200 दिनों से ज्यादा का इंतज़ार… तूता धरना स्थल बना संघर्ष का प्रतीक, डीएड अभ्यर्थियों की नियुक्ति मांग पर ठहरा शासन

Journalist Amardeep Chauhan
http://amarkhabar.com
रायपुर। राजधानी के नवा रायपुर स्थित तूता धरना स्थल पर बीते कई महीनों से डटे डी.एड. प्रशिक्षित अभ्यर्थियों का आंदोलन अब केवल नौकरी की मांग तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह युवाओं के धैर्य, निराशा और सिस्टम से उम्मीदों की एक लंबी कहानी बन चुका है। 24 दिसंबर 2025 से शुरू हुआ यह अनिश्चितकालीन धरना अब 200 दिनों से अधिक का सफर तय कर चुका है, लेकिन समाधान की दिशा में ठोस पहल अब तक नजर नहीं आई है।
धरना स्थल पर बैठे अभ्यर्थियों की मुख्य मांग स्पष्ट है—सहायक शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में बीएड अभ्यर्थियों को बाहर किए जाने के बाद रिक्त बचे करीब 1316 पदों पर डी.एड. पात्र उम्मीदवारों को नियुक्ति दी जाए। उनका कहना है कि ये पद उनकी योग्यता और पात्रता के अनुरूप हैं, ऐसे में सरकार को बिना देरी इन्हें भरना चाहिए।
संघर्ष की थकान, लेकिन उम्मीद कायम
लंबे समय से जारी इस आंदोलन ने अब अभ्यर्थियों की शारीरिक और मानसिक स्थिति पर असर डालना शुरू कर दिया है। धरना स्थल पर कई बार ऐसी स्थिति बनी जब अभ्यर्थियों की तबीयत बिगड़ी और उन्हें इलाज की जरूरत पड़ी। बावजूद इसके, आंदोलनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि “जब तक नियुक्ति नहीं, तब तक वापसी नहीं।”
राजनीतिक और प्रशासनिक चुप्पी पर सवाल
इतने लंबे समय तक चले इस आंदोलन के बावजूद शासन-प्रशासन की ओर से कोई ठोस और निर्णायक पहल सामने नहीं आने से सवाल उठने लगे हैं। अभ्यर्थियों का आरोप है कि उन्हें केवल आश्वासन मिल रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही।
धरना स्थल बना युवाओं की पीड़ा का केंद्र
तूता धरना स्थल अब सिर्फ एक प्रदर्शन स्थल नहीं, बल्कि हजारों युवाओं की उम्मीदों और संघर्ष का प्रतीक बन चुका है। यहां रोजाना नारे, मांगें और उम्मीदों की आवाज गूंजती है, लेकिन समाधान की राह अब भी दूर नजर आती है।
आगे क्या?
अभ्यर्थियों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा। ऐसे में अब निगाहें शासन के अगले कदम पर टिकी हैं—क्या सरकार इस लंबे संघर्ष का समाधान निकालेगी या यह आंदोलन और लंबा खिंचेगा?
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि योग्य और प्रशिक्षित युवाओं को उनके अधिकार दिलाने में आखिर इतनी देरी क्यों?
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