
दरअसल, यह मामला उस समय और अहम हो जाता है जब कई बार बिना पूरी प्रक्रिया के शुरू हुए निर्माण कार्य बाद में विवादों में फंसते रहे हैं। ऐसे में इस आदेश को विभाग की सतर्कता के तौर पर देखा जा रहा है।
क्या हैं आदेश की प्रमुख शर्तें?
विभाग ने छह बिंदुओं में अपनी शर्तें स्पष्ट की हैं—
कार्य की तकनीकी स्वीकृति सक्षम अधिकारी से प्राप्त होने के बाद ही निविदा जारी की जाएगी।
पूरी प्रक्रिया के तहत ही ठेकेदार चयन और निर्माण कार्य शुरू होगा।
कार्य के दौरान किसी भी प्रकार का विचलन होने पर जिम्मेदारी तय होगी।
व्यय की सीमा और मद स्पष्ट रूप से निर्धारित की गई है, अतिरिक्त खर्च की अनुमति नहीं होगी।
निविदा प्रक्रिया प्रमुख अभियंता कार्यालय के माध्यम से ही पूरी की जाएगी।
यदि स्वीकृत दर से अधिक दर पर निविदा प्राप्त होती है तो उसे पुनः परीक्षण के लिए भेजा जाएगा।
पहले भी उठते रहे हैं सवाल
स्थानीय स्तर पर निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और प्रक्रिया को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। कई परियोजनाओं में लागत बढ़ने और समयसीमा लांघने के मामले सामने आए हैं। ऐसे में इस बार शासन का सख्त रुख संकेत देता है कि विभाग अब कागजी प्रक्रिया को औपचारिकता नहीं, बल्कि अनिवार्य जिम्मेदारी मान रहा है।
वित्तीय सीमा भी तय
वित्त विभाग की सहमति के आधार पर इस परियोजना के लिए 5 करोड़ रुपये तक की सीमा निर्धारित की गई है, जिसके भीतर ही पूरा कार्य संपादित करना होगा। इससे यह भी साफ है कि शासन खर्च नियंत्रण को लेकर सतर्क है।
क्या है इसका स्थानीय असर?
तमनार और घरघोड़ा क्षेत्र औद्योगिक गतिविधियों के कारण लगातार दबाव में हैं। बेहतर सड़क संपर्क की मांग लंबे समय से उठती रही है। यदि यह परियोजना तय समय और गुणवत्ता के साथ पूरी होती है, तो इससे क्षेत्रीय आवागमन और आर्थिक गतिविधियों को सीधा लाभ मिलेगा।
हालांकि, अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि कागजों पर सख्ती जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी साबित होती है।
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