किसान की जमीन पर ‘कोयला साम्राज्य’, हक से वंचित परिवार—प्रशासन हरकत में

Journalist Amardeep chauhan
http://amarkhabar.com
रायगढ़, 6 जुलाई 2026 (स्पीड न्यूज)।
जिले में औद्योगिक विस्तार और खनन गतिविधियों के बीच प्रभावित ग्रामीणों के अधिकारों की अनदेखी का एक और गंभीर मामला सामने आया है। घरघोड़ा क्षेत्र के एक किसान ने आरोप लगाया है कि उसकी निजी भूमि पर कोयला उत्खनन किए जाने के बावजूद आज तक उसे न तो मुआवजा मिला और न ही परिवार के किसी सदस्य को रोजगार।
पीड़ित किसान तीर्थराज झरिया ने कलेक्टर जनदर्शन में अपनी शिकायत दर्ज कराते हुए बताया कि उसकी स्वामित्व वाली भूमि, खसरा नंबर 741/1, रकबा 0.240 हेक्टेयर को द्वारा अधिग्रहित किया गया। आरोप है कि अधिग्रहण के बाद भूमि पर कोयला खनन का कार्य भी शुरू कर दिया गया, लेकिन इसके एवज में उसे किसी प्रकार का मुआवजा नहीं दिया गया।
जमीन गई, आजीविका भी छिनी
किसान का कहना है कि उसकी आजीविका का एकमात्र साधन यही भूमि थी। जमीन पर खनन शुरू होने के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति पूरी तरह डगमगा गई है। आज स्थिति यह है कि परिवार के सामने रोजमर्रा के भरण-पोषण का संकट खड़ा हो गया है। पीड़ित ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि या तो उसे नियमानुसार मुआवजा दिया जाए या परिवार के किसी सदस्य को रोजगार उपलब्ध कराया जाए।
प्रशासन ने लिया संज्ञान
मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने तत्काल संज्ञान लिया है। उन्होंने घरघोड़ा के अनुविभागीय अधिकारी (SDM) को पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं। साथ ही स्पष्ट किया गया है कि जांच के आधार पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
प्रश्नों के घेरे में खनन प्रक्रिया
यह मामला एक बार फिर उस व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है, जिसमें बड़े पैमाने पर खनन तो किया जाता है, लेकिन प्रभावितों के अधिकारों और पुनर्वास की प्रक्रिया अक्सर अधूरी रह जाती है। खास बात यह है कि यहां आरोप किसी निजी कंपनी पर नहीं, बल्कि एक सरकारी उपक्रम पर लगे हैं, जिससे जवाबदेही और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन की इस सक्रियता के बाद संबंधित प्रबंधन कब तक जवाब देता है और क्या पीड़ित किसान को उसका वैधानिक हक मिल पाता है या नहीं।
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